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    मार्च की शुरुआत में ही गर्मी ने छुड़ाया पसीना:दिन का पारा 35 डिग्री पहुंचा, 10 दिनों में 3.5 डिग्री बढ़ा तापमान

    4 hours ago

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    कानपुर में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 34.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.8 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 4.2 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप के कारण दिन में सड़कों पर निकलने वाले लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा है। मार्च महीने की बात करें तो शुरुआती 10 दिनों में तापमान 3.5 डिग्री के करीब बढ़ा है। अब तापमान लगातार बढ़ेंगे कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में लगातार वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गुरुवार से सुबह से ही तेज धूप निकलने के आसार हैं, जिससे दिन में गर्मी और बढ़ेगी। हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। बाजार और सड़कों पर दोपहर में छा रहा सन्नाटा मौसम विभाग के अनुसार इस समय दिन और रात दोनों के तापमान सामान्य से अधिक बने हुए हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो मार्च के अंत तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान का इतना अधिक होना इस बार गर्मी के मौसम के ज्यादा तीखा रहने के संकेत दे रहा है। फिलहाल दोपहर के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है और बाजारों व सड़कों पर भीड़ कम दिखाई दे रही है। एक दिन पहले सुबह धुंध छाई थी कानपुर के कई इलाकों में मंगलवार सुबह मौसम अचानक बदला दिखा। नरवल और बिल्हौर एरिया में सुबह घनी धुंध छाई रही। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने कहा- दिसंबर और जनवरी जैसा कोहरा छाया दिखा। बिल्हौर में विजिबिलिटी करीब 30 मीटर रही। वहीं, दोपहर तेज धूप निकली। अचानक धुंध की एक और वजह? बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी? स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी से फसलों को होगा नुकसान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा, खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है।
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