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    पाकिस्तानी राष्ट्रपति Asif Ali Zardari का दावा- Pakistan में हिंदू सुरक्षित और भारत से ज्यादा यहीं रहना करते हैं पसंद

    19 hours ago

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    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश में रह रहे हिंदू समुदाय को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर अब चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में जरदारी ने कहा कि देश में रहने वाले हिंदू “उतने ही आजाद” हैं, जितने कहीं और होते। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के हिंदू भारत की तुलना में अपने देश में रहना ज्यादा पसंद करेंगे। जरदारी ने ये बातें 14 अगस्त को इस्लामाबाद में आयोजित यादगार-ए-फतह विजय स्मारक समारोह के दौरान कहीं। यह कार्यक्रम पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुआ था। पाकिस्तान ने इस स्मारक को 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष में अपनी बताई गई “जीत” की याद में बनाया है, जिसे वह ‘मरका-ए-हक’ के नाम से संबोधित करता है।कार्यक्रम में पाकिस्तान और भारत की राजनीतिक-सामाजिक सोच के बीच अंतर बताते हुए जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदू आबादी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी करीब तीन से चार प्रतिशत है और वहां रहने वाले हिंदू उतने ही स्वतंत्र और सुरक्षित हैं, जितने किसी अन्य जगह पर होते। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान की सोच को “सहनशीलता” से जोड़ते हुए कहा कि वहां ऐसे मुसलमान हैं जो दूसरे समुदायों को स्वीकार करने और उन्हें साथ लेकर चलने की मानसिकता रखते हैं। जरदारी ने आगे इससे भी बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू कथित तौर पर भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में ही रहना पसंद करेंगे।इसे भी पढ़ें: Mehndi Trends 2026: जाल वर्क से लेकर फ्लोरल शेडिंग तक, Hariyali Teej के लिए बेस्ट हैं ये Pakistani Designsउनका कहना था कि भारत और पाकिस्तान की सोच अलग-अलग है। भारत के संदर्भ में उन्होंने ‘अखंड भारत’ की विचारधारा का उल्लेख किया और कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अस्तित्व और दोनों देशों के बीच के इतिहास के “बहुत से हिस्सों” को भुला दिया है। जरदारी ने अपने भाषण में पाकिस्तान की पहचान को एक मुस्लिम देश के तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक पहचान का अंतर है, लेकिन पाकिस्तान में मुसलमानों की सोच ऐसी है जिसमें दूसरे समुदायों के लिए जगह है। यही बात उनके भाषण का मुख्य हिस्सा रही—कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों को धार्मिक पहचान के बावजूद स्वतंत्रता और सम्मान मिलता है।इसे भी पढ़ें: Pakistan Hockey ने घरेलू ढांचे पर नहीं दिया ध्यान: पूर्व कप्तान सलमान अकबरहालांकि, उनके इस दावे के साथ पाकिस्तान में हिंदू आबादी को लेकर बताए गए आंकड़े सवाल खड़े करते हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने देश में हिंदुओं की आबादी तीन से चार प्रतिशत बताई। लेकिन पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 की आधिकारिक जनगणना में हिंदुओं के लिए अलग आंकड़ा दिया गया है। जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान में 38,67,729 हिंदू दर्ज किए गए हैं। यह देश की कुल आबादी का करीब 1.61 प्रतिशत है। इसके अलावा जनगणना में 13,49,487 लोगों को अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) के तहत अलग से दर्ज किया गया है, जो कुल आबादी का करीब 0.56 प्रतिशत है। अगर इन दोनों श्रेणियों को जोड़कर देखा जाए तो संख्या 52,17,216 तक पहुंचती है, यानी पाकिस्तान की 2023 की करीब 24.05 करोड़ की कुल जनगणना आबादी का लगभग 2.17 प्रतिशत। इसलिए आधिकारिक जनगणना के आंकड़े हिंदू आबादी के लिए जरदारी द्वारा बताए गए तीन से चार प्रतिशत के आंकड़े की पुष्टि नहीं करते।पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी आबादी सिंध प्रांत में रहती है। 2023 की जनगणना के अनुसार सिंध में 35,75,848 हिंदू दर्ज किए गए हैं, जो प्रांत की कुल आबादी का लगभग 6.43 प्रतिशत है। सिंध में अनुसूचित जाति के तहत दर्ज लोगों की संख्या भी काफी अधिक है। जनगणना में यहां 13,25,559 लोग इस श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। यानी पाकिस्तान के हिंदू समुदाय की आबादी पूरे देश में समान रूप से फैली हुई नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा खास तौर पर सिंध में केंद्रित है।इसे भी पढ़ें: सहनशीलता को कमजोरी न समझें...NSA डोभाल की पाकिस्तान को सबसे बड़ी चेतावनीजरदारी का यह बयान ऐसे मौके पर आया जब पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के दौरान देश की राष्ट्रीय पहचान और भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर बात कर रहा था। इसलिए उनके भाषण में हिंदू अल्पसंख्यक, पाकिस्तान की मुस्लिम पहचान और ‘अखंड भारत’ जैसे मुद्दों का एक साथ आना महज सामाजिक टिप्पणी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ का हिस्सा भी माना जा सकता है। एक तरफ राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सहनशील देश के रूप में पेश किया, वहीं दूसरी तरफ उनके भाषण में भारत की विचारधारा और पाकिस्तान की अलग पहचान पर जोर रहा। अब इस बयान पर बहस सिर्फ जरदारी के “हिंदू पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे” वाले दावे को लेकर नहीं है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि देश की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े और राष्ट्रपति द्वारा बताए गए हिंदू आबादी के आंकड़े आपस में मेल क्यों नहीं खाते।
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