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    प्रयागराज महाकुंभ की वायरल साध्वी ने संन्यास लिया:स्वामी हर्षानंद गिरि नया नाम; अक्षय तृतीया पर पिंडदान किया

    4 hours ago

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    प्रयागराज महाकुंभ में साध्वी के रूप में चर्चा में आईं मॉडल हर्षा रिछारिया एक बार फिर धर्म की राह अपना ली है। रविवार को अक्षय तृतीया पर संन्यास ले लिया। उन्हें उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने संन्यास दीक्षा दी। परंपरा के अनुसार, उन्हें शिखा और दंड त्याग की विधि कराई गई। साथ ही तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी कराए गए, जो पूर्व जीवन के त्याग और नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद हर्षा रिछारिया ने संन्यास ग्रहण किया और उन्हें नया नाम स्वामी हर्षानंद गिरि दिया गया। प्रयागराज के माघ मेले के दौरान हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ने का ऐलान किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था- ‘महाकुंभ 2025 से शुरू हुई कहानी अब खत्म हो रही है। इस एक साल में मैंने काफी विरोध झेला है। अब मैं अपने पुराने प्रोफेशन में लौटूंगी। किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठाना आसान होता है, लेकिन मैं सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूं।’ हर्षा रिछारिया के जीवन के 3 रंग… पहले संन्यास की तस्वीरें देखिए… संन्यास के बाद स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा, यह मेरे जीवन का नया अध्याय है। मैंने गुरुदेव के मार्गदर्शन में संन्यास का मार्ग अपनाया है और संकल्प लिया है कि मैं अपना जीवन धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा में समर्पित करूंगी और संन्यास की मर्यादा का पालन करूंगी। संन्यास दीक्षा एक गहन और अनुशासित प्रक्रिया महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने कहा- संन्यास दीक्षा एक गहन और अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति अपने पूर्व जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक पथ पर चलता है। मेरा सभी संन्यासियों से यही आग्रह रहता है कि वे संन्यास की गरिमा को कभी कलंकित नहीं होने दें। एक संन्यासी के आचरण का प्रभाव पूरे समाज और संन्यास परंपरा पर पड़ता है, इसलिए विधि-विधान और मर्यादा का पालन अत्यंत आवश्यक है। अब मॉडल लुक देखिए… अब महाकुंभ की वायरल तस्वीर देखिए… कैसे सुर्खियों में आईं हर्षा? 4 जनवरी, 2025 को महाकुंभ के लिए निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था। इस पर हर्षा ने बताया था कि मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। वह ट्रोलर्स के भी निशाने पर हैं। मीडिया चैनल ने उन्हें 'सुंदर साध्वी' का नाम भी दे दिया। इसके बाद हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं। वायरल हुईं तो एक दिन में 3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स बढ़े महाकुंभ से पहले हर्षा रिछारिया के इंस्टाग्राम पर करीब 6.67 लाख फॉलोअर्स थे। 14 जनवरी 2025 को वायरल होते ही यह संख्या 10 लाख के पार पहुंच गई। यानी एक दिन में उन्हें 3.33 लाख से ज्यादा नए फॉलोअर्स मिले। महाकुंभ खत्म होते-होते उनके फॉलोअर्स 15 लाख हो गए थे। फिलहाल उनके करीब 17 लाख फॉलोअर्स हैं। पिता बस कंडक्टर, मां बुटीक चलाती हैं रिछारिया का परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश बस कंडक्टर और मां किरण रिछारिया बुटीक चलाती हैं। एक भाई कपिल है जो प्राइवेट जॉब करता है। पूरा परिवार भोपाल में रहता है। अध्यात्म से पहले स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे फॉलोअर्स हैं, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती हैं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। हर्षा के इंस्टाग्राम पर 10 लाख फॉलोअर्स हैं। वह इंस्टाग्राम पर धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट साझा करती हैं। वह निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं। ………………. ये खबर भी पढ़िए… "युवाओं को त्याग दिखाना चाहिए, 5 करोड़ की कारें नहीं": हर्षा रिछारिया बोलीं- मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती 'मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती, इसलिए अब मैं धर्म प्रचार के साथ एंकरिंग भी करूंगी, ताकि मुझे आर्थिक मदद मिल सके, मैं अपने दम पर आगे सनातन के लिए काम कर सकूं।' पूरी खबर पढ़िए…
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