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    सबसे बड़ा खिलाड़ी तो अपना भारत निकला, इराक से मिला क्रूड ऑयल का जैकपॉट, इधर यूरोप को डीजल बेचकर कमाया बंपर मुनाफा

    13 hours ago

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    पूरी दुनिया में इस समय एनर्जी और क्रूड ऑयल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। मिडिल ईस्ट में तनाव, लाल सागर में संकट और शिपिंग रूट्स पर अनिश्चितता के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सचमुच एक डबल जैकपॉट हासिल कर लिया है। जैकपॉट नंबर एक भारत की दिग्गज कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन यानी आईओसी ने इराक से क्रूड ऑयल पर प्रति बैरल $32 तक का भारी डिस्काउंट हासिल किया है।  जैकपॉट नंबर दो अमेरिका और चीन के एक फैसले के चलते यूरोप में डीजल का भारी संकट खड़ा हो गया है।  यूरोपीय यूनियन को डीजल सप्लाई करने वाला भारत सबसे बड़ा और भरोसेमंद सप्लायर बन चुका है । वो भी प्रीमियम मार्जिन पर। सस्ते में कच्चा तेल खरीदो। अपनी हाईटेक रिफाइनरी में उसे रिफाइन करो और यूरोप को प्रीमियम पर डीजल बेचो। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: America ने दो दशक बाद छोड़ा Iraq, Iran ने मारी Entry, अब बदलेगा Middle East का Power Game!भारत ने कैसे इस जियोपॉलिटिकल संकट को महाअवसर में  बदला? हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने विटोल के जरिए लगभग 2 मिलियन बैरल इराकी बसरा मीडियम क्रूड ऑयल खरीदा है। लेकिन असली चौंकाने वाली बात इसकी कीमत है। यह तेल दुबई बेंचमार्क से करीब $32 प्रति बैरल नीचे खरीदा गया है। जो लोग एनर्जी मार्केट से परिचित हैं, वे अच्छे से जानते हैं कि सामान्य तौर पर डिस्काउंट $2 से $4 प्रति बैरल के बीच होता है। $32 प्रति बैरल की छूट कोई साधारण छूट नहीं है बल्कि एक बहुत बड़ी छूट जैसी दिखती है। 2 मिलियन बैरल पर $32 की छूट का सीधा मतलब है लगभग $64 मिलियन की भारी बचत। अब सवाल यह उठता है कि जब ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं तो इराक जैसा देश भारत को इतना बड़ा डिस्काउंट क्यों दे रहा है? इसके पीछे का कारण है स्टेट ऑफ हॉर्मज और भू-राजनीतिक जोखिम। इराक के पास तेल का विशाल भंडार है और उसका उत्पादन जीरो पर है। लेकिन उसके एक्सपोर्ट्स रूट्स गंभीर जोखिम में है। युद्ध के खतरे के कारण शिपिंग कंपनियों के इंश्योरेंस प्रीमियम बेतहाशा बढ़ चुके हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस जगह अपने टैंकर भेजने से हिचकिचा रही है। इराक की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से तेल की बारीकी पर निर्भर है। अगर तेल नहीं बिका तो उनका इन्वेंटरी जाम हो जाएगी और सरकारी खजाना सूखने लगेगा। ऐसे में इराक को ऐसे खरीदार की सख्त जरूरत थी जो बड़े पैमाने पर रिस्क उठाएं और लॉजिस्टिक को मैनेज करने की क्षमता रखता हो। भारत की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने आगे बढ़कर एक रिस्क लिया। भारत ने ओमान और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में शिप टू शिप ट्रांसफर और अपनी मजबूत लॉजिस्टिक व्यवस्था के दम पर यह तेल उठाया। इसी रणनीतिक रिस्क का नतीजा यह $32 प्रति बैरल का भारी डिस्काउंट है। चलिए अब आते हैं दूसरे पहलू पर जो इस पूरी डील का डबल जैकपॉट बनाता है। इसे भी पढ़ें: Iraq से US Military की विदाई, 4 Sovereignty Days के साथ जश्न का ऐलानयूरोप का डीजल संकट यूरोप आज डीजल की भारी किल्लत से जूझ रहा है। इसके मुख्य कारण है। पहला है रूस पर प्रतिबंध और हमले। जी हां, रूस दुनिया का एक प्रमुख डीजल निर्यातक था। लेकिन युद्ध और हमलों के कारण उसकी रिफाइनिंग और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। दूसरा पॉइंट है चीन का एक्सपोर्ट बैन। जी हां, चीन ने अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए फ्यूल एक्सपोर्ट पर सख्त बंदिश लगा दी है। तीसरा है अमेरिका की नई नीतियां। अमेरिका में भी घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देने और एक्सपोर्ट्स को नियंत्रित करने के प्रस्ताव सामने आए हैं। दूसरी तरफ यूरोप की खुद की रिफाइनिंग क्षमता पिछले दो दशकों में काफी घटी है। लेकिन उनके टैंकों, कृषि उपकरणों और ट्रांसपोर्ट्स और उद्योगों को चलाने के लिए डीजल कोई विलासता नहीं बल्कि जीवन रेखा है। यहीं पर भारत की एंट्री होती है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाला देश है। जामनगर से लेकर पारादीप तक हर रिफाइनीस तकनीकी रूप से दुनिया की सबसे एडवांस रिफाइनी में गिनी जाती है जो किसी भी ग्रेड के कच्चे तेल को प्रीमियम क्वालिटी के डीजल और एिएशन फ्यूल में बदल सकती है। जब यूरोप के सामने विकल्प की कमी हुई तो भारत उनके लिए सबसे भरोसेमंद जीवनदाता बनकर उभरा। यूरोप का जहां से भी डीजल मिल रहा है वो इसके लिए प्रीमियम चुकाने को तैयार है और इस अवसर को और मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने भी एक बेहद सटीक रणनीतिक कदम उठाया।
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