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    ओवैसी को क्यों कमजोर करना चाह रही सपा-कांग्रेस:2022 चुनाव में कई सीटों पर सपा कैंडिडेट जितने वोट से हारा, उसके दोगुने AIMIM को मिले

    6 hours ago

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    यूपी विधानसभा चुनाव में 6 महीने बचे हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी सियासी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। डेढ़ महीने में ओवैसी ने बहराइच, बिजनौर, सहारनपुर और मुरादाबाद में 4 बड़ी जनसभाएं कीं। ये सभी इलाके सपा के पारंपरिक मुस्लिम गढ़ माने जाते हैं। यहां सपा के मुस्लिम विधायक हैं। इन जनसभाओं में जुटी भीड़ और ओवैसी के तेवरों ने विपक्षी दलों, खासकर सपा के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अब सपा-कांग्रेस ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रभावशाली मुस्लिम लीडर को अपने पाले में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 2022 चुनाव में सपा का मुस्लिम वोट ओवैसी ने डायवर्ट किया AIMIM ने 2022 में यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 97 पर प्रत्याशी उतारे थे। पार्टी का वोट शेयर 0.49% रहा था। ये राज्य के स्तर पर भले ही कम दिख रहा। लेकिन, जिन सीटों पर AIMIM ने फोकस किया, वहां उसने 5,000 से 25 हजार तक वोट हासिल किए थे। कम से कम 7 से 8 सीटों पर सपा के हार का अंतर AIMIM उम्मीदवार को मिले वोटों से काफी कम था। यानी अगर AIMIM का उम्मीदवार मैदान में न होता या वे वोट सपा को मिलते, तो वह आसानी से जीत सकती थी। ऐसी सीटों का गणित समझिए- अब वो चेहरे जानिए, जिन पर सपा-कांग्रेस की नजर लिस्ट में सबसे ऊपर राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार AIMIM का बड़ा चेहरा और प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार हाल के दिनों में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और राहुल गांधी के प्रति नरम रुख अपनाते दिखे हैं। एक चैनल के साथ डिबेट में वो राहुल गांधी को भावी प्रधानमंत्री बताते हैं। वहीं, अखिलेश यादव पर हमलावर ओम प्रकाश राजभर को भी वो जवाब देते दिखे थे। दैनिक भास्कर ने जब राजनीति में उनके भविष्य पर सवाल किए, तो उन्होंने इनकार नहीं किया। लेकिन, खुलकर स्वीकार भी नहीं किया। पश्चिम UP के जिलाध्यक्ष सपा के संपर्क में सपा और कांग्रेस की नजर सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और मेरठ के AIMIM जिलाध्यक्षों पर है, जिससे वे पूरे स्थानीय संगठन के साथ पाला बदल सकें। हमने इन नेताओं से बात की। पढ़िए ये क्या सोचते हैं- मुरादाबाद से AIMIM के जिलाध्यक्ष वसीम मोहिद फरगानी कहते हैं- ओवैसी साहब ने खुद सपा के सामने गठबंधन की पेशकश की है। हमारा मकसद मुस्लिमों पर होने वाले जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना है। हालांकि, भविष्य में सपा या कांग्रेस में जाने के सवाल पर अभी कुछ नहीं कह सकता। रामपुर से AIMIM के जिलाध्यक्ष फरीद उज जफर कहते हैं- सपा मुस्लिमों को नुमाइंदगी तो दे रही है, लेकिन वे नुमाइंदे अपनी कौम की आवाज नहीं उठा पाते। राजनीति में कब क्या मोड़ आ जाए, कोई नहीं जानता। सहारनपुर के AIMIM जिलाध्यक्ष वसीम ने कहा- हम ओवैसी साहब की अगुआई में मजबूती से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन, मेरे परिवार के लोग पहले सपा और कांग्रेस में रहे हैं। समय का कुछ पता नहीं होता कि आगे क्या परिस्थिति बनेगी? ओवैसी मुस्लिम मुद्दों पर आक्रामक दिख रहे, जेन-जी खूब जुट रहे पश्चिम यूपी की मुस्लिम राजनीति को समझने वाले जैगम मुर्तजा कहते हैं- 2022 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने सपा को डेंट किया था। मुस्लिम बहुत इलाकों में सपा जिन सीटों को 5 से 10 हजार के मार्जिन से हार गई थी। उसके पीछे ओवैसी का हाथ था। पश्चिमी यूपी में जहां सपा-रालोद (RLD) गठबंधन को मुस्लिम-जाट वोटों के एकमुश्त ध्रुवीकरण की उम्मीद थी, वहां ओवैसी के उम्मीदवारों ने मुस्लिम वोटों का विभाजन कर दिया। इसके चलते कई करीबी मुकाबलों में बाजी भाजपा गठबंधन के हाथ लग गई थी। 2027 के चुनाव में ओवैसी 6 महीने पहले ही एक्टिव हो गए हैं। उनकी जो भी जनसभाएं हुई हैं, उनमें जेन-जी ज्यादा दिख रहा है। जिन्हें अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए अखिलेश और राहुल जान लड़ा रहे हैं। जनसभा में जो लोग आए, उनमें उत्साह भी था और ओवैसी के लिए झुकाव भी। ओवैसी ने मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल सीटों पर रैलियां कीं। