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    प्रमोद कृष्णम् बोले-अल्लाह मियां बहरे नहीं कि लाउडस्पीकर चाहिए:कहा-इबादत नियत से होती है,लाउडस्पीकर से नहीं; विपक्ष मुसलमानों को हिंदुस्तानी बनने से रोक रहा

    3 hours ago

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    मुरादाबाद में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे निष्कासित कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने रमज़ान और लाउडस्पीकर के मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रमज़ान इबादत और मोहब्बत का महीना है, इसे सियासत से जोड़ना ठीक नहीं है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मुरादाबाद में कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रमोद से पूछा गया था कि मुख्यमंत्री ने रमजान में लाउडस्पीकर की आवाज कम रखने की हिदायत दी है ताकि परीक्षाओं में बच्चों को डिस्टर्बेंस न हो। इस पर पूर्व मंत्री और सपा विधायक कमाल अख्तर ने कहा है कि सीएम रोजेदारों को इस तरह की हिदायत नहीं दे सकते। इस सवाल पर आचार्य प्रमोद ने कहा कि, कमाल अख्तर को इस्लाम की जानकारी नहीं है उन्हें स्टडी करना चाहिए। आचार्य प्रमोद ने कहा- इस्लाम किसी को तकलीफ देने की इजाज़त नहीं देता। इबादत नियत का मामला है, यह लाउडस्पीकर का मुद्दा नहीं है। अगर आवाज़ पहुंचाने के लिए लाउडस्पीकर की जरूरत पड़ती है तो वह अलग बात है, लेकिन इसे लेकर राजनीति करना गलत है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी राजनीति करने के लिए इस्लाम के कंधों का इस्तेमाल कर रही है। प्रमोद कृष्णम् ने कहा- अल्लाह मियां बहरे थोड़े ही हैं कि उन तक आवाज पहुंचाने के लिए लाउडस्पीकर की जरूरत पड़े। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ का फैसला उत्तर प्रदेश के हक में है। लेकिन पूर्व मंत्री कमाल अख्तर अखिलेश यादव और राहुल गांधी के इशारे पर इसे धार्मिक रंग देकर मुद्दा बनाना चाहते हैं। उन्होंने कुछ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने में लोगों को इबादत और भाईचारे पर ध्यान देना चाहिए, न कि विवाद खड़ा करना चाहिए। मीडिया से बातचीत में प्रमोद कृष्णम् ने कहा- “रमज़ान इबादत का महीना है। इस्लाम किसी को तकलीफ पहुंचाने की इजाज़त नहीं देता। इबादत नियत से होती है, लाउडस्पीकर से नहीं। धर्म के नाम पर सियासत करना ठीक नहीं है।” आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा- आज विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए विपक्ष दीन की राजनीति करना चाहता है। जबकि दीन राजनीति से कहीं अधिक बड़ा है। लेकिन विपक्ष मुसलमानों को हिंदुस्तानी नहीं बनने देना चाहता। विपक्ष चाहता है कि मुसलमान मुसलमान बना रहे और हिंदुस्तानी न बने। विपक्ष मुसलमानों को अलग-थलग करके अपनी रोटी सेंकना चाहता है। जबकि भारत के मुसलमान वतनपरस्त हैं।
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