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    रेलवे और नगर निगम के विवाद ने नरक कर दिया…:वार्ड-1 के लोगों का आरोप, बोले- नाले का निर्माण नहीं हो रहा, सड़कें तालाब बन रहीं

    15 hours ago

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    हम नरक में जीने को मजबूर हैं और इसका कारण सिर्फ रेलवे और नगर निगम का विवाद है…। यह आरोप मेरठ नगर निगम के वार्ड-1 के लोगों का है। विवाद की वजह से एक साल से नाले का निर्माण अधूरा है। जिसकी वजह से 80% क्षेत्र की जलनिकासी प्रभावित है। बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं। रेलवे और नगर निगम के बीच जमीन के अधिकार को लेकर सहमति नहीं बन रही है। खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गंदा पानी घरों में घुस रहा है। सड़कें टूटी हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है। पानी से घिरे ट्रांसफॉर्मर व बिजली के खुले तार लोगों की जान के लिए खतरा बने हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना है कि सभी टैक्स समय पर जमा करने के बाद भी नरक का जीवन जीने को मजबूर हैं। शिकायत करते हैं, फिर भी कोई सुनवाई नहीं होती। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-1 का जायजा लिया गया... रेलवे और नगर निगम के बीच विवाद के कारण अधूरा पड़ा नाला एक साल से बंद है। जिससे वार्ड के करीब 80% हिस्से की जलनिकासी प्रभावित है। जगह-जगह टूटी सड़कों पर ई-रिक्शा पलटने की घटनाएं सामने आईं। लोगों ने हादसों की शिकायत की। कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें खराब मिलीं। मकानों से सटे बिजली के तार करंट का खतरा बढ़ाते मिले। मुख्य सड़क पर पानी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना भी मुश्किल नजर आया। कई घरों के बाहर लोगों ने पानी रोकने के लिए ईंटों की छोटी दीवारें बना रखी थीं। पहले ये नजारा देखिए... रेलवे-नगर निगम विवाद में फंसी जलनिकासी स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले से वार्ड के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से का पानी निकलता था, उसका निर्माण रेलवे और नगर निगम के विवाद के कारण एक साल से रुका पड़ा है। इसके चलते हल्की बारिश में भी सड़कें तालाब बन जाती हैं। पानी घरों तक पहुंच जाता है और कई दिनों तक भरा रहता है। सड़कें टूटीं, हादसे बढ़े वार्ड की अधिकांश सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। ई-रिक्शा पलटने और दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं आम हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का निकलना मुश्किल हो गया है। बिजली और ट्रांसफॉर्मर भी बने खतरा वार्ड में कई जगह ट्रांसफॉर्मर सड़क स्तर पर लगे हैं, जहां बारिश का पानी भर जाता है। लोगों का कहना है कि पहले भी करंट लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। कई बिजली के तार मकानों की छतों से गुजर रहे हैं और स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं। दूषित पानी और गंदगी से बढ़ रही बीमारियां लोगों ने बताया कि पिछले कई महीनों से बदबूदार और दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। नियमित सफाई नहीं होने से नालियां जाम हैं और कचरा सड़कों पर जमा रहता है। इससे मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वार्ड की बड़ी समस्याएं अधूरा नाला निर्माण: रेलवे और नगर निगम के विवाद के कारण एक साल से निर्माण बंद, 80% हिस्से की जलनिकासी प्रभावित। जलभराव: बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं, घरों में गंदा पानी घुस जाता है। टूटी सड़कें: बड़े-बड़े गड्ढों के कारण रोजाना हादसे हो रहे हैं। दूषित पेयजल: बदबूदार पानी की सप्लाई से लोग बीमार पड़ रहे हैं। बिजली का खतरा: पानी में डूबे ट्रांसफॉर्मर, खुले तार और खराब स्ट्रीट लाइटें दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। सफाई व्यवस्था: नियमित सफाई नहीं होने से नालियां जाम और कचरे का अंबार। अधूरा नाला बना सबसे बड़ी मुसीबत राजू ने बताया कि नगर निगम और रेलवे के विवाद के कारण पिछले एक साल से नाले का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे जलनिकासी पूरी तरह ठप हो गई है। लक्ष्मी ने कहा कि पानी निकासी की समस्या लगातार बनी हुई है। शिकायत करने पर केवल आश्वासन मिलता है, जबकि गंदगी और जलभराव से बीमारियां बढ़ रही हैं। टूटी सड़कें, गंदगी और गंदे पानी से मुसीबत दुलारी ने बताया कि घरों में पानी भर जाता है, नालियां और सड़कें टूटी हैं तथा कीचड़ फैला रहता है। पीने का पानी भी गंदा आता है और शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं होती। हेमलता ने कहा कि टूटी नालियों से पानी घरों में घुस जाता है। नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी बढ़ती जा रही है। वहीं कलावती ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मी केवल खानापूरी करते हैं, जिससे नालियां फिर चोक हो जाती हैं। ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे बने खतरा राजकुमार ने बताया कि बारिश में ट्रांसफार्मर तक पानी पहुंच जाता है। लंबे समय से उसे ऊंचे प्लेटफॉर्म पर स्थापित करने की मांग की जा रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पहले भी करंट लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं कलावती ने बताया कि बिजली के खंभों से अक्सर चिंगारियां निकलती रहती हैं, जिससे हादसे का डर बना रहता है। ----------------- ये खबर भी पढ़िए… DM, SSP और कमिश्नर कार्यालय वाले इलाके से विकास लापता:मेरठ के VIP वार्ड 32 सिविल लाइन में टूटी सड़कें, जाम नाले व जलभराव मेरठ नगर निगम का वार्ड-32 सिविल लाइन शहर के VIP वार्डों में शामिल है। कलेक्ट्रेट, कचहरी, डीएम, एसएसपी और कमिश्नर के कार्यालय व आवास इसी वार्ड में हैं। फिर भी विकास के मामले में बहुत पिछड़ा है। टूटी सड़कें, जाम नाले, जलभराव, गंदा पेयजल और बदहाल सार्वजनिक शौचालय यहां की पहचान बन चुके हैं। पॉश इलाके के लोग भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ----------------- ये खबर भी पढ़िए… घरों में पहुंच रही दुर्गंध, सड़क पर जानवरों के झुंड:मेरठ के वार्ड-24 का हाल, लोग बोले- मेयर, सांसद, मंत्री सबसे कहा पर कुछ नहीं हुआ मेरठ का वार्ड-24 कसेरू बक्सर महापौर के वार्ड से सटा है, फिर भी यहां हालात बदहाल हैं। स्कूल के सामने कूड़ाघर बना है। बच्चे बदबू और गंदगी के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। अम्हेड़ा रोड गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। आवारा पशु और कुत्ते लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। शिकायतें होती हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं। चुनाव खत्म होते ही नेता गायब हो जाते हैं। विकास के दावे बहुत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। पूरी खबर पढ़ें…
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