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    नवजीवन हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत:बिना पंजीकरण हो रहा था संचालन, 5 सदस्यीय टीम करेगी जांच

    2 hours ago

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    सिद्धार्थनगर के खेसराहा क्षेत्र के बेलोहा स्थित बिना पंजीकरण संचालित बताए जा रहे नवजीवन हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 25 वर्षीय रिंका की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। टीम महिला की मौत के कारणों के साथ अस्पताल के संचालन, चिकित्सकीय व्यवस्था और ऑपरेशन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। रिंका के पति मनीष अग्रहरि के अनुसार, 14 अगस्त को प्रसव के लिए पत्नी को सीएचसी खेसराहा ले गए थे। वहां से उन्हें बेलोहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल जाने की सलाह दी गई। दोपहर करीब 2 बजे वह रिंका को लेकर अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में जांच के बाद पहले सामान्य प्रसव होने का भरोसा दिया गया। इसके बाद महिला के पेट पर दबाव बनाया गया, जिससे उसे तेज दर्द हुआ। कुछ देर बाद उसका ऑपरेशन कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद रिंका की हालत बिगड़ गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। अस्पताल की ओर से दो यूनिट ब्लड मंगवाकर चढ़ाया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। जांच टीम अब यह पता लगाएगी कि ऑपरेशन किसने किया, उसकी चिकित्सकीय योग्यता और पंजीकरण क्या था, ऑपरेशन का निर्णय किसने लिया और उस दौरान अस्पताल में कौन-कौन लोग मौजूद थे। बिना पंजीकरण अस्पताल में डॉक्टर कौन थे, बोर्ड पर लिखे नाम भी जांच के घेरे में नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के अनुसार, नवजीवन हॉस्पिटल का कोई पंजीकरण नहीं है। ऐसे में जांच टीम अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता एवं वैध पंजीकरण की भी जांच करेगी। अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और डॉक्टरों के नाम के बोर्ड लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। टीम यह पता लगाएगी कि बोर्ड पर दर्ज डॉक्टर वास्तव में अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे या नहीं और रिंका के इलाज व ऑपरेशन में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं। अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की सुविधा किस अनुमति के तहत संचालित हो रही थी, इसकी भी जांच की जाएगी। सीसीटीवी, ऑपरेशन और ब्लड चढ़ाने के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे जांच के दौरान अस्पताल में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मरीजों की पर्ची, भर्ती रजिस्टर, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज, दवाओं और ब्लड चढ़ाने के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जाएगी। इन रिकॉर्ड के जरिए टीम यह जानने का प्रयास करेगी कि रिंका अस्पताल कब पहुंची, ऑपरेशन के दौरान कौन-कौन मौजूद था, हालत बिगड़ने के बाद क्या उपचार दिया गया और उसे गोरखपुर भेजने का फैसला किसने लिया। गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में हुई मौत परिजनों के मुताबिक, हालत गंभीर होने पर अस्पताल ने रिंका को तत्काल गोरखपुर ले जाने की सलाह दी। अस्पताल संचालक की गाड़ी से उसे गोरखपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन रात करीब 10 से 11 बजे के बीच शव लेकर वापस बेलोहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल पहुंचे और हंगामा किया। सूचना पर पुलिस पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। हंगामे के दौरान अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग वहां से चले गए। सीएचसी से अस्पताल भेजने वाले की भी होगी जांच जांच का एक अहम बिंदु यह भी होगा कि सीएचसी खेसराहा से रिंका को नवजीवन हॉस्पिटल जाने की सलाह किसने दी थी। टीम यह पता करेगी कि किसी स्वास्थ्यकर्मी ने उन्हें वहां भेजा था या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। एसडीएम, सीओ समेत 5 अधिकारी जांच टीम में सीएमओ डॉ. संजय दोहरे ने जांच के लिए एसडीएम बांसी, सीओ बांसी, डिप्टी सीएमओ, नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक को टीम में शामिल किया है। अब जांच केवल रिंका की मौत के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी। बिना पंजीकरण अस्पताल कैसे संचालित हो रहा था, ऑपरेशन कौन कर रहा था, डॉक्टरों की योग्यता क्या थी, अस्पताल के बाहर लगे डॉक्टरों के नामों की वास्तविकता क्या है और सीएचसी से मरीज को वहां भेजने की प्रक्रिया क्या थी, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी। रिंका की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच और मेडिकल साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट होगा। हालांकि, बिना पंजीकरण अस्पताल में ऑपरेशन किए जाने का मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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