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    नीतीश कुमार को कौन कंट्रोल कर रहा, क्या ‘नजरबंद’ हैं:सांसद-नेता को मिलने नहीं दिया जा रहा, 7 सर्कुलर के अंदर क्या-क्या हो रहा

    8 hours ago

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    ‘मुझे नीतीश कुमार से मिलने नहीं ‎दिया जा रहा है। दो महीने से ‎उनसे मिलने की कोशिश में हूं। मैंने ‎मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय ‎मांगा। उन्होंने 2 मिनट में समय दे‎ दिया। मैं उनसे मिला।' JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने यह बातें अपने लोगों के बीच बैठकी में कही। इसका वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नीतीश कुमार कुछ लोगों की गिरफ्त में हैं। क्या वह नजरबंद हैं, उन्हें कोई दूसरा कंट्रोल कर रहा है। JDU को नीतीश नहीं तो कौन चला रहा है, जानेंगे, बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः क्या नीतीश कुमार नजरबंद हैं? जवाबः बिल्कुल नहीं। नजरबंदी एक कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को सरकार या सुरक्षा एजेंसियां उसके घर में कैद कर लेती है और बाहरी दुनिया से उसका संपर्क काट दिया जाता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। समय-समय पर पार्टी दफ्तर भी जा रहे हैं। कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। जैसे… सवाल-2ः …तो फिर इसकी चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः विपक्षी दलों विशेषकर RJD अक्सर राजनीतिक बयानबाजी करती है कि नीतीश कुमार को 'बंधक' बना लिया गया है या वे कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में हैं। ताजा चर्चा JDU सांसद के बयान के बाद शुरू हुई है। हाल की 3 घटनाओं को जानिए... घटना-1ः JDU सांसद का सामने आया वीडियो 12 जुलाई को झंझारपुर से JDU सांसद रामप्रीत मंडल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें वह अपने लोगों के बीच बैठकी में यह कहते सुने गए कि मैं पिछले 2 महीने से नीतीश कुमार से मिलने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है।’ घटना-2ः नीतीश के आसपास घेराबंदी है पूर्व सांसद आनंद मोहन ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा- ‘नीतीश कुमार अचेता अवस्था में हैं। उनको मुखौटा बनाकर चंडाल चौकड़ी अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रही है। चंडाल चौकड़ी ने नीतीश कुमार को जेड प्लस सिक्योरिटी दिलाकर उनके आसपास घेराबंदी कर दी है। वह उसके जरिए जो चाहते हैं करते हैं। नीतीश कुमार के आसपास का घेरा तय करता है कि वह किससे मिलेंगे और किससे नहीं मिलेंगे। किस नेता की बात उनक तक पहुंचानी है, किसकी बात नहीं पहुंचानी है। यह सब कुछ लोग तय करते हैं।’ घटना-3ः RCP को हंगामे के बाद मिली एंट्री 27 जून की सुबह पूर्व केंद्रीय मंत्री और नीतीश कुमार के साथी रह चुके RCP सिंह उनसे मिलने पहुंचे। अंदर जाने से रोक दिया गया। कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के आवास के बाहर JDU नेता संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संजय गांधी और ललन सराफ ही नीतीश कुमार से मिलने नहीं दे रहे हैं। 20 मिनट तक चले शोरगुल के बाद RCP सिंह को अंदर बुलाया गया। थोड़ी देर कार्यकर्ताओं के साथ ही मिले और फिर निकल गए। बता दें, RCP सिंह बीते 6 महीने से लगातार JDU में एंट्री करने के प्रयासरत हैं। उनकी बात नीतीश कुमार से नहीं हो पा रही है। अंत में बात नहीं बनते देख RCP सिंह अपने समर्थकों और मीडिया को बुलाकर सीधे नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। सवाल-3ः तो क्या नीतीश कुमार तय नहीं करते किससे मिलना है, किससे नहीं? जवाबः सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब पहले की तरह नहीं रह गए हैं। बीमारी संबंधित दिक्कतें हैं। नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का एक ग्रुप है, जो सब चीजें तय करता है। वह किससे मिलेंगे, किससे नहीं। हालांकि, नीतीश कुमार अपने मन से भी बहुत सारे कार्य करते हैं। सवाल-4ः फिर JDU को चला कौन रहा है? जवाबः सीधा जवाब है-पार्टी तो नीतीश कुमार ही चला रहे हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि, हाल में हुई 2 बड़ी घटनाओं ने संकेत दिया है कि पार्टी अब कोई और चला रहा है। 1. थोड़ी सी बहस हुई, बाहर कर दिए गए छोटू सिंह 8 जुलाई को बिहार JDU की प्रदेश कार्यकारिणी की लिस्ट आई। जिसमें अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को प्रदेश महासचिव पद से हटा दिया गया। इससे नाराज छोटू सिंह 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंचे। उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। कहा- बोलिएगा तो हमलोग पार्टी छोड़कर चले जाएंगे। इस पर संजय झा ने कहा-माहौल मत बनाइए। जाइए। 2. संगठन में कई पुराने नेता किनारे किए गए 8 जुलाई को JDU ने बिहार प्रदेश कमेटी की घोषणा की। जिसमें 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव व 74 सचिव बनाए। पिछली कमेटी में पदाधिकारी रहे कई नेताओं को बिल्कुल किनारे कर दिया गया। कुछ का डिमोशन हुआ।
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