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    साफ पानी मिलने से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार:कानपुर मंडल के 6 जिलों में हुआ सर्वे, महिलाओं के समय की बचत और बच्चों की सेहत में सुधार

    3 hours ago

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    राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत संचालित 'हर घर नल-हर घर जल' योजना का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के समाज कार्य विभाग ने कानपुर मंडल के छह जिलों कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज और फर्रुखाबाद में इस योजना का प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन किया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि स्वच्छ पानी मिलने से न केवल ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि महिलाओं के श्रम और समय में भी बड़ी बचत हुई है। 15 गांवों में टीम ने परखा जमीनी सच विश्वविद्यालय की टीम ने कानपुर नगर के विभिन्न ब्लॉकों के 15 गांवों में सघन सर्वे किया। इस दौरान टीम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन किया। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में अब स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ा है। शुद्ध पानी मिलने से जल जनित बीमारियों में कमी आई है और बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति भी बेहतर हुई है। जल सखियों ने बढ़ाई सामुदायिक जागरूकता अध्ययन में पाया गया कि कई गांवों में 'जल सखी' और 'ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति' (VWSC) काफी सक्रिय हैं। इनकी सक्रियता से पानी के वितरण और रखरखाव में सामुदायिक भागीदारी बढ़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि जल टंकी का संचालन और पानी की गुणवत्ता अब पहले से बेहतर है। हालांकि, सर्वे टीम ने सुझाव दिया है कि जमीनी स्तर पर जन जागरूकता गतिविधियों (IEC) को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है ताकि लोग पानी की बचत और स्वच्छता के प्रति अधिक सजग हो सकें। बदलेगा पानी की सप्लाई का समय सर्वे के दौरान तकनीकी पहलुओं जैसे रोस्टर आधारित जलापूर्ति, पानी में क्लोरीन की मात्रा और फिल्टर की कार्यप्रणाली की भी जांच की गई। समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि बजट की कमी के कारण कुछ जगहों पर काम प्रभावित हुआ था, लेकिन अब योजना को 'ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस' (OM) मोड पर डाला जा रहा है। इससे पाइपलाइनों और टंकियों के रखरखाव में तेजी आएगी। टीम ने यह भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि कोहरे, ठंड और स्कूली बच्चों के समय को देखते हुए पानी की सप्लाई के रोस्टर में बदलाव किया जाए ताकि सुबह के समय लोगों को दिक्कत न हो। इन जिलों में हुआ अध्ययन सीएसजेएमयू की इस सर्वे टीम में मुख्य सर्वेक्षक डॉ. किरण झा और सह-सर्वेक्षक डॉ. एस.पी. वर्मा शामिल रहे। टीम के अन्य सदस्यों डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. उर्वशी सिंह और डॉ. बुसरा बरकाती ने कानपुर मंडल के सभी छह जिलों में जाकर डेटा इकट्ठा किया। कार्यकारी कंपनियों वी.सी.ए. और विटल ने भी फील्ड के अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया है, जिसके आधार पर भविष्य में योजना में सुधार किए जाएंगे।
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