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    मछली व्यापारी ने रिटायर्ड डॉक्टर को किया डिजिटल अरेस्ट:गोरखपुर में 8 दिन में 1.58 करोड़ हड़पे, ED का अधिकारी बनकर डराया

    4 hours ago

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    गोरखपुर के कैंट इलाके की रिटायर आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव (64) को आठ दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई थी। इस मामले में पुलिस ने वाराणसी के मछली व्यापारी को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश कर दिया। आरोपी ने मछली के व्यापार के लिए खोले गए खाते में 80 लाख रुपए की रकम मंगाई थी। इसके चंद सेकेंडों बाद ही 40 अलग-अलग खातों में रकम को ट्रांसफर कर दिया गया। पूछताछ में पुलिस को आरोपी ने तीन सहयोगियों का नाम बताया है, जो फरार हो गए हैं। बुधवार को पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। अब गोरखपुर साइबर क्राइम थाने की पुलिस फरार साथियों की तलाश में जुटी है। पकड़े गए आरोपी की पहचान वाराणसी जिले के चितईपुर थाना क्षेत्र के गणेशपुरी कॉलोनी नासिपुर निवासी विकास विश्वकर्मा के रूप में हुई। ईडी का अधिकारी बनकर की थी कॉल कैंट इलाके में रहने वाली डॉ. मंजुला वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुई हैं और पति के निधन के बाद अकेली रहती है। एक बेटे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा बेटा गुजरात में रहता है। 13 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस और ईडी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। जालसाजों ने एक एटीएम कार्ड दिखाकर कहा कि केनरा बैंक खाते से 50 लाख रुपये का लेनदेन संदिग्ध है।गिरफ्तारी और एक साल की जेल की धमकी देकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रहने को कहा गया। 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार फोन पर जुड़े रहे। बैंक जाते समय भी मोबाइल ऑन और चार्जिंग पर रखने को कहा गया। इस दौरान उन्होंने सारी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। परिवार को जानकारी देने से भी मना किया गया। 21 फरवरी को बची 30 लाख रुपये की एफडी भी तुड़वाकर ट्रांसफर करा दी गई। 24 फरवरी को जालसाजों ने फर्जी ईडी रसीदें भेजीं और भरोसा दिलाया कि पैसा लीगलाइजेशन के बाद वापस आ जाएगा। जब रकम वापस नहीं आई तो डॉ. मंजुला को ठगी का एहसास हुआ। 26 फरवरी को इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने वाराणसी के व्यापारी को दबोच लिया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक कपिलदेव चौधरी, उप निरीक्षक रजत शुक्ला आदि शामिल थे। पुलिस ने जारी किया लोकल नंबर पुलिस की ओर से बताया गया है कि अगर साइबर अपराध हो या फिर शक तो तत्काल फोन काट दें। साइबर जालसाजी की सूचना राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 1930, पोर्टल: cybercrime.gov.in पर दे। इसके अलावा गोरखपुर साइबर थाना के सीयूजी 91 7839876674 से संपर्क करें। इस संबंध में एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने कहा कि पुलिस ने आठ दिन डिजिटल अरेस्ट रहने वाली डॉक्टर की तहरीर पर अज्ञात पर केस दर्ज किया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।
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