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    लखनऊ में पुस्तक मेला:योगेंद्र बोले- साहित्य समाज की असली ताकत, किताबें देती हैं जीवन को दिशा

    4 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शुक्रवार को चारबाग स्थित रवीन्द्रालय में आयोजित लखनऊ पुस्तक मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकाशकों के स्टॉलों का अवलोकन किया और पुस्तकों के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी भाषा और समाज के सम्मान का आधार होता है और पुस्तकें ज्ञान, संस्कार तथा विचारों की अमूल्य धरोहर होती हैं। साहित्य समाज की असली पहचान और सम्मान का आधार उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि साहित्य किसी भी भाषा और समाज के सम्मान की सबसे मजबूत नींव होता है। जब विद्वानों और चिंतकों के विचार पुस्तकों के रूप में संकलित होते हैं तो वे केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान का स्थायी स्रोत बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज की वैचारिक समृद्धि और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्य को सोचने, समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। समाज के बौद्धिक विकास में पुस्तकों का योगदान अतुलनीय है और यही कारण है कि हर सभ्यता और संस्कृति में साहित्य को विशेष स्थान दिया गया है। पुस्तक मेले से पाठकों को मिलता है व्यापक ज्ञान योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पुस्तक मेले का आयोजन पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है क्योंकि एक ही स्थान पर अनेक विषयों से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हो जाती हैं। इससे पाठकों को विविध विषयों का अध्ययन करने का अवसर मिलता है और उनका दृष्टिकोण व्यापक होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले जैसे आयोजन समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं और लोगों को किताबों से जोड़ते हैं। इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को ज्ञान और सकारात्मक विचारों की ओर प्रेरित करने का माध्यम बनते हैं। सर्वांगीण ज्ञान के लिए पुस्तकों का अध्ययन जरूरी उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय विषय विशेष की शिक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन मनुष्य का सर्वांगीण विकास केवल पुस्तकों के अध्ययन से ही संभव होता है। उन्होंने कहा कि किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र, मार्गदर्शक और गुरु होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक संख्या में पुस्तक मेले में आएं और विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अध्ययन करें। इससे उनके ज्ञान में वृद्धि होगी और वे समाज तथा राष्ट्र के विकास में अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभा सकेंगे। तकनीक के दौर में भी पढ़ने की संस्कृति जरूरी योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आज के समय में तकनीक और मोबाइल का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी पुस्तकों से जुड़ी रहेगी तो समाज में सकारात्मक विचारों और संस्कारों का प्रसार होगा। उन्होंने कहा कि किताबें मनुष्य को धैर्य, चिंतन और गहराई से सोचने की क्षमता प्रदान करती हैं, जो केवल तकनीकी माध्यमों से संभव नहीं हो पाती। भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ती हैं पुस्तकें उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत पर आधारित है और साहित्य इस विचार को समाज में जीवित रखने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को समझने के लिए पुस्तकों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने लखनऊ पुस्तक मेले के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर मुरलीधर अहुजा (संरक्षक), मनोज सिंह चंदेल (संयोजक), टी.पी. हवेलिया (संरक्षक), आर्कष चंदेल (निदेशक) तथा यू.पी. त्रिपाठी (संस्थापक, विश्वम फाउंडेशन) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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