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    रिकवरी सर्टिफिकेट से कम भुगतान पर लखनऊ हाईकोर्ट नाराज:आवास आयुक्त को 25 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से तलब किया

    17 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। यह नाराजगी यूपी रेरा के आदेश के बावजूद भुगतान में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट में तय रकम से कम राशि का चेक दिए जाने को लेकर है। न्यायालय ने कहा कि संबंधित अधिकारी यूपी रेरा और हाईकोर्ट की कार्यवाही को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने आवास आयुक्त, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को 25 अगस्त को सुबह 10:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह मामला शिकायतकर्ता अशोक कुमार सिंह से संबंधित है। उनके पक्ष में यूपी रेरा ने 29 जुलाई 2025 को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के अनुपालन के लिए कार्रवाई शुरू होने के बाद 27 मई 2026 को 26,58,806.01 रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था। आरोप है कि रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने के बावजूद संबंधित राजस्व अधिकारियों ने इस रकम की वसूली के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया। न्यायालय ने 7 अगस्त को आवास एवं विकास परिषद को दस दिन के भीतर देय रकम जमा करने का निर्देश दिया था। यह भी स्पष्ट किया था कि आदेश का पालन न होने पर आवास आयुक्त को न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा। सोमवार को परिषद ने एक अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया, जिसमें बताया गया कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, लखनऊ खंडपीठ के नाम 23,71,126 रुपये का चेक तैयार किया गया है और उसे याची के अधिवक्ता को सौंपा जा रहा है। इस पर न्यायालय ने सवाल किया कि जब यूपी रेरा के रिकवरी सर्टिफिकेट में 26.58 लाख रुपये से अधिक की रकम निर्धारित थी, तो परिषद ने केवल 23.71 लाख रुपये का भुगतान क्यों तय किया। परिषद की ओर से बताया गया कि विभाग ने अपनी गणना के आधार पर देय राशि निर्धारित की है। न्यायालय यह जानना चाहता था कि यूपी रेरा जैसे वैधानिक प्राधिकरण द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट में तय रकम से अलग विभाग अपनी गणना कैसे कर सकता है। इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर न्यायालय ने आवास आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।
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