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    ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज, ₹1.60 करोड़ का एक्सीडेंट बीमा:UP के टीचर और नॉन टीचिंग स्टाफ करें अप्लाई, ये डॉक्यूमेंट जरूरी

    22 hours ago

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    यूपी में सरकारी टीचर्स को ₹1 करोड़ 60 लाख का एक्सीडेंटल बीमा और ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। बीमा किसी बड़े एक्सीडेंट में आर्थिक सुरक्षा देगा। कैशलेस इलाज गंभीर बीमारी के समय हॉस्पिटल के खर्चों को कवर करेगा। शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइया भी इस योजना के दायरे में रहेंगे। इसका फायदा बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 12 लाख शिक्षकों और नॉन-टीचिंग स्टाफ को होगा। ये सुविधा “मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना” के तहत दी जाएगी। शिक्षा विभाग के सभी स्टाफ को मिलेगा एक्सीडेंटल बीमा यह सुविधा SBI के कॉरपोरेट सैलरी पैकेज (CSP) के तहत मिलेगी। अगर किसी शिक्षक की सड़क, रेल या हवाई हादसे में मौत हो जाती है, तो उनके नॉमिनी को ₹1.60 करोड़ तक की बीमा राशि मिलेगी। अगर दुर्घटना में शिक्षक पूरी तरह दिव्यांग हो जाते हैं, तो तय नियमों के अनुसार बीमा का लाभ मिलेगा। बीमारी या हार्ट अटैक से होने वाली सामान्य मौत इस बीमा में शामिल नहीं है। ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज भी मुफ्त होगा यह सुविधा “मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना” के तहत मिलेगी, जिसका संचालन SACHIS करेगा। यह एक सरकारी एजेंसी है, जिसका पूरा नाम स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज है। अगर टीचर या उनके आश्रित परिवार के सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो यूपी के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और SACHIS से जुड़े प्राइवेट अस्पतालों में हर साल ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज कराया जा सकेगा। यह सुविधा हर साल फिर से उपलब्ध होगी। 10 आसन स्टेप में बनाएं कैशलेस मेडिकल कार्ड 6 सितंबर तक कराएं रजिस्ट्रेशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने 8 जुलाई, 2026 को योजना की औपचारिक शुरुआत की। सभी पात्र शिक्षक और नॉन टीचिंग स्टॉफ को 6 सितंबर, 2026 तक अपना और परिवार का रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा। जिससे वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी की जा सके। SACHIS की CEO अर्चना वर्मा के मुताबिक, शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन, वेरिफिकेशन और हेल्थ कार्ड जारी करने के लिए पोर्टल बनाया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के 7.89 लाख से ज्यादा लाभार्थी अपना डेटा दर्ज करा चुके हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग का पोर्टल भी शुरू हो गया है। जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षक भी इस योजना से जुड़ेंगे। वेरिफिकेशन और e-KYC के बाद शिक्षक हेल्थ कार्ड डाउनलोड कर कैशलेस इलाज का लाभ ले सकेंगे। जेब से एक रुपया भी नहीं देना होगा सरकारी आदेश के मुताबिक, इस योजना के लिए एक शिक्षक का सालाना प्रीमियम करीब ₹3 हजार आएगा। इसका पूरा भुगतान सरकार अपने विभागीय बजट से करेगी। कर्मचारियों को अपनी जेब से एक भी रुपया प्रीमियम नहीं देना होगा। यह योजना मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद ही लागू होगी। कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, न्यूरो और सर्जरी समेत 1900 से ज्यादा बीमारियों के इलाज में इसका फायदा मिलेगा। सर्दी-जुकाम या डॉक्टर को सिर्फ दिखाकर दवा लेने वाले ओपीडी खर्च इसमें शामिल नहीं हैं। शिक्षक और कर्मचारियों के लिए 4 जरूरी सवालों के जवाब सवाल1- मुझे कैशलेस इलाज और इंश्योरेंस योजना का लाभ उठाने के लिए क्या करना होगा? जवाब- कैशलेस इलाज का लाभ उठाने के लिए शिक्षा विभाग और 'SACHIS' के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद विभाग आपको 'कैशलेस हेल्थ कार्ड' जारी करेगा। आपका वेतन खाता SBI में होना जरूरी है। सवाल 2- अगर अस्पताल में ही कर्मचारी के साथ अनहोनी हो जाती है, तो बच्चों की पढ़ाई-शादी वाला पैसा कैसे मिलेगा? जवाब- अगर किसी कर्मचारी के साथ हादसा हो जाता है, तो परिवार को सिर्फ बीमा का पैसा ही नहीं मिलेगा। बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी के लिए भी अलग से आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके लिए जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने होंगे। जांच पूरी होने के बाद यह रकम सीधे बैंक खाते में भेज दी जाएगी। सवाल 3- क्या यह सुविधा यूपी के बाहर के अस्पतालों में भी मान्य होगी? जवाब- यह सुविधा सिर्फ यूपी के सरकारी अस्पतालों और 'साचीज' से जुड़े प्राइवेट अस्पतालों में मिलेगी। मरीज से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। 1900 से ज्यादा इलाज के पैकेज पहले से तय हैं। इसलिए अस्पताल का भुगतान सरकार सीधे करेगी। सवाल 4- रसोइया और संविदाकर्मियों को जो ₹2 लाख का कवर मिल रहा, उसकी क्या शर्त है? जवाब- ₹10 हजार से कम मानदेय पाने वाले रसोइयों और अन्य संविदा कर्मचारियों का SBI में जीरो बैलेंस खाता खुलेगा। डेबिट कार्ड एक्टिव होने पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा मिलेगा। इसके लिए अलग से कोई कागजी प्रक्रिया नहीं करनी होगी।
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