Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    नोएडा में महर्षि आश्रम भूमि मामले की जांच तेज:एसआईटी ने डीएम-सीईओ से मांगी रिपोर्ट, लखनऊ बुलाकर कर चुकी है पूछताछ

    17 hours ago

    1

    0

    नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम ट्रस्ट की 3.36 एकड़ जमीन की बिक्री और कथित भूमि घोटाले की जांच तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की। मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के लिए एसआईटी ने जिलाधिकारी (डीएम) और नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की संयुक्त टीम बनाकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण के नाम दर्ज न होने पर उठाए सवाल मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने जिला प्रशासन से पूछा कि महर्षि आश्रम की जमीन नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में होने के बावजूद अब तक राजस्व अभिलेखों में प्राधिकरण का नाम क्यों दर्ज नहीं हुआ। इस पर प्रशासन ने बताया कि नामांतरण की प्रक्रिया अभी चल रही है। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण से गेझा, भंगेल और सलारपुर गांवों की अधिग्रहीत भूमि का पूरा रिकॉर्ड, अधिग्रहण प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों की जानकारी भी मांगी है। इससे पहले भी इस मामले में प्राधिकरण के अधिकारियों को लखनऊ बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है। ईडी भी कर रही समानांतर जांच महर्षि आश्रम भूमि प्रकरण की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है। ईडी ने 15 मई को छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एसआरएमएफ) ट्रस्ट की जमीन की बिक्री एक सुनियोजित भूमि घोटाले का हिस्सा थी। मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल कर रची गई साजिश ईडी की जांच में सामने आया है कि जी. राम चंद्र मोहन ने वर्ष 2010 में खुद को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बताकर मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खुलवाए और जमीन के सौदे की साजिश रची। जांच में यह भी आरोप है कि आकाश मालवीय ने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त रिपोर्ट पर टिकी नजर जांच के अनुसार, गेझा तिलपताबाद क्षेत्र की यह जमीन वर्ष 2024-25 में सिंह वाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेची गई थी। अब एसआईटी और ईडी की समानांतर जांच के बीच जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की संयुक्त रिपोर्ट को इस बहुचर्चित भूमि प्रकरण में अहम माना जा रहा है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    सुल्तानपुर में 33 केवी लाइन में ब्रेकडाउन:रात 1 बजे से बिजली ठप, 1 लाख से अधिक आबादी प्रभावित
    Next Article
    लखनऊ में कमल जैसी बनेगी नई विधानसभा:900 सीटों की क्षमता, सहारा शहर में 200 एकड़ में तैयार होगा नया परिसर

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment