Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Navi Pillay को Nobel Peace Prize मिलने पर भारतीय कार्यकर्ताओं ने दी बधाई

    7 hours ago

    1

    0

    नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के बाद भारत के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी और पिल्लई के ‘साहस और दृढ़ विश्वास’ तथा ‘न्याय के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता’ की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय अदालत की न्यायाधीश पिल्लई को यह पुरस्कार शांति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए प्रदान करने की घोषणा की गई है। तेईस सितंबर, 1941 को डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर जन्मीं पिल्लई का बचपन रंगभेद के दौर में बीता।उन्होंने आगे चलकर रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने तथा मानवाधिकारों और समानता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। इससे पहले दो भारतीयों - कैलाश सत्यार्थी (2014) और मदर टेरेसा (1979) - को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुका है। सत्यार्थी ने पिल्लई को पुरस्कार मिलने पर बधाई देते हुए कहा कि मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता साहस और दृढ़ विश्वास का प्रमाण है।सत्यार्थी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘न्यायमूर्ति नवी पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई। मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता साहस और दृढ़ विश्वास का प्रमाण है। न्यायमूर्ति नवी की असाधारण यात्रा हमें याद दिलाती है कि न्याय के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है और साहस संस्थानों को बदलने तथा पीढ़ियों को प्रेरित करने की शक्ति रखता है।’’ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह पुरस्कार इस बात को साबित करता है कि न्याय और मानवाधिकार हमारे समाज के आधार स्तंभ हैं।उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब दुनिया संघर्षों से घिरी है और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था कमजोर हो रही है, विधिवेत्ता नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दोना इस बात का संदेश है कि न्याय एवं मानवाधिकार आज भी हमारे समाज के आधार स्तंभ हैं।’’ ग्रोवर ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति पिल्लई हमें दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव और रंगभेद से लेकर फलस्तीन में नरसंहार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने तक, अन्याय के हर रूप के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।’’ सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने वर्ष 2006 में पिल्लई से अपनी मुलाकात को याद करते हुए उन्हें ‘‘ग्लोबल साउथ की अग्रणी आवाज’’ बताया। हाशमी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अगर मुझे सही याद है, तो मैं पहली बार 2006 में डरबन में नवी पिल्लई से मिली थी। वहां इला गांधी द्वारा सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक शताब्दी सम्मेलन आयोजित किया गया था।दक्षिण अफ्रीका में बाद के सम्मेलनों में उनसे दोबारा मुलाकात ने न्याय के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता के लिए मेरे सम्मान को और बढ़ाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ की एक अग्रणी आवाज के रूप में पिल्लई को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहस और कानूनी विरासत को सम्मान है, बल्कि ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कानून एवं मानवीय गरिमा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जब दुनिया को इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।’’ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई। मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय न्याय और पूरी दुनिया में कानून के शासन को मजबूत करने के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता हम सभी को प्रेरित करती है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    UP Cabinet ने भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने को दी मंजूरी
    Next Article
    Chirag Paswan ने साझा किया संघर्ष, पिता की पार्टी से बेदखल होने पर तरस खाने के बजाय चुनी लड़ाई

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment