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    लखनऊ में व्हाट्सएप पर 'बॉस' बनकर ठगे 18 लाख:नाम और डीपी देखकर कर्मचारी ने किया ट्रांसफर, जानिए कैसे काम करता यह स्कैम

    21 hours ago

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    डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी के बाद अब साइबर जालसाजों ने लोगों को फंसाने का नया तरीका अपना लिया है। लखनऊ में पहली बार 'बॉस स्कैम' का मामला सामने आया है। इस ठगी में जालसाज खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी या बॉस बताकर कर्मचारियों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। समय रहते शिकायत मिलने पर साइबर टीम ने ठगी गई रकम का करीब 70% रिकवर कर लिया, लेकिन पुलिस इसे साइबर अपराध का नया और गंभीर ट्रेंड मान रही है। सबसे पहले पढ़िए ये केस- साइबर ठगों ने हजरतगंज स्थित Calcutta Regalia के अकाउंटेंट के वॉट्सएप पर कारोबारी का बेटा बनकर मैसेज भेजा। मैनेजर के पास उनके बेटे का नंबर सेव था। लेकिन जालसाज ने नाम वही रखा और नंबर बदल दिया। इसके बाद मैनेजर को गुमराह करके 18 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। जब कारोबारी से बातचीत हुई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि पुलिस ने ठगी के 10.75 लाख रुपए वापस करवा दिए। कंपनी के इन लोगों को रहना होगा सावधान बॉस स्कैम करने वालों के निशाने पर फाइनेंस टीमें, अकाउंट्स विभाग, एचआर प्रोफेशनल्स और एग्जीक्यूटिव होते हैं, क्योंकि इनके पास फंड ट्रांसफर करने का अधिकार होता है। इसके अलावा, नए कर्मचारी भी इसका शिकार आसानी से बन सकते हैं क्योंकि वे कंपनी की प्रक्रियाओं से पूरी तरह वाकिफ नहीं होते। जिसके चलते सबसे ज्यादा सावधान रहने की इन लोगों को जरूरत है। वॉट्सएप और डीपी देखकर पैसा न भेजे एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि केवल वॉट्सएप प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी पर भरोसा न करें। किसी भी ट्रांजेक्शन से पहले संबंधित अधिकारी से आधिकारिक नंबर पर पुष्टि करें। संस्थानों को दो-स्तरीय (मेकर-चेकर) या मल्टी-लेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करना चाहिए। किसी भी अज्ञात लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध एप डाउनलोड न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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