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    नेतन्याहू हारे या जीतें, फिलिस्तीनियों की मुश्किलें बरकरार रहेंगी:पक्ष-विपक्ष कोई अलग देश बनाने को तैयार नहीं, वामपंथी पार्टियों ने भी एजेंडा बदला

    7 hours ago

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    इजराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता बचेगी या जाएगी, इसका फैसला जनता करेगी, लेकिन इस चुनाव से फिलिस्तीनियों की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव आएगा, इसकी उम्मीद कम है। वजह यह है कि नेतन्याहू के विरोध में खड़ी ज्यादातर पार्टियां भी फिलिस्तीन को अलग देश बनाने के पक्ष में नहीं हैं। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल की संसद में फिलिस्तीनियों के खिलाफ कई प्रस्तावों को समर्थन मिला। यहां तक कि जो वामपंथी पार्टियां पहले फिलिस्तीन के साथ समझौते और दो अलग देशों के रास्ते की बात करती थीं, उनके एजेंडे में भी बदलाव दिख रहा है। ऐसे में सत्ता बदलने के बावजूद फिलिस्तीनियों के लिए हालात बदलना मुश्किल नजर आता है। इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ का क्या मतलब है? दुनिया के ज्यादातर देशों में वामपंथी पार्टियां गरीबों और कमजोर वर्गों की मदद करने, सरकारी खर्च बढ़ाने और प्रवासियों के अधिकारों की बात करती हैं। दक्षिणपंथी पार्टियां देश की सीमाएं सख्त रखने, व्यापार में सरकारी हस्तक्षेप कम रखने और राष्ट्रीय पहचान पर जोर देती हैं। इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ का फर्क मुख्य रूप से फिलिस्तीन को लेकर उनके रुख से तय होता रहा है। वामपंथी पार्टियां फिलिस्तीनियों के साथ बातचीत करके विवाद सुलझाने और जमीन को लेकर समझौता करने की बात करती रही हैं। वहीं, दक्षिणपंथी पार्टियां फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का विरोध करती हैं और कब्जे वाले इलाकों में यहूदी बस्तियां बसाने का समर्थन करती हैं। हालांकि अब यह बीते दिनों की बात हो गई है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास हमले के बाद इजराइल की राजनीति दक्षिणपंथ की तरफ मुड़ गई है। फिलहाल ये स्थिति है कि वामपंथी पार्टियां इस मुद्दे को छू ही नहीं रही हैं। इजराइल में पार्टियां और गठबंधन कैसे काम करते हैं? इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं। आज तक कोई भी पार्टी अपने दम पर इतनी सीटें नहीं जीत पाई कि वह अकेले सरकार बना सके। सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। इसके लिए सबसे बड़ी पार्टी को छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करना पड़ता है। नेतन्याहू का मौजूदा गठबंधन नवंबर 2022 के चुनाव के बाद नेतन्याहू की दक्षिणपंथी पार्टी लिकुड 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद उसने 64 सीटों का गठबंधन बनाया। इस गठबंधन में दो कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियां, शास और यूनाइटेड तोराह जूडिज्म शामिल थीं। इसके अलावा कट्टर दक्षिणपंथी धार्मिक जायनिज्म गठबंधन भी सरकार का हिस्सा था। इसमें धार्मिक जायनिज्म और ओत्जमा येहुदित पार्टियां शामिल थीं। यह इजराइल के इतिहास की सबसे कट्टर दक्षिणपंथी सरकार मानी गई। बेजालेल स्मोट्रिच धार्मिक जायनिज्म पार्टी के प्रमुख हैं। वे वित्त मंत्री हैं और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में नागरिक मामलों पर भी उनका अधिकार है। इनमें यहूदी बस्तियों की योजना बनाने से जुड़े मामले शामिल हैं। इतमर बेन ग्विर ओत्जमा येहुदित पार्टी के प्रमुख हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री रहे हैं और पुलिस उनके मंत्रालय के अधीन आती है। स्मोट्रिच और बेन ग्विर दोनों ने कब्जे वाले इलाकों को इजराइल में मिलाने और वहां यहूदी बस्तियों का विस्तार करने की मांग की है। दोनों नेता कई बार सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी देकर अपनी नीतियां लागू कराने की कोशिश कर चुके हैं। इजराइल का विपक्ष कौन है? इजराइल में विपक्ष का मतलब यह नहीं है कि सभी पार्टियां वामपंथी हैं। पिछली संसद में यायर लापिड के नेतृत्व वाली येश अतिद सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी। उसके पास 24 सीटें थीं। बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी दूसरी प्रमुख विपक्षी पार्टी थी। दोनों पार्टियां मध्यमार्गी मानी जाती हैं। एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेइतेनु पार्टी धर्मनिरपेक्ष और दक्षिणपंथी है। लिबरमैन पहले नेतन्याहू के सहयोगी रह चुके हैं, लेकिन अति-रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट देने का विरोध करते हैं। लेबर पार्टी अब डेमोक्रेट्स का हिस्सा है। पिछली संसद में यह अकेली यहूदी पार्टी थी, जो खुले तौर पर इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो अलग देशों के गठन का समर्थन करती थी। अरब पार्टियों का क्या रुख है? अरब नेतृत्व वाली पार्टियां इजराइल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग है, लेकिन वे फिलिस्तीनी इलाकों पर इजराइली कब्जे का विरोध करती हैं। मंसूर अब्बास की पार्टी राम ने 2021 में इजराइल की सरकार में शामिल होकर इतिहास बनाया था। वह ऐसा करने वाली पहली अरब पार्टी थी। हदाश और ताल पार्टी कभी इजराइल की सरकार में शामिल नहीं हुई। इस चुनाव में वह एक औऱ अरब पार्टी बालाद के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. चुनाव से पहले नेतन्याहू ने पीएम मोदी से बात की:इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने का न्योता दिया इजराइल में चुनाव से 5 दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। नेतन्याहू ने मोदी को अगले साल 12 मई को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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