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    पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर काशी में उमड़े श्रद्धालु:गंगा स्नान कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, मंदिर के बाहर लगी 1KM लंबी लाइन

    6 hours ago

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    काशी में पुरुषोत्तम मास की पावन पूर्णिमा पर रविवार को श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। तीन वर्ष में एक बार आने वाले इस दुर्लभ संयोग पर श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भोर होते ही दशाश्वमेध, अस्सी, मणिकर्णिका, पंचगंगा समेत प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे घाट क्षेत्र में “हर-हर महादेव”, “हर-हर गंगे” और “जय पुरुषोत्तम देव” के जयघोष गूंजते रहे। तस्वीरें देखिए… जल पुलिस, एनडीआरएफ और फ्लड पीएसी तैनात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। जल पुलिस, एनडीआरएफ और फ्लड पीएसी की टीमें गंगा में लगातार गश्त करती रहीं। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। वहीं, घाटों और संपर्क मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, प्राथमिक उपचार शिविर और पेयजल की भी व्यवस्था की गई। दीपदान से दूर होते हैं सभी दुख पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष पुण्यफल मिलता है। पुराणों में वर्णित है कि इस पूर्णिमा पर गंगा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान, पीपल और तुलसी के पेड़ के नीचे, देवालयों में, घर के पूजाघर तथा मुख्य द्वार पर दीप जलाने का विशेष फल मिलता है। इससे जीवन से जुड़े तमाम तरह के दुख और दोष दूर होते हैं। चंद्र देवता की पूजा से भगवान विष्णु के साथ चंद्र देवता की भी कृपा प्राप्त होती है। इससे मन को शांति तथा सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अब जानिए क्या है मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास अथवा पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, जप, तप, दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा और संकटमोचन हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
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