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    रमजान पर फितरा अदा करना हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर जरूरी:मौलाना रियाज उल हक कासमी ने ₹65 प्रति व्यक्ति तय की

    1 hour ago

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    संभल में जामा मस्जिद सराय तरीन के इमाम मौलाना मुफ्ती रियाज़ उल हक़ क़ासमी ने रमज़ान के मौके पर मुसलमानों को सदक़ा-ए-फितर की अहमियत बताते हुए कहा कि हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर फितरा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्थानीय बाजार की कीमतों को देखते हुए फितरा ₹65 प्रति व्यक्ति तय किया गया है। मौलाना क़ासमी ने बताया कि सदक़ा-ए-फितर हर उस आज़ाद मुसलमान पर वाजिब है, जिसके पास अपनी बुनियादी जरूरतों और कर्ज़ के अलावा इतना माल या सामान हो जिसकी कीमत करीब साढ़े बावन तोला चांदी के बराबर या उससे अधिक हो। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उस माल पर एक साल गुजर चुका हो। घर का मुखिया आमतौर पर देता है फितरा उन्होंने कहा कि आमतौर पर घर का मुखिया अपनी तरफ से, पत्नी और नाबालिग बच्चों की तरफ से फितरा अदा करता है। यदि बड़े बच्चे साहिबे-निसाब हों तो उनका फितरा वे स्वयं या उनकी अनुमति से दिया जा सकता है। किसी अमीर महिला पर अपना फितरा खुद अदा करना जरूरी होता है, हालांकि उसका पति भी उसकी ओर से यह अदा कर सकता है। गेहूं, जौ, खजूर या किशमिश के हिसाब से तय मात्रा मौलाना ने बताया कि शरीयत के अनुसार फितरा की मूल मात्रा गेहूं या आटे का आधा सा’ यानी लगभग दो किलो और जौ, खजूर या किशमिश का एक सा’ यानी करीब साढ़े तीन किलो तय की गई है। आजकल लोग इन वस्तुओं की कीमत के बराबर नकद राशि भी अदा कर देते हैं। ईद की नमाज से पहले अदा करना बेहतर उन्होंने कहा कि फितरा ईद-उल-फितर के दिन सुबह होते ही वाजिब हो जाता है, लेकिन इसे ईद की नमाज से पहले अदा करना सुन्नत और बेहतर माना गया है। रमज़ान के दौरान पहले भी इसे दिया जा सकता है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। मौलाना क़ासमी ने लोगों से अपील की कि फितरा जरूरतमंद मुसलमानों तक पहुंचाएं, ताकि समाज में भाईचारे और आपसी सहयोग की भावना मजबूत हो सके।
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