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    राममंदिर चढ़ावा चोरी- आरोपी करुणेश शराब का आदी था:लोग बोले- 2 शादी की, कोई छू ले तो बार-बार नहाता था; हमारा गांव बदनाम हो गया

    5 hours ago

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    ‘ये गांव ब्राह्मणों का है। घर-घर राम पूजे जाते हैं, कभी कोई गलत काम नहीं हुआ। अचानक हमारा गांव बदनाम हो गया। अब लोग ‘चढ़ावा चोर का गांव’ कहते हैं। सिर उठाकर चलना मुश्किल हो गया है।’ राम मंदिर से 50 किमी दूर जयराजपुर गांव के लोग यह कहते हुए मुंह छिपा लेते हैं। मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोपी करुणेश पांडे इसी गांव का है। अयोध्या पुलिस ने उससे 18 लाख रुपए बरामद किए हैं। दावा है, यह पूरा पैसा करुणेश ने मंदिर के चढ़ावे से निकालकर जमा किए थे। SIT ने करुणेश के पिता से भी पूछताछ की। घर से कुछ डॉक्यूमेंट भी कब्जे में लिए। गांव के लोग कहते हैं- वो बहुत शराब पीता था, इसलिए सूरत में उसकी नौकरी चली गई। पहली पत्नी उसे छोड़कर भाग गई। दूसरी पत्नी से भी वह मारपीट करता था। घर के झगड़ों से परेशान उसके पिता अयोध्या में ही रहते थे। अब तो पूरा परिवार यहीं है, लेकिन उनकी निगाहें नीची रहती हैं। कोई सामने नहीं पड़ता। करुणेश ने लाखों चोरी किए, लेकिन गांव में रहन-सहन नहीं बदला अयोध्या के मिल्कीपुर में गांव जयराजपुर है। यहीं पर वशिष्ठ का पुरवा गांव में करुणेश पांडे रहता है। आबादी में 90% ब्राह्मण बिरादरी के लोग हैं। दैनिक भास्कर की टीम जयराजपुर से ठीक पहले बरियारपुर के चौराहे पर पहुंची। यहीं चाय की दुकान पर कुछ लोग बातें करते मिले। मुद्दा था, राम के मंदिर में चोरी। हम भी चर्चा में शामिल हो गए। एक शख्स से हमने पूछा- करुणेश का परिवार तो आपके गांव का ही है? वह कहते हैं- इनके परिवार का किसी से कोई व्यवहार नहीं। इनके पापा रामदास अयोध्या में खादी विलेज इंडस्ट्री में काम करते हैं। वहीं रहते भी हैं। शनिवार-रविवार गांव आते हैं। करुणेश और उसका बड़ा भाई, दोनों सूरत में नौकरी करते थे। हमने कहा- चोरी में उसका नाम आया है? दूसरे शख्स कहते हैं- बहुत गलत किया। आस्था से खिलवाड़ है। आम चोरी तो होती रहती है, लेकिन इसने जो किया, उससे गांव का नाम बदनाम हो गया। इसलिए लोग अब इसका केस तक लड़ने को तैयार नहीं हैं। हमने पूछा- उसके रहन-सहन में कोई बदलाव दिखा था? तीसरे शख्स बोले- नहीं… यहां तो ऐसा कुछ बदलाव नहीं दिखा। सब पहले जैसे ही रहते थे। अगर इन लोगों से बात करेंगे, तभी वो लोग बोलेंगे। उनका किसी से ज्यादा मतलब नहीं था। शराब की लत में पत्नी छोड़ गई, दूसरी बीवी से भी मारपीट करता था हम वशिष्ठ का पुरवा गांव पहुंचे। लोग यही बताने को तैयार नहीं थे कि करुणेश का घर कहां है? तभी हमें एक लड़का मिला। उसने घर भी बताया और करुणेश के बारे में कई अहम बातें भी बताईं। उसने बताया कि करुणेश की पहली शादी करीब 10 साल पहले हुई थी, लेकिन पत्नी 3-4 साल में ही छोड़कर चली गई। क्योंकि, करुणेश उसके साथ बहुत मारपीट करता था। पत्नी ने जब केस कर दिया, तब समझौते के लिए कुछ पैसे भी दिए थे। करुणेश को पहली पत्नी से एक बेटी है, जो यहीं रहती है। करुणेश की दूसरी शादी करीब 5 साल पहले हुई थी, लेकिन उसका स्वभाव नहीं बदला। वह अक्सर शराब के नशे में कहीं भी पड़ा मिलता था। गांव के लोग उसे उठाकर घर ले आते थे। पत्नी के साथ मारपीट करता। जब वह रोने लगती, तो और पीटता। कहता था कि रोने की आवाज बाहर नहीं जानी चाहिए। परिवार के लोग भी बीच-बचाव नहीं करते थे। जब से उसने राम मंदिर में नौकरी की, तब से तो और शराब पीने लगा था। लोग बोले- सनकी था…4-5 बार गाड़ी धोता, कोई छूता तो नहाता गांव की ही एक महिला कहती हैं- करुणेश बाकी लोगों से एकदम अलग था। वह बाइक को दिन में 4-5 बार धोता था। कई बार अपना मोबाइल तक धो देता था। किसी से छू गया, तो कई बार नहाता था। वह लोगों से अक्सर दूर होकर चलता था। कई बार हम लोगों ने उसकी पत्नी से पूछा भी कि कोई बीमारी है क्या? वह कहती थी कि ऐसा तो नहीं है। करुणेश के दूसरे भाई को गांव में फुस्सन और तीसरे भाई को मुंदरू बुलाते हैं। फुस्सन पहले से सूरत में रहता था। उसके जरिए करुणेश वहां पहुंचा था। करीब डेढ़ साल काम करने के बाद घर लौट आया था। पिता ने अयोध्या में ही एक सिक्योरिटी एजेंसी में नौकरी लगवा दी थी। करीब एक साल इस कंपनी में भी काम किया। जब