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    Prabhasakshi NewsRoom: UAE के Nuclear Plant पर हमले को India ने बताया 'खतरनाक', शांति की अपील की

    5 hours ago

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    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद भारत ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे खतरनाक उकसावा बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु संयंत्र को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह क्षेत्रीय तनाव को और गंभीर बनाने वाला कदम है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने तथा संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की है।हम आपको बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के अनुसार ड्रोन हमला अबू धाबी स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहरी हिस्से में हुआ, जिससे वहां आग लग गई। हमला संयंत्र की भीतरी सुरक्षा सीमा से बाहर स्थित एक विद्युत जनित्र पर हुआ था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार के विकिरण रिसाव की सूचना नहीं मिली है। सुरक्षा प्रणालियां पूरी तरह सक्रिय रहीं और संयंत्र की सभी इकाइयां सामान्य रूप से काम करती रहीं। अमीरात के परमाणु नियामक प्राधिकरण ने भी पुष्टि की है कि संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और किसी प्रकार का रेडियोधर्मी पदार्थ बाहर नहीं निकला।इसे भी पढ़ें: PM Modi का Netherlands से संदेश: पासपोर्ट बदल सकता है, लेकिन हमारी भारतीयता नहींउधर, संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले को आतंकवादी कार्रवाई बताते हुए कहा है कि देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे को सहन नहीं करेगा। अमीरात के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह हमला गंभीर उकसावा और देश की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। हालांकि अधिकारियों ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इससे पहले अमीरात ईरान और उससे जुड़े गुटों पर खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगाता रहा है।अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि तीन ड्रोन सऊदी अरब की पश्चिमी सीमा की ओर से उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इनमें से दो ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया, जबकि एक ड्रोन बराकाह संयंत्र के निकट पहुंच गया। उधर सऊदी अरब ने भी दावा किया कि उसने इराकी हवाई क्षेत्र की दिशा से आए तीन ड्रोन को रोक दिया। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।इस बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने कहा है कि हमले के बाद संयंत्र की एक इकाई को आपातकालीन डीजल जनित्रों के जरिये बिजली आपूर्ति दी गई। एजेंसी ने परमाणु स्थलों के आसपास अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील की है और कहा है कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र की इस परमाणु निगरानी संस्था ने चेतावनी दी है कि परमाणु प्रतिष्ठानों के आसपास किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।हम आपको बता दें कि बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र करीब बीस अरब डॉलर की लागत से दक्षिण कोरिया की सहायता से तैयार किया गया था और यह वर्ष 2020 से संचालन में है। यह अरब जगत का एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और संयुक्त अरब अमीरात की कुल बिजली जरूरतों का लगभग एक चौथाई हिस्सा पूरा करता है। इस कारण इस संयंत्र पर हमला केवल अमीरात ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि समय तेजी से निकल रहा है और तेहरान को जल्द फैसला करना होगा। वहीं ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि अमेरिका ने अपनी धमकियों को अमल में बदला तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि अमेरिका खुद अपने लिए नया संकट खड़ा कर रहा है।हम आपको बता दें कि पिछले कई सप्ताह से युद्धविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है। होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी प्रभावित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भारी असर पड़ा है और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। अमेरिका ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और जलडमरूमध्य पर नियंत्रण समाप्त करने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई, अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करने और सभी मोर्चों पर संघर्ष रोकने की मांग कर रहा है।बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि बराकाह परमाणु संयंत्र पर हमला पश्चिम एशिया में संघर्ष को और गहरा कर सकता है इसलिए भारत सहित कई देशों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से शांति, संयम और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढने की अपील की है।
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