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    लखनऊ संग्रहालय में 'प्रागैतिहासिक भारत' पर व्याख्यान:प्रो. अनिल कुमार ने पाषाण युग के औजारों और जीवनशैली को समझाया

    2 hours ago

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    लखनऊ के राज्य संग्रहालय, लखनऊ में ‘प्रागैतिहासिक भारत की संस्कृतियां’ विषय पर एक रोचक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से कला अभिरूचि पाठ्यक्रम की व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत किया गया।जिसमें छात्रों को इतिहास के शुरुआती दौर को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कुमार के स्वागत के साथ हुई। वे लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। डॉ. मीनाक्षी खेमका ने उनका परिचय कराया और प्रतिभागियों को कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराया। जब मनुष्य पत्थर के औजारों का उपयोग करता था मुख्य वक्ता ने अपने व्याख्यान में प्रागैतिहासिक काल को मानव इतिहास का प्रारंभिक चरण बताते हुए विस्तार से समझाया कि यह वह समय था जब मनुष्य पत्थर के औजारों का उपयोग करता था, गुफाओं में रहता था और शिकार के जरिए जीवन यापन करता था। उन्होंने पाषाण युग के विभिन्न चरणों और उनके कलानुक्रम को सरल भाषा में समझाया। समय के साथ मानव जीवनशैली और उपकरणों में बदलाव आया चित्रों के माध्यम से उन्होंने उस दौर के ‘हस्त कुठार’ जैसे औजारों की बनावट, उपयोग और उनके विकास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय के साथ मानव जीवनशैली और उपकरणों में बदलाव आया, जो सांस्कृतिक परिवर्तन का संकेत देता है। व्याख्यान के दौरान प्रागैतिहासिक गुफाओं और उनमें बने चित्रों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि इन चित्रों में उस समय के जीवन, विश्वास और प्रकृति से जुड़ाव की झलक मिलती है। आज भी आदिवासी और जनजातीय संस्कृति में इन परंपराओं के कुछ अंश देखे जा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त किया और प्रतिभागियों को ऐसे कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। संचालन डॉ. मीनाक्षी खेमका ने किया। इस अवसर पर संग्रहालय के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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