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    पूर्वांचल विश्वविद्यालय: प्रायोगिक अंक अपलोडिंग पर विवाद:एक सेमेस्टर में डिजिटल व्यवस्था, बाकी में पुराना तरीका; छात्रों में असमंजस, अतिरिक्त शुल्क मांगने के आरोप

    17 hours ago

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    जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रायोगिक परीक्षाओं के अंक अपलोड करने की व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय द्वारा एक ओर डिजिटल पोर्टल से कार्य किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य सेमेस्टरों में पुरानी पद्धति अपनाने से छात्र-छात्राओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्य एकीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित किए जाएं। चालू सत्र में परीक्षा फॉर्म भरने सहित कई प्रक्रियाएं इसी माध्यम से पूरी भी की गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रथम सेमेस्टर के सेशनल और वोकेशनल अंकों को डिजिटल प्रणाली से अपलोड करने की घोषणा की है। अन्य सेमेस्टरों में अपनाई जा रही पुरानी प्रक्रिया विवाद का कारण यह है कि प्रथम सेमेस्टर को छोड़कर अन्य कक्षाओं के प्रायोगिक अंक पुरानी निर्धारित पद्धति से जमा किए जा रहे हैं। इसके लिए परीक्षकों को महाविद्यालयों में भेजा जा रहा है, जो पारंपरिक प्रक्रिया के तहत प्रयोगात्मक और सेशनल अंक अपलोड करेंगे। इसी प्रक्रिया के बाद परीक्षा परिणाम जारी किए जाने की बात कही जा रही है। छात्रों का सवाल: जब अधिकतर काम ऑनलाइन, तो अंक क्यों नहीं? इस दोहरी व्यवस्था को लेकर छात्र-छात्राओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब परीक्षा से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से हो रही हैं, तो सभी सेमेस्टरों के अंक भी एक समान प्रणाली से अपलोड किए जाने चाहिए। अलग-अलग व्यवस्था से पारदर्शिता और समयबद्धता प्रभावित हो सकती है। कुछ कॉलेजों पर अतिरिक्त शुल्क मांगने के आरोप छात्रों ने कुछ महाविद्यालयों पर बाहरी परीक्षकों की नियुक्ति के नाम पर अतिरिक्त शुल्क मांगने का आरोप भी लगाया है। इसे लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है और छात्र इसे अनावश्यक आर्थिक बोझ बता रहे हैं। एकरूप व्यवस्था लागू करने की उठी मांग छात्रों और अन्य हितधारकों ने शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा सभी सेमेस्टरों के लिए एक समान प्रणाली लागू करने की मांग की है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और विवादमुक्त बन सके।
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