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    प्रेमानंदजी ने 5 महीने बाद पदयात्रा की:वृंदावन में भक्तों को जयकारे लगाते देख कार से उतरे, पैदल आश्रम तक गए

    1 day ago

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    प्रेमानंद महाराज ने 5 महीने के बाद वृंदावन में पदयात्रा की। शुक्रवार सुबह जब वे अपने नए आश्रम से 'केली कुंज' आश्रम जा रहे थे, तो रास्ते में वाराह घाट तिराहे पर उन्हें देखकर भक्त भावुक हो गए। यहां से संत प्रेमानंद अपनी गाड़ी से उतरे और पैदल चलकर ही आश्रम की ओर जाने लगे। इस दौरान रास्ते में दोनों तरफ मौजूद भक्त लगातार 'राधे-राधे' और 'श्री हरिवंश' के जयकारे लगा रहे थे। केली कुंज आश्रम पहुंचकर उन्होंने पहले राधा रानी की आराधना की, फिर अपने गुरु हित गोविंद शरण महाराज के दर्शन किए। करीब आधे घंटे रुकने के बाद वह यमुना बिहार कुंज आश्रम लौट गए। 25 सितंबर को शिष्य रसिक दुलारी ने केली कुंज ट्रस्ट की इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इसके बाद 8 अक्टूबर को प्रेमानंद महाराज पहली बार केली कुंज आश्रम पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने पदयात्रा नहीं की थी। 15 मिनट आश्रम में रुके थे। इससे पहले प्रेमानंद महाराज ने 27 मई को पदयात्रा की थी। उससे पहले नियमित रूप से श्रीराधा केली कुंज आश्रम से तड़के करीब 3 बजे निकलते थे और लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर सुनरख खादर स्थित सौभरी वन पहुंचते थे। देखें दो तस्वीरें… स्वास्थ्य कारणों से मई में बंद की गई थी पदयात्रा दरअसल, 17 मई से स्वास्थ्य कारणों के चलते संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। शिष्यों ने तब बताया था कि प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं है। वह भक्तों से एकांतिक मुलाकात भी नहीं कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं। उनकी हफ्ते में 2-3 बार डायलिसिस होती है। संत प्रेमानंद महाराज ने भी वीडियो जारी कर भक्तों को भावुक अपील की थी। वीडियो में उन्होंने कहा था- बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही कि चिंता नहीं करनी। न ये चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे। हालांकि, इसके दस दिन बाद यानी 27 मई को उन्होंने पदयात्रा की थी। लेकिन इसके बाद से पदयात्रा बंद थी। 15 दिन पहले भी केली कुंज आश्रम गए थे महाराज शिष्य रसिक दुलारी ने 25 सितंबर की सुबह केली कुंज ट्रस्ट की बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। उसके बाद पहली बार संत प्रेमानंद महाराज 8 अक्टूबर को केली कुंज आश्रम पहुंचे थे। उस दौरान भी उन्होंने पैदल चलकर भक्तों को दर्शन दिए थे और करीब 15 मिनट तक आश्रम में रुके थे। इसके बाद वह बेलवन स्थित लक्ष्मीजी मंदिर के पास बने यमुना बिहार कुंज आश्रम लौट गए थे। केली कुंज आश्रम से 15 किलोमीटर दूर है नया आश्रम प्रेमानंद महाराज के ट्रस्ट श्री हित राधा केली कुंज ने यमुना विहार कुंज नाम से नया आश्रम बनवाया है। 18 मई के बाद से संत प्रेमानंद महाराज यमुना बिहार कुंज आश्रम में ही रह रहे हैं। यह मांट तहसील में जहांगीरपुर गांव के पास यमुना किनारे बना है। बेलवन स्थित लक्ष्मीजी के मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर है। आश्रम में 2 बड़े हॉल हैं, जहां महाराज जी सत्संग और राधारानी की सेवा करते हैं। यहां एक कंटेनर में डायलिसिस की मशीन लगाई गई है। डॉक्टर समय-समय पर प्रेमानंद महाराज की डायलिसिस करते हैं। ------------------ ये भी पढ़ें- बिजनौर में SSB जवान के पिता की गोली मारकर हत्या: सीने और पेट में मारी दो गोलियां, ट्रैक्टर की सीट पर मिला खून से लथपथ शव बिजनौर में एसएसबी जवान के पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बुधवार रात 10 बजे उनका ट्रैक्टर पर खून से लथपथ शव पड़ा मिला। हमलावरों ने 3 गोली मरी। एक गोली पेट में और एक सीने में लगी। एक गोली जमीन पर पड़ी थी। बेटा लखनऊ में एसएसबी में पोस्टेड है। पढ़िए पूरी खबर…
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