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    पिता की हत्या करके बहन के साथ चिकन खाया:लखनऊ में नीले ड्रम में बेटा लाश जलाने वाला था, दूसरी शादी की चर्चा से खफा था

    5 hours ago

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    लखनऊ की जानी-मानी पैथोलॉजी के मालिक की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि वर्धमान पैथोलॉजी के ओनर मानवेंद्र सिंह की दूसरी शादी की बात चल रही थी। इससे उनके बच्चे खासे नाराज थे। इसी के चलते पिता की हत्या कर लाश नीले ड्रम में भर दी। पुलिस पूछताछ में 21 साल के आरोपी बेटे अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा ने कबूला कि पिता की हत्या के बाद वह अपनी चाची के पास गया। उनसे चिकन और पनीर की सब्जी बनवाई। इसके बाद वापस आया और लाश के पास बैठकर बहन के साथ खाना खाया। किसी को शक न हो, इसलिए अपने रूटीन में कोई बदलाव नहीं किया। बहन को एग्जाम देने भेजता रहा। शव को ठिकाने लगाने के लिए आरी और नीला ड्रम खरीदकर लाया। चाची नम्रता से भी रोज की तरह मिलता रहा, ताकि वे कमरे में न जाएं। अब तक की जांच से पता चला है कि वारदात को देखकर बहन बहुत डर गई थी, इस वजह से वह किसी से कुछ भी कह नहीं पाई। अक्षत ने भी उसे बहुत डराया-धमकाया। ऐसे में वह किसी से बात करने से भी कतराती रही। पहले पढ़िए अक्षत ने पुलिस की पूछताछ में जो बताया... रातभर जागकर बनाई योजना पुलिस की पूछताछ में अक्षत ने बताया- रातभर जागकर पिता की हत्या की प्लानिंग की। 20 फरवरी को तड़के करीब 4.30 बजे लाइसेंसी राइफल से सोते हुए पिता के सीने में गोली मार दी। तब तक वहीं खड़ा रहा, जब तक बाप की सांसें नहीं रुक गईं। अपनी आंखों से तड़पता देखता रहा। फिर शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। शव को थर्ड फ्लोर से लाकर ग्राउंड फ्लोर के कमरे के बाथरूम में रखा। धड़ के दो टुकड़े नहीं कर पाया तो ड्रम में भरा अक्षत ने बताया- आरी और नीला ड्रम खरीदकर लाया। बाथरूम में आरी से हाथ-पैर काटे। इस दौरान नल की टोटी खोल रखी थी, ताकि खून नाली से बह जाए। हाथ-पैर काटने के बाद उसे पॉलीथिन में रखकर करीब 20 किलोमीटर दूर काकोरी के सदरौना में फेंक आया। धड़ के दो टुकड़े करने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर पाया। उसे ड्रम में भरकर रख दिया। बची हुई लाश जलाने के लिए 10 लीटर तारपिन का तेल खरीदकर लाया। धड़ को कहीं दूर ले जाकर जलाने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही पकड़ा गया। गुमराह करने के लिए काकोरी में पिता का फोन ऑन किया था पुलिस की अब तक की जांच में आया है कि अक्षत काफी शातिर है। पुलिस से बचने के लिए 20 फरवरी को वह काकोरी गया। वहां पर पिता का फोन ऑन किया, ताकि उनकी लास्ट लोकेशन घर पर न मिलकर काकोरी मिले। पड़ोसी अल्पना सिंह ने बताया कि हम लोगों को पता चला कि मानवेंद्र 20 फरवरी से दिखाई नहीं दिए हैं। मेरे पति सहित कई लोगों ने जब अक्षत से पूछा तो उसने बताया कि पापा दिल्ली गए हैं। बाद में पता चला कि वह लापता हो गए हैं। उनकी लोकेशन काकोरी में मिली है। इसके बाद सब लोग उन्हें ढूंढ़ते हुए अक्षत के साथ काकोरी गए। जहां वे मिले नहीं। इसके बाद सब लोग वापस आ गए। हत्या के पीछे और भी कई वजहें हो सकती हैं, जानिए.... पुलिस की जांच में यह भी सामने आ रहा है कि मानवेंद्र पार्टी के शौकीन थे। हत्या होने से पहले 20 फरवरी की रात करीब डेढ़ बजे मानवेंद्र ने एक परचित को पार्टी की व्यवस्था करने का मैसेज किया था। पिता के पार्टी करने से उनके दोनों बच्चे नाराज रहते थे। जांच में सामने आया है कि करीब सात साल पहले मानवेंद्र की पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। उस घटना के बाद घर की जिम्मेदारी पूरी तरह मानवेंद्र पर आ गई थी। पत्नी की मौत के बाद मानवेंद्र बेटे अक्षत और बेटी की परवरिश अकेले कर रहे थे। मानवेंद्र के साथ उसके घर में बेटा अक्षत, बेटी कृति, भाई अरुण, भाई की पत्नी नम्रता और दो बच्चे रहते थे। सबका खाना एकसाथ बनता था। थर्ड फ्लोर पर मानवेंद्र बेटी और बेटे के साथ रहते थे। भाई का परिवार सेकेंड फ्लोर पर रहता है। ग्राउंड फ्लोर का कमरा गेस्ट रूम के तौर पर प्रयोग होता है। मानवेंद्र की दूसरी शादी की चर्चा से नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक महीने पहले मानवेंद्र वैष्णो देवी टूर पर जाने की तैयारी में थे। इस