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिमों के वोट तो लेती है, लेकिन उनके नेताओं (जैसे आजम खान) या समुदाय पर हो रहे मुद्दों पर आक्रामक स्टैंड नहीं लेती। यूपी में AIMIM का सियासी ग्राफ बढ़ता जा रहा… राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं- AIMIM के सामने चैलेंज कम नहीं हैं। इसने यूपी में अपना पहला विधानसभा चुनाव 2017 में लड़ा था। पार्टी ने 38 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि, वोट शेयर 0.24% रहा, लेकिन इसमें से ज्यादातर सीटों पर उसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें पार्टी को कुल 4.5 लाख से अधिक वोट मिले। उसका वोट शेयर बढ़कर करीब 0.49% हो गया। सिर्फ विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 2023 के शहरी निकाय चुनाव में 5 नगर पालिका/पंचायत अध्यक्ष पद और 77 पार्षद सीटों पर जीत दर्ज की थी। मेरठ के महापौर चुनाव में ओवैसी का कैंडिडेट मेयर बनते-बनते रह गया था। यहां AIMIM सपा को पछाड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गई थी। AIMIM की बढ़ते सियासी ग्राफ ने सपा और कांग्रेस को रणनीति बनाने पर मजबूर किया है। सपा-कांग्रेस क्या कहती है… सपा ने कहा- सेक्युलर विचारधारा के लोगों का स्वागत है… AIMIM के नेताओं को पार्टी में लेने के मुद्दे पर सपा प्रवक्ता आजम खान कहते हैं- सेक्युलर विचारधारा के लोग आते हैं, तो उनका स्वागत है। हम किसी भी धर्म की राजनीति का समर्थन नहीं करते, चाहे वह हिंदू धर्म के लिए हो या मुस्लिम के लिए। जो भी संविधान के साथ है, सामाजिक न्याय के साथ है, ऐसे लोगों को पार्टी में लेने से हमें कोई गुरेज नहीं है। वर्तमान में युवाओं के साथ जो खिलवाड़ हो रहा, उसके खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले हर व्यक्ति के साथ समाजवादी पार्टी खड़ी है। कांग्रेस ने कहा- आसिम वकार आते हैं, तो अच्छा है कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत कहते हैं- AIMIM के प्रवक्ता आसिम वकार अगर पार्टी में आते हैं, तो अच्छा होगा। जहां तक AIMIM के नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों का सवाल है, तो ये हमारा नेतृत्व गुण-दोष के आधार पर तय करता है। पार्टी अगर किसी नेता के बारे में राय लेती है, तो हम लोग जरूर देते हैं। जिन 4 जिलों में ओवैसी की रैलियां हुईं, वहां सपा के मुस्लिम विधायक बहराइच (मटेरा)- 14 जून को अभियान की शुरुआत करते हुए ओवैसी ने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को मटेरा से विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी घोषित कर दिया। यहां से सपा की मारिया शाह विधायक हैं। ये पूर्व मंत्री यासर शाह की पत्नी हैं। इस जनसभा में करीब 80 हजार लोग जुटे। बिजनौर (नजीबाबाद) - 29 जून को 'पैगाम-ए-इत्तेहाद' कार्यक्रम में ओवैसी ने सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों पर निशाना साधा। यहां सपा के तसलीम अहमद विधायक हैं। इस जनसभा में भी करीब 80 हजार से 1 लाख लोगों के जुटने का दावा किया गया था। सहारनपुर - 18 जुलाई की रैली में आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से लेकर मुस्लिम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। यहां सपा के 2 मुस्लिम विधायक आशु मलिक और उमर खान हैं। ओवैसी के तीखे भाषण पर खूब नारेबाजी हुई थी। मुरादाबाद - 25 जुलाई की सभा में आयोजकों का दावा है कि 50 हजार से ज्यादा भीड़ जुटी। यहीं से ओवैसी ने सपा को गठबंधन का खुला ऑफर देते हुए कहा था- आज बात करने का वक्त है, चुनाव के बाद रोना मत। अभी तक सपा की तरफ से ओवैसी से गठबंधन की कोई बात नहीं की गई है। -------------------------------- यूपी एक्सप्लेनर भी पढ़ें - क्या यूपी में विधानसभा से पहले पंचायत चुनाव होंगे, हाईकोर्ट बोला-सरकार 6 महीने में इलेक्शन कराए ‘राज्य सरकार 6 महीने में पंचायत चुनाव कराने के लिए बाध्य है। यह अवधि नवंबर, 2026 में खत्म हो रही है।’ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 5 अगस्त को यह बात कही। साथ ही सरकार से रिकॉर्ड मांगा है। ताकि पता चल सके कि चुनाव में देरी की वजह सरकार के नियंत्रण से बाहर की कोई परिस्थिति थी या फिर सरकार ने समय पर चुनाव कराने के दायित्व का निर्वहन नहीं किया। पढ़िए पूरी खबर…
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