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    राजस्थान फैक्ट्री ब्लास्ट- पटाखे बन रहे थे; प्रशासन बेखबर था:आग गत्ता फैक्ट्री तक पहुंच सकती थी; हादसे में 7 मौत

    13 hours ago

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    राजस्थान के भिवाड़ी की फैक्ट्री में धमाके के बाद लगी आग में 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। समय पर आग पर काबू नहीं पाया जाता तो पास में मौजूद गत्ते बनाने की फैक्ट्री भी चपेट में आ सकती थी। हादसे के समय इस फैक्ट्री में 10 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे थे। गुपचुप तरीके से काम चल रहा था भिवाड़ी के खुशखेड़ा रीको एरिया में 16 फरवरी की सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई इस घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डेढ़ महीने से फैक्ट्री में गुपचुप तरीके से पटाखे बनाए जा रहे थे। रीको प्रशासन या पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी। न तो मजदूर अंदर जाते हुए नजर आते थे, न ही बाहर आते हुए। आशंका जताई जा रही है कि फैक्ट्री में चाइनीज गन में काम आने वाली कैप्सूल बनाई जा रही थी। माल दिल्ली भेजा जाना था। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक सहित 4 के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। रीको ने भी नोटिस जारी किया है। फैक्ट्री में क्या होता था, किसी को जानकारी नहीं आसपास के लोगों का कहना है कि उन्हें पता नहीं था कि फैक्ट्री में क्या काम होता है। फैक्ट्री के कामकाज का तरीका काफी गोपनीय था। यहां काम करने वाले मजदूर कब आते थे और कब जाते थे, इसकी किसी को भनक नहीं लगती थी। आमतौर पर मजदूरों का आना-जाना सुबह और शाम के वक्त होता है। इस फैक्ट्री में सुबह-शाम भी मजदूर नजर नहीं आते थे। मजदूर आते-जाते नहीं दिखते थे पटाखा फैक्ट्री पास स्थित एक अन्य फैक्ट्री के मालिक नीरज गुप्ता बताते हैं- इस फैक्ट्री में पहले कोई और कंपनी किराए पर चल रही थी। पिछले साल के आखिरी महीनों में वो खाली करके चले गए थे। उसके बाद इस फैक्ट्री में कौन आया, ये पता नहीं चला। फैक्ट्री में कोई मजदूर या अन्य कर्मचारी आते-जाते नजर नहीं आते थे। कुछ दिनों पहले ही एक मजदूर को बाहर आते देखने पर पूछा तो उसने चुप्पी साध ली थी। उस वक्त काफी अजीब लगा, लेकिन फिर ध्यान नहीं दिया। डेढ़ महीने से फैक्ट्री चल रही थी इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र में बिना लाइसेंस के पटाखों का बनना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल ये है कि डेढ़ महीने से फैक्ट्री में चल रही हलचल अधिकारियों की नजरों से कैसे बच गई? अब उस रेंट एग्रीमेंट की तलाश की जा रही है, जिसके आधार पर यह फैक्ट्री किराए पर दी गई थी। 13-14 साल से किराए पर ही चल रही फैक्ट्री इलाके में चल रही दूसरी फैक्ट्री के संचालकों ने बताया कि उन्होंने आज तक इस प्रॉपर्टी के असली मालिक को नहीं देखा। एक अन्य कारखाने के मालिक नीरज गुप्ता ने बताया कि मैं 2012 से यहां फैक्ट्री चला रहा हूं। अब तक 2-3 कंपनियों को किराए पर दिया जा चुका था। राजेंद्र कुमार से हेमंत कुमार नाम के शख्स ने फैक्ट्री को किराए पर लिया था। हेमंत कुमार ने फैक्ट्री संचालित करने का जिम्मा सुपरवाइजर अभिनंदन को सौपा था। उसने ठेकेदार अजीत सिंह के जरिए बिहार के मजदूरों को हायर कर फैक्ट्री में प्रोडक्शन शुरू कराया था। ठेकेदार अजीत सिंह की तलाश जारी है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में बनने वाले माल को दिल्ली सप्लाई किया जाना था। आवंटन निरस्त हो सकता है फैक्ट्री मालिक गाजियाबाद के रहने वाले राजेंद्र कुमार हैं। प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 45 दिन में जवाब मांगा है। जवाब संतोषप्रद नहीं पाए जाने पर फैक्ट्री मालिक को आवंटित की गई जमीन को निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। आवंटन निरस्त होने की स्थिति में, प्रशासन नियमानुसार जमीन का कब्जा वापस ले लेगा। जमा की गई राशि को भी नियमों के तहत जब्त किया जा सकता है। 2005 में आवंटित हुआ था प्लॉट रीको अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 600 गज का प्लॉट राजेंद्र कुमार को साल 2005 में आवंटित किया गया था। ​रिकॉर्ड के मुताबिक, संचालक ने साल 2011 में इस प्लॉट पर गारमेंट प्रोडक्शन शुरू करने का सत्यापन कराया था। साल 2019 में इस प्लॉट को किसी कंपनी को किराए पर दे दिया था। प्लांट किराए पर देने की सूचना रीको को दी थी, लेकिन पटाखा फैक्ट्री की सूचना रीको को नहीं दी। फैक्ट्री मालिक के खिलाफ एफआईआर मृतकों के परिजन की शिकायत पर फैक्ट्री मालिक राजेंद्र कुमार, हेमंत, सुपरवाइजर अभिनंदन और ठेकेदार अजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। घटना के बाद फैक्ट्री मालिक राजेंद्र ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है। पुलिस फैक्ट्री मालिक की तलाश में यूपी रवाना हो गई है। फिलहाल पटाखा फैक्ट्री के मैनेजर से पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि बच्चों के लिए पटाखे बनाने की बात सामने आ रही है। जिस प्रकार का हादसा हुआ, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि काफी मात्रा में बारूद को एकत्रित करके रखा गया था। शवों की शिनाख्त के लिए फोरेंसिक लैब ने लिए सैंपल हादसे के शिकार कई मजदूरों के सिर्फ कंकाल ही बचे हैं। कौन सा शव किसका है, इसका पता लगाने के लिए डीएनए जांच होगी। मामले में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) सुबह ही मौके पर पहुंच गई थी और शवों के सैंपल लिए गए थे। दांतों के सैंपल से डीएनए टेस्ट किया जाएगा। ------------------------ भिवाड़ी हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… राजस्थान की केमिकल फैक्ट्री में धमाका, 7 लोग जिंदा जले:अवैध रूप से बन रहे थे पटाखे, 3 मृतकों की हुई पहचान राजस्थान के भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में अचानक तेज धमाका हुआ। इसमें 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। (पढ़िए पूरी खबर) एक के बाद एक 5 धमाके, शवों के चीथड़े उड़े:कपड़ा बनाने के लिए रजिस्टर्ड फैक्ट्री में बन रहे थे पटाखे; किराए पर चल रही थी राजस्थान के भिवाड़ी में जिस फैक्ट्री में आग लगने से 7 लोग जिंदा जल गए, वह गारमेंट फैक्ट़्री के नाम से रजिस्टर्ड थी। (पढ़िए पूरी खबर)
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