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    रात में मिली बधाई, मिठाई; दोपहर में निराशा:नगर निगम कार्यकारिणी के लिए पक्का मान रहे थे नाम; ऐन मौके पर हुए हैरान

    2 hours ago

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    नगर निगम कार्यकारिणी सदस्यों के लिए भाजपा की सूची को लेकर इस बार सस्पेंस का रिकार्ड टूट गया। बुधवार की शाम तक लगभग 10 नाम चर्चा में थे। उनमें से कुछ ऐसे नाम थे, जिन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओरसे हरी झंडी दे दी गई थी। ये नेता इतने कद्दावर हैं कि उनकी सूचनाओं पर आंख मूंद कर लोग भरोसा करते हैं। इसी सूचना की देन थी कि बुधवार की रात में अपना नाम पक्का मानकर कुछ लोगों ने बधाई स्वीकारी और मिठाई खायी, खिलायी। लेकिन गुरुवार को दोपहर ऐन मौके पर जब पर्चा दाखिल करने वालों में उनका नाम नहीं लिया गया तो वे हैरान और निराश हो गए। नगर निगम की कार्यकारिणी में 6 सदस्यों का चुनाव किया जाना था। इनमें से 5 भाजपा के हिस्से तो एक सपा के हिस्से आने वाली थी। सपा ने पहले की चंद्रभान प्रजापति को अपना उम्मीदवार बना दिया था। लेकिन भाजपा की सूची को लेकर संशय बना रहा। हमेशा की तरह इस बार की स्थितियां नहीं थीं, बल्कि उससे भी कहीं अधिक रहस्यमय कही जा सकती हैं। बुधवार की रात दो पार्षद, अभिषेक शर्मा व अवधेश अग्रहरि का नाम एक तरह से फाइनल माना जा रहा था। इनके खेमे में खुशी का माहौल था। ये पार्षद भी यह तय मानकर चल रहे थे कि सूची में नाम तो होगा ही। कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से भी हरी झंडी मिल चुकी थी। जानिए गुरुवार को क्या हुआ गुरुवार की सुबह 11 बजे लगभग सभी पार्षद नगर निगम पहुंच चुके थे। सपा के प्रत्याशी नामांकन की तैयारी में थे लेकिन भाजपा खेमे में असमंजस की स्थिति थी। जिनके नाम रात में फाइनल माने जा रहे थे, वे खुश थे लेकिन अब तक कोई कॉल न आने से थोड़ी सिकन भी माथे पर नजर आ रही थी। जैसे ही भाजपा महानगर के पदाधिकारी वहां पहुंचे, हलचल मच गई। थोड़ी देर बाद महापौर के कमरे में वार्ड नंबर 36 के पार्षद राजेंद्र तिवारी, वार्ड नंबर 54 के पार्षद आनंद साहनी, वार्ड नंबर 66 की पार्षद आरती सिंह , वार्ड संख्या 17 के पार्षद रितेश सिंह बबलू, वार्ड नंबर 22 के पार्षद राजेश कुमार के नाम बुलाए गए। कमरे में जाने पर उन्हें पर्चा भरने को कहा गया। जैसे ही यह सूचना बाहर आयी तो उम्मीद पाले पार्षदों के खेमे में निराशा की लहर दौड़ गई। हालांकि निर्विरोध निर्वाचन के बाद उन्होंने भी सभी कार्यकारिणी सदस्यों को बधाई दी। पार्टी में अनुशासन का असर यहां भी नजर आया। इसके साथ ही सूची में महानगर अध्यक्ष का दबदबा भी नजर आया। एक भाजपा नेता ने बताया कि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। कम से कम एक दिन पहले उन पार्षदों को पता चल जाता था, जिन्हें पर्चा दाखिल करना होता था। सामाजिक समीकरण का भी ख्याल रखा भाजपा की ओर से कार्यकारिणी सदस्य बनाए गए 5 पार्षदों में से एक सामान्य श्रेणी, दो ओबीसी एवं दो एससी वर्ग से आते हैं। अब जल्द ही कार्यकारिणी सदस्यों में से उपसभापति का चयन किया जाएगा। इसको लेकर तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के अगले दौरे पर उपसभापति का नाम फाइनल हो जाएगा। इस दौड़ में एक निर्विरोध पार्षद का नाम आगे नजर आ रहा है। सपा पार्षद ने सबको चौंका दिया सपा ने आधिकारिक रूप से वार्ड नंबर 23 के पार्षद चंद्रभान प्रजापति को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन जब पर्चा दाखिल करने का वक्त आया तो वार्ड नंबर 74 के पार्षद नूर मोहम्मद सामने आ गए। उन्होंने भी पर्चा दाखिल कर दिया। इससे सपा महानगर के पदाधिकारी भी सकते में रह गए। अब नूर मोहम्मद को मनाने का क्रम शुरू हुआ। काफी मान-मनौव्वल के बाद नूर मोहम्मद तैयार हो गए और उन्होंने पर्चा वापस लेकर महानगर कमेटी की लाज बचा ली।
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