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    मऊ में किसान मोर्चा ने कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन:एमएसपी गारंटी, कर्जमाफी, मुफ्त बिजली और न्यूनतम वेतन की मांग

    2 hours ago

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    मऊ। संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के बैनर तले सोमवार को दोपहर करीब एक बजे सैकड़ों किसानों और मजदूरों ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाई। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा गया। किसान मोर्चा ने सभी फसलों की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय कर उस पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग की। इसके अलावा किसानों को कर्जमुक्त करने, उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और 60 वर्ष की आयु के बाद किसानों व मजदूरों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन/मजदूरी 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने, कार्य के घंटे आठ निर्धारित करने और ओवरटाइम का दो गुना वेतन देने की मांग की। किसान मोर्चा ने चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग भी की। आशा संगिनी, रसोइया, आंगनबाड़ी, पंचायत सेवक, चौकीदार समेत सभी स्कीम वर्करों को 26 हजार रुपये मासिक वेतन, कर्मचारी का दर्जा, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन देने की मांग ज्ञापन में शामिल रही। बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने बिजली दरों में वृद्धि और उपभोक्ताओं पर पड़ रहे अतिरिक्त भार का विरोध किया। ईंधन अधिभार समेत सभी अतिरिक्त शुल्क वापस लेने और सभी उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के चुनावी वादे को पूरा करने की मांग की गई। संयुक्त किसान मोर्चा ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का भी विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह समझौता भारतीय खेती और किसानों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, इसलिए इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। ज्ञापन में मनरेगा को मजबूत करने, साल में 200 दिन रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग भी की गई। इसके अलावा गरीबों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराने, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की गई। भूमिहीन गरीबों को आवास और खेती के लिए भूमि का पट्टा देने, अन्यायपूर्ण भूमि अधिग्रहण रोकने और भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का कड़ाई से पालन कराने की मांग भी उठाई गई। ज्ञापन में राम मंदिर में चढ़ावे, चंदे और भूमि खरीद से जुड़े कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने मंदिरों के प्रशासन में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दिया। किसान मोर्चा ने देशभर में सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों की उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों को सजा देने की मांग की। छात्रों और युवाओं पर कथित लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। साथ ही पेपर लीक के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करने, विरोध की आवाज दबाने, धरना-प्रदर्शन पर रोक, हाउस अरेस्ट और अन्य कथित अलोकतांत्रिक कदमों को बंद करने की मांग की। किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की।
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