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    संभल में यूजीसी कानून के विरोध में रैली:राष्ट्रीय किसान संघर्ष समिति ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, सभी जातियों को 'हिंदू' घोषित करने मांग

    2 hours ago

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    संभल जिले की चंदौसी तहसील में राष्ट्रीय किसान संघर्ष समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कानून का विरोध किया। समिति ने जातिगत आरक्षण समाप्त कर सभी जातियों को 'हिंदू' घोषित करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। बुधवार दोपहर तीन बजे चंदौसी कोतवाली क्षेत्र में यूजीसी कानून के विरोध में एक रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार रवि सोनकर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू यूजीसी कानून हिंदू जातियों के बीच भेदभाव और वैमनस्य को बढ़ावा देता है। उन्होंने इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने 'एक देश, एक कानून' के प्रधानमंत्री के वक्तव्य का हवाला देते हुए जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की अपील की। उनकी मुख्य मांग है कि देश में सभी जातियों को समाप्त कर केवल 'हिंदू' जाति घोषित किया जाए, ताकि सभी नागरिकों को एक समान 'हिंदू' पहचान मिल सके। इसके साथ ही, आंदोलनकारियों ने जातिगत आरक्षण और राजनीतिक आरक्षित सीटों (सांसद, विधायक) को पूरे देश से खत्म करने की मांग की। उनका कहना है कि हर विधानसभा और लोकसभा में 'हिंदू' नाम की जाति का कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सके। उन्होंने आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण लागू करने की भी वकालत की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक 'हिंदू' जाति की घोषणा नहीं होती, जातिवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह पहले हिंदुओं को मुसलमानों से लड़ाती थी और अब राजनीतिक लाभ के लिए जातियों के नाम पर हिंदुओं को आपस में लड़ा रही है। उन्होंने कहा कि यह देशहित में नहीं है और चिंताजनक है। समिति ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और आंदोलन के दौरान कोई घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में शिव शर्मा, शैलभ शर्मा, संजीव राघव, राहुल कश्यप, अमन राठौर, वीरेंद्र सिंह तोमर, अमर सिंह तोमर, रामपाल सिंह, ओमवीर सिंह, दुष्यंत सिंह, गुरवीर सिंह, अजेंद्र राघव, सुनील राघव, सुदेश राघव, शानू शर्मा, एमपी सिंह, मोहित राघव, सचिन राघव और अवधेश राघव सहित कई लोग शामिल थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर दयाल शर्मा ने कहा कि यूजीसी कानून का विरोध करते हैं। मोदी-योगी सरकार सवर्ण और अन्य जातियों को आपस में लड़ना चाहती है लेकिन ऐसा नहीं होगा। 2027 का विधानसभा चुनाव आने वाला है और जब भाजपा के प्रत्याशी गांव में प्रचार के लिए आएंगे तो उन्हें घुटने नहीं दिया जाएगा और उनका स्वागत जूते चप्पल की मालाओं से किया जाएगा।
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