यहां काम करता था, तब अपने पिता के साथ रहता था। हालांकि, सारा खर्च पिता उठाते थे। सिक्योरिटी एजेंसी के जरिए नौकरी मिली, अनुकल्प का खास बना सिक्योरिटी एजेंसी में काम करते वक्त उसकी पहचान कुछ और एजेंसियों से हो गई। इनमें एक वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड थी, जो राम मंदिर में गार्ड मुहैया करवाती है। इसी के जरिए करीब एक साल पहले करुणेश की नौकरी लग गई। करुणेश का काम मंदिर के दानपात्रों को गणना स्थल तक ले जाना था। यहीं उसकी जान-पहचान अनुकल्प मिश्रा से हुई। अनुकल्प अंदर पैसों की गिनती का काम देखता था। दोनों एक ही इलाके के थे। इसलिए दोनों में भरोसा बढ़ा और उन्होंने चोरी करना शुरू कर दिया। करुणेश के पिता रामदास अब मीडिया से बात करने से बचते हैं। कहते हैं- सारा मामला कोर्ट में है, अब वही फैसला करेगा। जहां तक बात करुणेश के पास से 18 लाख रुपए मिलने की बात है, हमें जानकारी ही नहीं थी कि इसके पास इतना पैसा होगा। करुणेश अपने ही बच्चों के लिए कभी एक बिस्कुट या टॉफी तक लेकर नहीं जाता था। उसने कभी जमीन या गहना खरीदने जैसी कोई बात भी नहीं की। हमारे पास पहले से जो प्रॉपर्टी है, उसी को संभाल रहे हैं। हमारा घर भी हमारे पिता के समय का है। करुणेश की पत्नी के अकाउंट को भी फ्रीज किया करुणेश के पास से जो 18 लाख रुपए मिले हैं, उनमें कुछ पैसे उसकी पत्नी के अकाउंट में थे। पुलिस ने पत्नी का अकाउंट भी फ्रीज किया है। 8 जुलाई को जब पुलिस ने करुणेश, लवकुश और अनुकल्प को दोबारा रिमांड पर लिया था, तब अनुकल्प के घर से गहने मिले थे। करुणेश के घर से 20 हजार रुपए मिलने की बात कही गई थी। करुणेश कहां निवेश करने वाला था, इन चीजों की जानकारी अब SIT की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगी। ----------------------- ये खबरें भी पढ़ें- राममंदिर चढ़ावा चोरी- आरोपी का परिवार टूटे-फूटे घर में छिपा, पक्के मकान में ताला लगाया; भाई चिल्लाया- अकेला छोड़ दीजिए प्रतापगढ़ में एक मामूली कर्मचारी से कुछ ही महीनों में 2 मकानों के मालिक बने अविनाश शुक्ला की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। गांव के लोग उसकी अचानक बदली किस्मत से दंग थे। 4 जून को जब पुलिस ने उसके घर से 20.39 लाख रुपए और 1121 अमेरिकी डॉलर जब्त किए, तो सारे सवालों के जवाब मिल गए। पूरी खबर पढ़िए… -------------------------- ‘राम मंदिर चोरी वाला लवकुश तुम्हारे गांव का है न…’, लोग बोले- बदनाम कर दिया; दादी का आरोप- ठाकुरों ने हमारे घर में रुपए छिपाए राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का आरोपी लवकुश जेल में है और उसके परिवार की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। 7 जून के बाद से ही परिजन घर में कैद हैं। न कोई उनसे मिलने जाता है, न ही वे लोगों के सामने पड़ना चाहते हैं। कोई सीधे शब्दों में इस बात को कहता नहीं, लेकिन लवकुश के परिवार के लिए ‘सामाजिक बहिष्कार’ जैसा माहौल दिखा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… राममंदिर चढ़ावा चोरी-आरोपी के खाते में ₹7.32 लाख मिले: रमाशंकर का परिवार बोला- सैलरी बचाई; सुभाष के बेटे ने कहा- जाओ, नहीं तो पुलिस बुलाएंगे राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों में रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी शामिल हैं। दैनिक भास्कर की टीम दोनों के घर पहुंची, उनके परिवार और पड़ोसियों से बात की। रमाशंकर का परिवार अयोध्या में राम सखा बगिया मंदिर के 2 कमरों में रहता है। पुलिस को उसके बैंक खाते में 7.32 लाख रुपए मिले हैं। परिवार का दावा है कि यह रकम उसकी कई साल की बचाई हुई सैलरी है। पढ़िए पूरी खबर… राममंदिर चढ़ावा चोरी-कविता सुनाकर चंपत के करीब पहुंचा अनुकल्प: गांववाले नाम सुनते ही दरवाजे बंद कर लेते हैं; दादा बोले- रामनाम की लूट में पकड़ाया अनुकल्प को कविता पढ़ना-सुनना पसंद था। साल-2024 में वह अयोध्या के एक कवि सम्मेलन में मंच पर कविताएं पढ़ रहा था। चीफ गेस्ट थे चंपत राय, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव। उन्हें कविताएं बहुत पसंद आईं। यह पहला मौका था, जब चंपत ने अनुकल्प के सिर पर हाथ रखा। फिर क्या था, चंपत राय को ‘बाबूजी…बाबूजी’ कहकर अनुकल्प ने राम मंदिर में एंट्री ले ली। पढ़िए पूरी खबर…
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