Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के बीच रक्षा समझौता साइन:एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा; साझा ट्रेनिंग और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा

    4 hours ago

    1

    0

    पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए डिफेंस पैक्ट साइन किया है। इसे ‘मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट’ कहा जा रहा है। समझौते के मुताबिक, अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर अटैक माना जाएगा। समझौते के तहत तीनों देश आपस में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। इसके लिए संयुक्त सैन्य ट्रेनिंग, सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने और सुरक्षा तालमेल बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भी मजबूत किया जाएगा। पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की सैन्य ताकत साथ आई इस समझौते में तीनों देशों की अलग-अलग सैन्य ताकत साथ जुड़ती है। अमेरिका पर भरोसा कम होने से बढ़ी जरूरत नए सैन्य गठजोड़ की जरूरत ऐसे समय में और बढ़ी है, जब अमेरिका की सुरक्षा नीति को लेकर दूसरे देशों में सवाल उठ रहे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना अहम सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन ने साफ कहा है कि उसके सहयोगियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ज्यादा जिम्मेदारी उठानी होगी। मिडिल ईस्ट में यह चिंता भी है कि अमेरिका की विदेश नीति में इजराइल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलती है। ऐसे में सऊदी अरब और दूसरे देशों के लिए अपनी सुरक्षा के नए रास्ते तलाशना जरूरी माना जा रहा है। अलग-अलग मोर्चों पर जूझ रहे तीनों देश यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। पाकिस्तान फरवरी से अफगानिस्तान के साथ बॉर्डर संघर्ष में उलझा है। मई 2025 में पाकिस्तान और भारत के बीच भी कई दिनों तक फायरिंग हुई थी। वहीं, सऊदी अरब पर ईरान और उसके समर्थक गुटों की ओर से हमले होते रहे हैं। तुर्किये भी लंबे समय से अपने देश के अंदर और बाहर कुर्द हथियारबंद गुटों से लड़ता रहा है। इजराइल के साथ उसका तनाव भी बढ़ा है। ऐसे में तीनों देशों ने अपनी अलग-अलग सैन्य ताकत को एक साथ लाकर किसी भी खतरे के खिलाफ एक-दूसरे को मजबूत करने की कोशिश की है। समझौते में सैन्य मदद कितनी जरूरी होगी? अल जजीरा के मुताबिक, मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट का मकसद तीनों देशों के सामने आने वाले किसी भी खतरे को रोकना है। लेकिन समझौते की असली ताकत इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके सदस्य एक-दूसरे की मदद करने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं। किलोवेन ग्रुप एडवाइजरी फर्म के चेयरमैन हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा कि माना जा रहा है कि मक्का घोषणा में यह बात हो सकती है कि एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें ‘होना चाहिए’ और ‘जरूरी तौर पर होगा’ के बीच बड़ा फर्क है। उनके मुताबिक, अभी यह साफ नहीं है कि यह समझौता किसी सदस्य को दूसरे के युद्ध में उतरने के लिए मजबूर करेगा या नहीं। क्या ये समझौता ‘मुस्लिम नाटो’ की ओर बड़ा कदम पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने इस समझौते के साथ ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में बढ़ा कदम उठाया है। यह समझौता NATO की तरह मुस्लिम देशों के बीच साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश है। इसके तहत तीनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सैन्य मदद करेंगे, मिलकर आधुनिक हथियार खरीदेंगे, रक्षा तकनीक साझा करेंगे और खतरा आने पर एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट में आगे दूसरे देश भी शामिल होंगे। मिस्र, कतर, सीरिया और UAE जैसे देशों के नाम संभावित सदस्य के तौर पर सामने आ रहे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के सुन्नी बहुल देश लंबे समय से अलग-अलग रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इसी बंटवारे के कारण वे इजराइल और ईरान से जुड़े खतरों का मिलकर सामना नहीं कर पाए। लेकिन पुराने मतभेद और अलग-अलग हित इस गठजोड़ के विस्तार में बड़ी रुकावट बन सकते हैं। इसलिए यह अभी तय नहीं है कि बाकी देश इसमें शामिल होंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    एक मिसाइल, आधा एशिया इसकी जद में! भारत के तरकश में 'अग्नि-4' क्यों है सबसे जरूरी हथियार?
    Next Article
    भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment