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    लेम्बोर्गिनी केस- तंबाकू कारोबारी के बेटे की मुश्किलें बढ़ीं:ड्राइवर ने सरेंडर किया; कानपुर कोर्ट ने नहीं माना आरोपी

    16 hours ago

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    कानपुर के लेम्बोर्गिनी केस में बुधवार को बड़ा यूटर्न आया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर ने बुधवार दोपहर कानपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी, उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कार अभी थाने में ही रहेगी। इससे पहले ड्राइवर मोहन अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी मैं ही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। उस वक्त मैं घबरा गया और मुझे कुछ समझ में नहीं आया। उसी वक्त हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा और दरवाजा खोला गया, तो मैं नीचे से निकल गया था। बाउंसर ने शिवम को निकाला था। हादसे के बाद मैं कोने में खड़ा हो गया था। शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया था। वहीं, वकील नरेंद्र कुमार यादव ने कहा- घायल और मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता किया है। वादी ने पहचान की है कि गाड़ी मोहन ही चला रहा था। वादी ने कहा है कि वह इस केस में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहता। जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी ने कहा- आरोपी शिवम मिश्रा की ओर से उनके वकील ने जब्त लेम्बोर्गिनी कार को रिलीज कराने के लिए अर्जी दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान मोहन ने कहा कि गाड़ी वह ड्राइव कर रहा था। जबकि कानपुर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम मिश्रा को ही ड्राइवर बताया है। बता दें, कि लेम्बोर्गिनी कार ने रविवार को 6 लोगों को कुचल दिया था। इसका वीडियो सामने आया था। पुलिस कमिश्नर ने जांच के हवाले से दावा किया था कि लेम्बोर्गिनी तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। शिवम मिश्रा का नाम भी FIR में जोड़ा गया था। केस की जांच कर रहे ग्वालटोली थाने के दरोगा दिनेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में शिवम को आरोपी माना है। सारे सबूत कोर्ट में पेश किए। कारोबारी ने कहा था- पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे इससे पहले मंगलवार दोपहर कारोबारी केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया था कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। केके मिश्रा ने कहा था कि हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई थी। ठीक होने पर बेटे को लेकर मैं खुद थाने आऊंगा। मीडिया ने पूछा कि पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि गाड़ी शिवम चला रहा था। इस पर केके मिश्रा ने जवाब दिया था कि पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे। हालांकि, पुलिस की जांच में CCTV, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कई ऐसे अहम सबूत सामने आए। इनसे साफ है कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। हादसा उसी से हुआ था। कार में कोई दूसरा व्यक्ति या ड्राइवर मौजूद नहीं था। अब जानिए पुलिस की जांच रिपोर्ट में 5 बड़े सबूत 1- हादसे के वीडियो ने बयां की थी सच्चाई पुलिस ने अपनी जांच में हादसे के बाद का एक वीडियो शामिल किया। इसमें हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी के पीछे चल रही दूसरी कार से बाउंसर निकलते हैं। ईंट से लेम्बोर्गिनी का शीशा तोड़कर गेट खोलते हैं। फिर लेम्बोर्गिनी की ड्राइविंग सीट से शिवम को बाहर निकालते हैं और उसे दूसरी गाड़ी से लेकर अस्पताल चले जाते हैं। पुलिस का दावा किया था कि शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते साफ देखा जा सकता है। वीडियो देखने से साफ होता है कि गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति था ही नहीं। इस वजह से ईंट से शीशा तोड़ना पड़ा। तब कार का दरवाजा खोलकर शिवम को बाहर निकाला जा सका था। 2- 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों ने दिए थे बयान पुलिस की जांच रिपोर्ट में दूसरा सबसे बड़ा सबूत प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हैं। जांच कर रहे दरोगा दिनेश सिंह ने 10 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। इन सभी ने बताया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। गाड़ी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं मौजूद था। हादसे के बाद शिवम को बाउंसर कार से निकालकर ले गए। ड्राइवर के गाड़ी चलाने या कार में किसी दूसरे व्यक्ति के मौजूद होने की बात को सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने खारिज कर दी थी। पुलिस ने इन सभी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अपनी जांच रिपोर्ट में दर्ज किए। 3- शिवम की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर मिली पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में बतौर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शिवम की मोबाइल लोकेशन को भी शामिल किया। हादसे के दौरान शिवम की मोबाइल लोकेशन भी VIP रोड पर हादसे वाली जगह पर ही थी। 4- CCTV में कैद हुई है पूरी घटना पुलिस ने जांच रिपोर्ट में CCTV फुटेज भी शामिल किया। नगर निगम से मिले CCTV में पूरा हादसा कैद हुआ था। इस फुटेज से भी साफ है कि गाड़ी में कोई ड्राइवर नहीं था, सिर्फ एक व्यक्ति ही मौजूद था। 5- वादी ने पहले अपने बयान में भी शिवम को पहचाना था पुलिस ने हादसे की FIR दर्ज कराने वाले चमनगंज घुसियाना निवासी मो. तौफीक के बयान दर्ज किए थे। उसने बताया था कि लेम्बोर्गिनी में सिर्फ एक ही व्यक्ति ड्राइविंग सीट पर था। वीडियो देखकर तस्दीक किया कि कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वादी का बयान भी किसी केस में सबसे अहम माना जाता है। लेम्बोर्गिनी से 6 को उड़ाया था, जानिए पूरा मामला VIP रोड पर 8 फरवरी की दोपहर तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी ने 6 को उड़ा दिया था। पुलिस ने घायल मो. तौफीक की शिकायत पर कार नंबर के आधार पर FIR दर्ज की थी। जबकि हादसे का लाइव वीडियो समेत कई अहम सबूत थे। लेकिन, अरबपति कारोबारी के रसूख के चलते पुलिस ने गाड़ी नंबर के आधार पर केस दर्ज किया था। हाई प्रोफाइल मामले में आरोपी को राहत देने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिए थे। इस पर पुलिस ने आनन-फानन में 9 फरवरी को हादसे के 24 घंटे बाद कार चालक शिवम मिश्रा का नाम FIR में बढ़ा दिया था। इसके बाद 10 फरवरी को शिवम के पिता केके मिश्रा ग्वालटोली थाने में बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया था कि गाड़ी उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था, बेटा कार में बैठा था। यह भी बताया कि उसकी तबीयत बिगड़ने की वजह से बेटा शिवम बयान दर्ज कराने नहीं आ सका। -------------------------------- यह खबर भी पढ़िए- कारोबारी बोले-कानपुर पुलिस कमिश्नर झूठ बोल रहे, लेम्बोर्गिनी बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था कानपुर में लेम्बोर्गिनी कार से 6 लोगों को कुचलने के मामले में नया ट्विस्ट आ गया है। कारोबारी पिता केके मिश्रा मंगलवार को ग्वालटोली थाने पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर मोहन लेम्बोर्गिनी कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
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