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    राज्यपाल बोलीं- टिफिन में ड्रग्स आ सकता है:गोरखपुर में कहा- हॉस्टल में मेस शुरू करें, DDU के दीक्षांत में 85 मेधावियों को मेडल मिला

    7 hours ago

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    दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 45वां दीक्षांत समारोह बड़े ही उत्साह और भव्यता के साथ समाप्त हो गया। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलपाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अपने हाथों से 25 टॉपर्स को मेडल दिया। इसके अलावा अन्य टॉपर्स को मुख्य अतिथि पद्मभूषण डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने मेडल पहनाकर सम्मानित किया। प्रोग्राम में अपने संबोधन के दौरान आनंदीबेन पटेल ने देश और प्रदेश के बदलती शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान आकर्षित कराया। साथ ही आजकल के युवाओं को नशा से दूर रहने की अपील की। उन्होंने यूनिवर्सिटी के ब्यॉयज हॉस्टल में बाहर से टिफिन आने पर नाराजगी जताई। कहा कि उस टिफिन में ड्रग भी आ सकता है। कुछ भी आ सकता है। इसलिए मेस शुरू कराया जाए। बेटो से आगे बेटियां आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में बेटों और बेटियों को समान अवसर उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद बेटियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। यह केवल उपलब्धि का विषय नहीं, बल्कि इस बात पर गंभीर मंथन करने की आवश्यकता है कि आखिर बेटियां हर क्षेत्र में आगे क्यों निकल रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां शारीरिक रूप से भले ही कमजोर दिखाई दें, लेकिन मानसिक रूप से अत्यंत सशक्त होती हैं। अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर वे शिक्षा, खेल, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रमंडल खेलों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय बेटियों का शानदार प्रदर्शन इसका प्रमाण है, जिसने पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। DDU की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना की उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवाचार, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक आईमैक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशालाओं व रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के माध्यम से विश्वविद्यालय नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने इन उपलब्धियों के लिए कुलपति प्रो. पूनम टंडन सहित पूरे विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी। ग्रामीण बच्चे आगे निकल रहे- राज्यपाल उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में जितने भी यूनिवर्सिटी में दीक्षांत का प्रोग्राम हुआ है। उनमें सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आगे रहें हैं। शहरी क्षेत्र के उनसे कम हैं। तो जहां सुविधाएं कम हैं वहां के बच्चे आगे निकल रहे हैं। जहां सुविधाएं ज्यादा हैं वहां लापरवाही हो रही। नशे की लत को खत्म करने का दिलाया संकल्प उन्होंने आगे कहा कि दो अगस्त को देश में एक बड़ा कार्यक्रम हुआ नशा मुक्त भारत, सभी ने हिस्सा लिया होगा। मैं ये नहीं पूछूंगी कि यहां बैठे हुए कितने लोग नशा करते हैं। 25 परसेंट तो होंगे ही जो नशा करते होंगे। उन्होंने लोगों से नशा को एक साल में खत्म करने का संकल्प लेने को कहा। स्टूडेंट्स को खास तौर पर नशे से दूर रहने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि सभी यूनिवर्सिटी ने शराब की खाली बॉटल और अन्य चीजें मिली हैं। देश को विकसित करने का नशा करें युवा- राज्यपाल नशा ये बनाओ कि हम विकसित भारत बनाकर ही रहेंगे। वो नशा होना चाहिए आपलोगों का। उन्होंने ने माता- पिता को बच्चों को नशे से दूर रखने की अपील की। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी जागरूक रहने कोक कहा। बच्चों को दें शुद्ध आहार - राज्यपाल वहीं राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी की कमियों को गिनाते हुए कहा कि यहां 9 हॉस्टल हैं जिनमें 6 ब्यॉयज और 3 गर्ल्स हॉस्टल हैं। गर्ल्स में मेस हैं और ब्यॉयज में टिफिन से खाना मंगवाते हैं, क्यों वो अच्छा लगता है क्या ? मैं राज्यपाल के तौर पर नहीं कहती हूं। मैं माता हूं। हमारे बच्चों की खुराक शुद्ध आहार होना चाहिए। नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मैंने पहली बार देखा है कि टिफिन बाहर से आ रही है। तो टिफिन में ड्रग्स भी आएंगे और कुछ भी आ सकते हैं। उन्होंने टिफिन के खाने को तुरंत बंद कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने अन्य हॉस्टल की व्यवस्थाओं में कमी को बताते हुए 3 महीने के अंदर सुधार करवाने के निर्देश दिए। गोद लिए गए स्कूलों के बच्चों के टैलेंट को सराहा उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए वहां के बच्चों की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने एक तीन वर्षीय बालिका की प्रेरक कहानी और बच्चों की बनाई गई पेंटिंग्स की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहन और उचित मंच मिलना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय से आग्रह किया कि वह इन बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करे। राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से छोटे बच्चों की प्रेरणादायी कहानियों का संकलन कर एक पुस्तक तैयार की जाएगी, जो प्राथमिक शिक्षकों की उत्कृष्ट शिक्षण क्षमता, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान को प्रदर्शित करेगी। उपाधि के साथ उत्तरदायित्व भी निभाएं युवा- मुख्य अतिथि दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. वी.के. सारस्वत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की उपाधि केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का अवसर भी है। उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि प्रत्येक सफल विद्यार्थी के पीछे शिक्षकों का समर्पण और परिवार का त्याग निहित होता है। विकसित भारत के लिए युवा बनें रोजगार सृजक- रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि और उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज बेटियों ने अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों से नई मिसाल कायम करते हुए समाज में एक बड़ी लकीर खींची है। यह बदलते और निरंतर प्रगतिशील भारत का सशक्त प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छात्राओं ने अपने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर अर्जित की है। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बने। नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। कुलपति ने यूनिवर्सिटी के सभी उपलब्धियों को बताया कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने स्वागत भाषण और विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने ने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने संस्था के सभी उपलब्धियों को राज्यपाल के सामने प्रस्तुत किया। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास से विश्वविद्यालय उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्प को और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ाएगा।
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