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    परमहंस आचार्य बोले- अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं:गौ रक्षा आंदोलन का किया समर्थन; कहा- जहां-जहां कांग्रेस सरकार, वहां गाय को राष्ट्र धरोहर करें घोषित

    15 hours ago

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    अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के जगतगुरु परमहंस आचार्य मंगलवार को सुल्तानपुर के पयागीपुर में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को शंकराचार्य मानने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद के गौरक्षा आंदोलन का समर्थन करने की बात भी कही। परमहंस आचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं हैं और उनका यह पद अभी विवादित है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से मांग की कि यदि वह अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन करती है तो जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां गौ माता को ‘राज्य धरोहर’ घोषित किया जाए। गौ रक्षा पूरे देश में होनी चाहिए उन्होंने गौ रक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गाय हमारी माता है और उससे जन्म-जन्म का नाता है। परमहंस आचार्य के अनुसार, गौ रक्षा पूरे देश में होनी चाहिए, चाहे इसकी मांग कोई भी करे। उन्होंने गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने, ग्राम स्तर पर गौशालाएं बनाने और गायों की समुचित सेवा सुनिश्चित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी को एकमत होना चाहिए। इस दौरान परमहंस आचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद के अखिलेश यादव के संपर्क में होने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने मनु जी के लिए अपशब्द कहे थे। उन्होंने 7 नवंबर 1966 की घटना का भी उल्लेख किया, जब गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कराने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे साधु-संतों और किसानों पर तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के समय गोलियां चलने की घटना हुई थी। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस (अजय राय) और आम आदमी पार्टी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन कर रही हैं। योगी को ‘औरंगजेब’ कहना साधु को शोभा नहीं देता परमहंस आचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘औरंगजेब’ कहना या उनसे इस्तीफे की मांग करना किसी साधु को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि गाय के मुद्दे पर पूरा देश एकमत है। बाकी जो राजनीति हो रही है, वह अलग बात है। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि “योगी राजा नहीं बन सकता, लेकिन राजा योगी बन सकता है।” परमहंस आचार्य ने कहा कि रामायण में भी वर्णन मिलता है कि बड़े-बड़े राजा राज-पाट छोड़कर संन्यासी बन जाते थे और भिक्षुक बनकर भगवान की आराधना करते थे। लोकतंत्र में जनता ही असली राजा उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को लोकतंत्र का ज्ञान नहीं है। लोकतंत्र में जनता ही असली राजा होती है और सभी नेता जनता के सेवक होते हैं। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद यह कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ नेता हैं और वेतन लेते हैं। वहीं जब कंप्यूटर बाबा उनके समर्थन में हैं, तो वे भी कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। धारा 370 और राम मंदिर पर भी जताई नाराजगी परमहंस आचार्य ने कहा कि जब धारा 370 हटाई गई तो पूरे देश में खुशी मनाई गई, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका विरोध किया और कहा कि धारा 370 नहीं हटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर बनने पर पूरे देश ने खुशी मनाई, लेकिन उन्होंने कहा कि इसका मुहूर्त सही नहीं था। इसी तरह काशी कॉरिडोर बनने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि यह सब सपा, कांग्रेस और विपक्ष के इशारे पर भाजपा को नुकसान पहुंचाने की राजनीति है। उन्होंने कहा कि अगर अविमुक्तेश्वरानंद को वास्तव में गौ सेवा से लगाव है, तो उन्हें जहां-जहां जाते हैं वहां गौशालाएं खुलवाने के लिए अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी गौशाला से कसाई गाय नहीं ले जाता। जब गायें बेसहारा हो जाती हैं और किसान उन्हें भगा देता है, तभी उन्हें कोई ले जाता है।
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