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    रामेश्वरी पेपर मिल की चिमनी से फिर निकला काला धुआं:NGT के आदेशों के उल्लंघन का आरोप, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा जांच

    14 hours ago

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    मुजफ्फरनगर में जौली रोड स्थित रामेश्वरी पेपर मिल की चिमनी से शनिवार शाम करीब 6 बजे एक बार फिर काला और प्रदूषित धुआं निकलता देखा गया। इस घटना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों का उल्लंघन माना जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब मिल से प्रदूषणकारी धुआं निकलने का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी कई बार पेपर मिल की चिमनी से काला धुआं निकलने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मिल प्रबंधन प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का या तो इस्तेमाल नहीं कर रहा है या उन्हें सही तरीके से संचालित नहीं किया जा रहा। देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा मुजफ्फरनगर मुजफ्फरनगर शहर पहले भी वायु प्रदूषण के मामले में देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। IQAir की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक 83.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के PM2.5 स्तर के साथ शहर दुनिया के शीर्ष 20 प्रदूषित शहरों में 20वें स्थान पर था। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण जिले में NGT के सख्त प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू हैं। सांस की बीमारियों से जूझ रहे स्थानीय लोग स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चे और बुजुर्ग सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके अलावा प्रदूषण का असर कृषि फसलों और जल स्रोतों पर भी पड़ रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि गंभीर उल्लंघनों के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। जांच के लिए भेजी जाएगी टीम: प्रदूषण बोर्ड स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता कुंवर संतोष कुमार ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि टीम भेजकर रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कानून के तहत अपराध माना जाता है विशेषज्ञों के अनुसार किसी औद्योगिक इकाई की चिमनी से काला धुआं निकलना Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 और Environment (Protection) Act, 1986 के तहत उल्लंघन माना जाता है। वहीं, इस मामले पर मिल प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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