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    नोएडा में युवक की हत्या मामले में दो को उम्रकैद:20-20 हजार का जुर्माना भी लगा, 2014 में रंजिश में गोली मारी थी

    5 hours ago

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    गौतमबुद्ध नगर की एडीजे कोर्ट ने 2014 में दादरी थाना क्षेत्र के गांव बोड़ाकी में हुई युवक सूबे की हत्या के मामले में दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या के साथ-साथ अवैध हथियार रखने के अपराध में भी सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-3 राजेश कुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाया। एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने बताया कि 16 मार्च 2014 की रात करीब 8:45 बजे गांव बोडाकी निवासी 23 साल के सूबे पुत्र भगवत सिंह खाना खाने के बाद रेलवे लाइन की ओर टहलने निकला था। उसी दौरान गांव के ही ईश्वर पुत्र भंवर सिंह और गजेन्द्र पुत्र घनश्याम ने पुरानी रंजिश के चलते उसे गोली मार दी। मृतक की बहन गीता ने थाना दादरी में दी गई तहरीर में बताया था कि उसने और उसकी मां कमला ने आरोपियों को रेलवे लाइन के पास खड़े होकर सूबे को “निपटाने” की बात करते सुना। कुछ ही देर बाद ईश्वर ने तमंचे से पीछे से सूबे पर फायर कर दिया। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले गए। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। घटना के तीन दिन बाद हुई गिरफ्तारी इस संबंध में थाना दादरी में हत्या की धाराओं के मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के तीन दिन बाद 19 मार्च 2014 को पुलिस ने दोनों आरोपियों को जीटी रोड पर एनटीपीसी तिराहे के पास गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान दोनों के पास से एक-एक देसी तमंचा और दो-दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए। हत्या और दो आयुध अधिनियम के मुकदमों को सत्र परीक्षण के रूप में एक साथ सुना गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने की पुष्टि सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मृत्यु की पुष्टि हुई थी। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध संदेह से परे साबित किया है। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि हथियारों की बरामदगी के दौरान कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए बरामदगी संदेहास्पद है। इस पर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि केवल स्वतंत्र गवाह न होने के आधार पर पुलिसकर्मियों की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। यदि उनका बयान विश्वसनीय और सुसंगत हो। अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी करार दिया। विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं आता अपराध इसके बाद गुरुवार को को सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दया की अपील की और कहा कि दोनों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तथा वे परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। अदालत ने कहा कि मामला “विरल से विरलतम” श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं है, लेकिन अपराध गंभीर प्रकृति का है। इस कारण दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न चुकाने पर 60 दिन का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
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