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    संभल में 90 वर्षीय दुलारी को अनोखी विदाई:रंग-गुलाल उड़ाते हुए होली गीतों के साथ निकली 10 KM लंबी अंतिम शवयात्रा, डीजे पर पर नाचे

    14 hours ago

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    संभल जिले में एक 90 वर्षीय महिला की अंतिम यात्रा रंग-गुलाल और होली के गीतों के साथ निकाली गई। आमतौर पर शोक के माहौल के विपरीत, दुलारी देवी को उनके परिजनों ने एक अनोखी और उत्सवपूर्ण विदाई दी। उनका अंतिम संस्कार गंगा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। उक्त पूरा मामला संभल की गुन्नौर तहसील के गढ़िया गांव की है। शुक्रवार सुबह गांव निवासी राम प्रकाश की 90 वर्षीय मां दुलारी देवी, जो स्वर्गीय झांझन सिंह की पत्नी थीं, का रंगभरी एकादशी के दिन निधन हो गया। परिजनों ने उनके लंबे और संतुष्ट जीवन को ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए, दुख के बजाय सम्मान और उत्सव के साथ विदाई देने का निर्णय लिया। शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे, बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा डीजे साउंड और होली के गीतों के बीच रंग-गुलाल उड़ाते हुए थाना बबराला कस्बा क्षेत्र से गुजरी। गांव गढ़िया से राजघाट गंगा घाट तक की लगभग दस किलोमीटर की दूरी परिजनों और ग्रामीणों ने अर्थी को कंधों पर उठाकर पैदल तय की। इस दौरान "होली खेले रघुवीरा" जैसे पारंपरिक गीतों की धुन पर युवा झूमते और एक-दूसरे पर रंग-गुलाल उड़ाते नजर आए। माहौल ऐसा था मानो होली का जुलूस निकल रहा हो, लेकिन यह सब मृत महिला की अंतिम यात्रा में हो रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, दुलारी देवी ने एक भरा-पूरा परिवार देखा था। उन्होंने अपने बच्चों, पोते-पोतियों और परपोते-पोतियों का स्नेह प्राप्त किया। 90 वर्ष की आयु तक सक्रिय जीवन जीने के बाद उनका निधन एक पूर्ण जीवन की विदाई माना गया। ग्रामीण भगवान दास ने बताया कि अधिक आयु में मृत्यु होने पर गाजे-बाजे के साथ 'विमान' निकालने की परंपरा रही है, जिसे सम्मानजनक और गरिमापूर्ण विदाई समझा जाता है। रंग और संगीत के बीच दी गई इस अनोखी विदाई ने जहां लोगों की आंखें नम कर दीं, वहीं यह संदेश भी दिया कि जीवन एक उत्सव है और उसकी विदाई भी सम्मान, संस्कार और अपनत्व के साथ की जा सकती है।
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