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    महराजगंज में टीनशेड, जर्जर भवनों में चल रहे निजी स्कूल:नियमों की अनदेखी कर बांटी गई मान्यता, खतरे में बच्चों की सुरक्षा

    1 hour ago

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    महराजगंज जनपद में बड़ी संख्या में निजी विद्यालयों को नियमों की अनदेखी कर मान्यता दिए जाने का मामला सामने आया है। इन विद्यालयों में सरकारी मानकों का उल्लंघन करते हुए टीनशेड और जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं। जनपद में मानकविहीन निजी स्कूलों को 'रेवड़ी' की तरह मान्यता बांटने में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। शिक्षा विभाग की कथित कृपा से पूरे जिले में बड़ी संख्या में ऐसे 'शिक्षा की दुकानें' संचालित हो रही हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी ने भी स्वीकार किया है कि इस मान्यता वितरण में 'बड़ा खेल' हुआ है। इस 'खेल' में शामिल लोगों ने शासनादेशों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना किसी नियम-कानून की परवाह किए टीनशेड और जर्जर कमरों वाले विद्यालयों को भी मान्यता दे दी है। इन विद्यालयों में शिक्षा के नाम पर मासूमों की जान और भविष्य दोनों को जोखिम में डाला जा रहा है, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी प्रावधानों के अनुसार, किसी भी स्कूल को मान्यता देने से पहले उसकी स्थिति, क्षेत्रफल, भवन की संरचना और अन्य मानकों की जांच की जाती है। खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तर पर हर बिंदु की पड़ताल होती है और तभी मान्यता दी जाती है। हालांकि, महराजगंज जिले में यह प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह गई है। सूत्रों के अनुसार, जिले के विभिन्न विकास खंडों में बिना उचित जांच-पड़ताल किए ही स्कूलों को मान्यता दे दी गई। मानकों की अनदेखी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों ने आंख मूंदकर मान्यताएं बांटी हैं। सूत्रों का दावा है कि मान्यता दिलाने के लिए विभाग में मोटी रकम का लेन-देन होता है, जिससे बुनियादी सुविधाएं न होने पर भी स्कूलों को मान्यता मिल जाती है। कई मान्यता प्राप्त स्कूलों में न तो पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही खेल का मैदान। भवन की स्थिति भी जर्जर है। शहर से लेकर गांवों तक, टीनशेड में संचालित स्कूलों को भी मान्यताएं दे दी गई हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि बीएसए कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित कई विद्यालय भी मानकों के विपरीत चल रहे हैं। बीआरसी सदर, मिठौरा, निचलौल, सिसवा, घुघली, परतावल, पनियरा, फरेंदा, धानी, बृजमनगंज, लक्ष्मीपुर और नौतनवा क्षेत्रों में ऐसे स्कूल बेखौफ संचालित हो रहे हैं।शिक्षा विभाग की इस ढिलाई से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल हो गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों के तहत जांच जरूरी है, तो बिना जांच के मान्यता कैसे दी गई? क्या विभागीय अधिकारी जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं या यह पूरा खेल आर्थिक लाभ के लिए खेला जा रहा है?इस मामले में जब बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पाण्डेय से मानकविहीन निजी स्कूलों को नियमों को ताक पर रखकर मान्यता देने और निजी स्कूल संचालन संबंधी नियमों की जानकारी लेने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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