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    Maoist leader Azad को Odisha Court ने स्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांड में किया बरी

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    ओडिशा की एक विशेष अदालत ने 2008 में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार शिष्यों की हत्या के मुख्य आरोपी माओवादी नेता डुन्ना केशव राव, उर्फ़ आजाद को मंगलवार को बरी कर दिया। सरस्वती की हत्या के बाद कंधमाल और राज्य की अन्य जगहों पर बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। अदालत ने आजाद को सबूतों के अभाव में हत्या के आरोपों से बरी किया।इस घटनाक्रम के साथ ही, माओवादी नेता को राज्य में उसके खिलाफ दर्ज सभी 47 मामलों से बरी कर दिया गया है। आजाद (53) को मंगलवार शाम यहां के विशेष कारागार से रिहा कर दिया गया। वह 2011 में आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद से जेल में था और उसे रिमांड पर ओडिशा लाया गया था।आज़ाद ने शहर की झारपाड़ा जेल के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं जेल से रिहाई पर बहुत खुश हूं। मेरी रिहाई में सहयोग के लिए मैं सभी का धन्यवाद करता हूं।’’ गजपति जिले के परलाखेमुंडी स्थित विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण पात्रा ने आजाद को बरी करते हुए कहा, ‘‘इन हालात से एक वाजिब और ठोस आशंका पैदा होती है कि क्या डी. केशव राव उन लोगों में से एक थे जिन्होंने इस घटना में हिस्सा लिया था।’’ न्यायाधीश ने 40 पन्नों के फैसले में कहा, ‘‘यह आशंका कोई मनगढ़ंत या दूर की कौड़ी नहीं है। यह सीधे अभियोजन पक्ष के सबूतों से ही पैदा होती है।यह एक स्थापित सिद्धांत है कि जब सबूतों के आधार पर दो रायें संभव हों, तो आरोपी के पक्ष वाली राय को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत केवल इसलिए शक को सबूत में नहीं बदल सकती कि अपराध बहुत गंभीर है।’’ विशेष लोक अभियोजक पी. प्रसाद राव ने बताया कि अदालत ने पुलिस और चश्मदीदों समेत 22 गवाहों के बयान दर्ज किए। तुमुदिबंधा पुलिस थाना इलाके के जलेस्पेटा में स्थित आश्रम में, सरस्वती और उनके चार सहयोगियों (जिनमें एक महिला भी शामिल थी) की 23 अगस्त 2008 को 20 नकाबपोश लोगों के एक समूह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।पुलिस ने बताया कि अपराध करने के बाद, आरोपी आश्रम से भाग गए और उड़िया में लिखा एक पत्र छोड़ गए, जिसमें कहा गया था कि यह हत्या बंसधारा डिवीज़न के माओवादियों ने की है। पत्र पर अंग्रेज़ी में ‘आजाद’ नाम से हस्ताक्षर थे।
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