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    महर्षि दयानंद सरस्वती को सांस्कृतिक संध्या में नमन:डॉ. दरबारी लाल अस्थाना ट्रस्ट ने जयंती माह पर किया आयोजन

    2 hours ago

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    आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती को उनकी जयंती माह के अवसर पर एक सांस्कृतिक संध्या में भावभीनी नृत्यांजलि अर्पित की गई। यह कार्यक्रम वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी डॉ. दरबारी लाल अस्थाना ट्रस्ट द्वारा चिनहट स्थित सनातन धाम लॉन, रजत डिग्री कॉलेज के समक्ष आयोजित किया गया। इस प्रेरक सांस्कृतिक संध्या में नृत्यांगना अंशिका त्यागी और उनकी टीम ने 'मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम' पर आधारित सतरंगी भाव नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। 'जनमे अवध में राम मंगल गाओ रे', 'ठुमक चलत राम चंद्र', 'हम कथा सुनाते हैं' और 'राम आवे अवध की ओर' जैसे गीतों पर सजी इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक प्रस्तुति में भक्ति, संस्कृति और भारतीय परंपरा का स्पष्ट चित्रण था। डॉ. दरबारी लाल अस्थाना सम्मान से सम्मानित किया कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ समाज सेविका सपना गोयल और नृत्यांगना अंशिका त्यागी को डॉ. दरबारी लाल अस्थाना सम्मान से सम्मानित किया गया। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गूंज से उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन नीशू त्यागी ने किया, जबकि शची द्विवेदी, दिशा गुप्ता, सोनाली गौड़, अभय कुमार, विशाल गुप्ता और अरुण सोनकर ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सराहना बटोरी। महर्षि दयानंद ने 1876 में 'स्वराज्य' का नारा दिया सह-संयोजिका रत्ना अस्थाना ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर चर्चा की । उन्होंने बताया कि महर्षि ने 1876 में 'स्वराज्य' का नारा देकर देश में नवजागरण की अलख जगाई थी। 12 फरवरी 1824 को जन्मे महर्षि ने सत्य, वैदिक ज्ञान, सामाजिक सुधार और शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान की। इसी क्रम में डॉ. दरबारी लाल अस्थाना के जीवन से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। उनका जन्म 24 जुलाई 1905 को आगरा में हुआ था। 1930 के सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें गिरफ्तार कर छह माह का कठोर कारावास भुगतना पड़ा था। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने चिकित्सा सेवा और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र से सम्मानित किया था।
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