बीच घर में ब्रेसलेट, 2 अंगूठी सहित अन्य सामान चोरी हुए थे। मानवेंद्र ने मेड पर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस की जांच में मेड बेकसूर निकली थी। इस बीच मेड ने मानवेंद्र के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद मानवेंद्र ने अपने घर में सख्ती बरती थी। इसके बाद सामान मिल गया था। मानवेंद्र ने कहा था कि तुम लोगों के लिए हम अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। दूसरी शादी नहीं कर रहे हैं। यह भी चर्चा है कि इस बीच उन्होंने मोहल्ले में अपने एक दोस्त से शादी करने की सलाह भी ली थी। इस संबंध में मोहल्ले के लोगों से बात भी करते थे। इससे भी अक्षत नाराज रहता था। सप्ताहभर पहले भाई-बहन के बर्ताव में आया बदलाव स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक सप्ताह से भाई बहन दोनों के बर्ताव में बदलाव आ गया था। दोनों एकसाथ ज्यादा समय बिताते थे। चाचा गांव चले गए थे। ऐसे में घर में चाची और उनके दो बच्चे थे। इनसे अक्षत सीमित बात करता था। दादा (बाबा) से भी उसकी बातचीत औपचारिक और कभी-कभार ही होती थी। वर्धमान लैब की एक ब्रांच को चलाता था अक्षत, संपत्ति पर करना चाहता था कब्जा वर्धमान पैथोलॉजी के कई जिलों में लैब हैं। उनका संचालन मानवेंद्र सिंह अन्य बिजनेस पार्टनर के साथ में करते थे। काकोरी में स्थित वर्धमान लैब के संचालन का जिम्मा उन्होंने बेटे अक्षत उर्फ राजा को दे दिया था। इससे वह अपना खर्च पूरा करता था। हालांकि, वह लैब के बजाए दूसरा बिजनेस करना चाहता था। मानवेंद्र सिंह शराब के 2 ठेकों का भी संचालन करते थे। आशियाना स्थिति उनके घर की छत पर दो मोबाइल टावर भी लगे हुए हैं। उनसे भी किराया आता है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अक्षत को नीट कराना चाहते थे। हालांकि, अक्षत बहुत महत्वाकांक्षी था। वह पूरी संपत्ति पर कब्जा जमाना चाहता था। 24 फरवरी को जब पुलिस आरोपी बेटे अक्षत को घर लेकर आई तो आसपास के लोगों से आंखें चुराता दिखा। उसके चेहरे पर किसी तरह की शिकन या पछतावे का भाव नहीं था। अब पढ़िए बहन ने जो बताया... पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि घटना के समय बहन कमरे में मौजूद थी। वारदात उसके सामने हुई। अक्षत के पकड़े जाने के बाद भी करीब 24 घंटे तक उसने यह बात छिपाए रखी। पुलिस ने करीब 40 मिनट तक पूछताछ कर उसके बयान दर्ज किए। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह सिर्फ चुप रही या उसे पहले से किसी साजिश की जानकारी थी। बहन ने पुलिस को बताया कि पापा की हत्या के बाद अक्षत ने मुझे बहुत डरा दिया। लोगों को शक न हो, इसलिए रूटीन काम करने का दबाव बनाया। उसके डर से 20 और 21 फरवरी को मैं 11वीं का एग्जाम देने स्कूल गई। उसने बताया कि 20 फरवरी को वह, पापा और भाई थर्ड फ्लोर पर एक ही कमरे में सो रहे थे। अक्षत ने पापा को गोली मार दी। मैंने कहा कि भैया हमारी मम्मी नहीं हैं। आपने पापा को भी मार दिया। इस पर अक्षत ने उसे धमकाया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। डरकर वह चुप हो गई। पुलिस 3 सवालों के जवाब तलाश रही... अब पढ़िए क्या है पूरा मामला इससे पहले आशियाना के एल सेक्टर में रहने वाले मानवेंद्र सिंह (49) में रहते थे। 20 फरवरी से वह लापता थे। बीकाम की पढ़ाई कर रहे उनके 21 साल के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि अक्षत ने ही हत्या की है। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो उसने हत्या करने की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर 23 फरवरी को मानवेंद्र का शव घर के कमरे में नीले ड्रम में मिला। उनके दोनों हाथ-पैर गायब थे। उसे काटकर उसने करीब 21 किलोमीटर दूर सदरौना में फेंका था। अक्षत की बहन 11वीं की छात्रा है। घटना के समय वह भी मौजूद थी। --------------------------------- कल क्या-क्या हुआ पढ़िए… पिता के शव को बाथरूम में काटा, नीले-ड्रम में छिपाया : जलाने के लिए 10 लीटर तारपिन का तेल लाया, रूम स्प्रे छिड़क रहा था लखनऊ में पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह की उनके 21 साल के इकलौते बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरी और नीला ड्रम खरीदकर लाया। शव को बाथरूम में आरी से काट डाला। फिर टुकड़े ड्रम में भर दिए। (पूरी खबर पढ़िए)
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