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    लखनऊ में स्कूलों के बाहर जाम पर सरकार को निर्देश:हाईकोर्ट ने कहा- ट्रैफिक प्रबंधन के लिए ठोस दिशा-निर्देश बनाकर हमें बताएं

    1 hour ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ के स्कूलों के बाहर बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्कूलों के बाहर लगने वाले जाम को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्कूलों के आसपास ट्रैफिक प्रबंधन के लिए ठोस और प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय भारी जाम की स्थिति छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने इस समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि संबंधित विभागों, अथॉरिटी से सलाह लेने के बाद सरकार एक रिपोर्ट बनाए। उसे अगली सुनवाई 10 मार्च को पेश करें। जिम्मेदारों ने बताया- मार्शल नियुक्त करेंगे न्यायालय में उपस्थित एडीजी लखनऊ सतीश गणेश और लखनऊ डीसीपी कमलेश दीक्षित (ट्रैफिक) ने बताया कि 1500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में कम से कम 10 प्रशिक्षित "मार्शल" नियुक्त करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इन मार्शलों का मुख्य दायित्व स्कूल समय के दौरान ट्रैफिक को नियंत्रित करना और जाम की स्थिति को संभालना होगा। डीसीपी (ट्रैफिक) कमलेश दीक्षित ने न्यायालय को सूचित किया कि ट्रैफिक पुलिस ऐसे मार्शलों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार है और इस प्रक्रिया में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा। सरकार सलाह ने के बाद रिपोर्ट तैयार करे अदालत ने राज्य सरकार को पीडब्ल्यूडी, लखनऊ विकास प्राधिकरण, यूपी आवास एवं विकास परिषद, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला प्रशासन और नगर निगम लखनऊ जैसी संबंधित एजेंसियों से परामर्श कर दिशा-निर्देशों की व्यवहार्यता पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने नए स्कूलों के निर्माण की अनुमति देते समय ट्रैफिक नियंत्रण और सड़क क्षमता जैसे पहलुओं के आकलन के संबंध में भी जानकारी मांगी। इस विषय पर विस्तृत विवरण अगली सुनवाई पर देने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी, जिस पर डीसीपी (ट्रैफिक) को न्यायालय में उपस्थित रहने का भी आदेश दिया गया है।
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