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    मन की उलझनों से छुटकारा दिलाएगा 'MCE' फॉर्मूला:चिन्मय मिशन की स्वामिनी विमलानंद बोलीं-10 मिनट का ध्यान व्यक्तित्व बदल देगा

    2 hours ago

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    भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के बीच मन को शांत रखने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। 'श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक वांग्मय शोध पीठ' और 'स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज' की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में चिन्मय मिशन, कोयंबटूर की आचार्या स्वामिनी विमलानंद जी ने छात्रों और शिक्षकों को मन प्रबंधन के गुर सिखाए। उन्होंने साफ किया कि एक बिखरे हुए व्यक्तित्व को समेटने के लिए इंसान को अपने अंतःकरण की आवाज सुनना जरूरी है। स्वामिनी विमलानंद जी ने अपने संबोधन में 'M.C.E.' नियम पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को दिन भर में कम से कम 10 मिनट का समय 'न्यूनतम, अनिवार्य और विशिष्ट' (Minimum, Compulsory, and Exclusive) ध्यान के लिए निकालना चाहिए। यह छोटा सा अभ्यास मानसिक शांति देने के साथ-साथ कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वयं का बेहतर संस्करण बनाने के लिए विवेक और सही चुनाव की शक्ति का उपयोग करना अनिवार्य है। साधन और साध्य के बीच का अंतर समझना जरूरी एक घंटे के विशेष प्रवचन में स्वामिनी जी ने मानव मन की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग साधन और साध्य यानी अपने लक्ष्य के बीच के संबंध को भूलते जा रहे हैं। एक एकीकृत व्यक्तित्व की ओर बढ़ने के लिए अच्छी संगति और चरित्र निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद अतिथियों का सम्मान किया गया। आधुनिक जीवन में आध्यात्म की भूमिका कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर आर.के. द्विवेदी ने आधुनिक जीवन की जटिलताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, विशेषकर युवाओं के लिए आध्यात्म और ज्ञान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं डॉ. अनिल गुप्ता ने 'गीता शोध पीठ' द्वारा किए जा रहे कार्यों और शोध के बारे में जानकारी साझा की। सत्र के दौरान पूरा हॉल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा और लोग स्वामिनी जी के विचारों से मंत्रमुग्ध नजर आए। इस ज्ञानवर्धक सत्र में स्वामी राघवानंद जी, राज कुमार लोहिया जी, डॉ. अंजू दीक्षित और डॉ. नमिता तिवारी सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य और भारी संख्या में छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दुर्गेश सिंह ने किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने माना कि मानसिक कल्याण के लिए उन्हें एक नई दिशा और स्पष्ट मार्ग मिला है।
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