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    Nepal Floods में मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा, 5000 लोग अभी भी लापता

    14 hours ago

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    (फोटो के साथ) (शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, पांच सितंबर नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित जिलों से और शव बरामद किए जाने के साथ मरने वालों की संख्या शनिवार को बढ़कर 1,344 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बचाव दल करीब 5,000 लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं।वहीं, 13,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। शनिवार को बचाए गए लोगों में नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में चार मंजिला मकान की ऊपरी मंजिल से सुरक्षित निकाली गई 60 वर्षीय महिला भी शामिल है। यह मकान मलबे और कीचड़ में दब गया था और महिला उसमें 10 दिनों से फंसी हुई थी।चंडिका श्रेष्ठा को सशस्त्र पुलिस बल की एक टीम ने बेहोशी की हालत में पाया। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए त्रिशूली स्थित नेपाली सेना की मैथिली बैरक ले जाया गया। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण बाढ़ आई थी।इसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई। हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ से मकान, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। चीन की मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की ओर कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।अधिकारियों के अनुसार, अब तक बरामद शवों में 758 वयस्कों और 85 बच्चों के शव शामिल हैं, जबकि 501 शव ऐसे मिले हैं, जिनके कुछ अंग गायब हैं। अधिकारियों ने बताया कि शवों की यह स्थिति लंबे समय तक पानी में रहने और मलबे के दबाव के कारण हुई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, सबसे अधिक 360 शव अकेले चितवन जिले से बरामद किए गए हैं।इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम जिलों से भी शव मिले हैं। अब तक डीएनए नमूने एकत्र करने जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब तक केवल 96 शव ही परिजनों को सौंपे गए हैं।मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के पानी में बहकर आए शव अक्सर बुरी तरह क्षतिग्रस्त या सड़-गल गए होते हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाते हैं, जिससे चेहरे, कपड़ों या निजी सामान के ज़रिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां सैकड़ों लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।इन अभियानों में भारत और चीन के विशेषज्ञों की टीम अपने नेपाली समकक्षों की सहायता कर रही हैं। शुक्रवार से अब तक सुरंगों में फंसे तीन लोगों को बचाया जा चुका है। शुक्रवार को त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो नेपाली नागरिकों को बचाया गया, जबकि शनिवार को अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि नेपाल की सेना के साथ मिलकर काम कर रही भारतीय सुरंग बचाव टीम ने बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले की चिलिमे सुरंग के अंदर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया है, जिससे भारी उपकरणों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अधिकारी कई नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए हैं। इनमें कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली, महाकाली, कंकई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियां शामिल हैं।वहीं, नेपाली सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल शनिवार को 11वें दिन भी खोज और बचाव अभियान में जुटे रहे।
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