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    सहारनपुर की 2 युवतियां बनेंगी जैन साध्वी:एक ने लंदन में जज, दूसरी ने CA की नौकरी छोड़ी; 7 दीदियों की निकली बिनौली यात्रा

    1 hour ago

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    सहारनपुर की दो युवतियां अब सांसारिक जीवन छोड़कर जैन साध्वी बनने जा रही हैं। इनमें प्रखर नाम की युवती ने लंदन में वकालत की है। उन्हें जज बनने का मौका भी मिला था, लेकिन उन्होंने इसे छोड़कर संयम का मार्ग चुन लिया। वहीं, रंगोली नाम की युवती कोलकाता में करीब 10 साल तक सीए रहीं। अब दोनों युवतियों ने अपने नाम के आगे ‘दीदी’ लगा लिया है। इनके साथ अलग-अलग जिलों और राज्यों की पांच अन्य युवतियां भी दीक्षा लेने जा रही हैं। सातों दीक्षार्थियों के संयम संकल्प पर शनिवार को बैंड-बाजों और जैन धर्म के जयकारों के साथ बिनौली यात्रा निकाली गई। यात्रा जैन बाग मंदिर पहुंची, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गोद भराई की रस्म हुई। अब 22 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश के सोनागिरि तीर्थ में पांच साधिकाओं का श्रमणी आर्यिका दीक्षा महोत्सव प्रस्तावित है। लंदन में वकालत की, जज बनने का मौका छोड़ा सहारनपुर निवासी जिनेंद्र कुमार जैन और ज्योति जैन की बेटी प्रखर दीदी ने बीए एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में सीनियर एडवोकेट के तौर पर काम किया। कानून के क्षेत्र में उनका करियर आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान उनका चयन जज के पद के लिए भी हुआ, लेकिन प्रखर दीदी ने जज बनने के बजाय साधना का मार्ग चुन लिया। कोलकाता में 10 साल तक सीए रहीं रंगोली दीदी सहारनपुर निवासी जिनेंद्र कुमार जैन और सविता जैन की बेटी रंगोली दीदी ने बीकॉम के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में करीब 10 साल तक सीए के रूप में काम किया। अच्छे करियर के बावजूद उन्होंने नौकरी छोड़कर संयम का रास्ता चुन लिया। समाज में उन्हें नगर गौरव के रूप में भी जाना जाता है। 2020 में ही ले लिया था ब्रह्मचर्य व्रत भिंड निवासी ब्रह्मचारी गिरजा दीदी का मन लंबे समय से धर्म और साधना में लगता था। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। साल 2020 में ही उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत ले लिया था। इसके बाद से वह लगातार धार्मिक नियमों का पालन करते हुए साधना में जुटी रहीं। अब उन्होंने दीक्षा लेने का संकल्प लिया है। मुकेश कुमार जैन और मीनू जैन की बेटी चेतना दीदी ने 12वीं तक पढ़ाई की है। बचपन से ही उनका रुझान धर्म और आध्यात्मिक जीवन की ओर रहा। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी धर्म और साधना के मार्ग पर समर्पित करने का फैसला किया। एमए फाइन आर्ट्स के बाद चुना संयम का रास्ता अशोकलाल जैन और पुष्पा देवी जैन की बेटी सोनम दीदी ने फाइन आर्ट्स में एमए किया है। इसके साथ ही उन्होंने स्टेनोग्राफी की पढ़ाई भी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी और करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए, लेकिन बाद में उनका मन सांसारिक जीवन से हटकर साधना में लगने लगा। इसके बाद उन्होंने दीक्षा लेने का फैसला कर लिया। दीक्षा के बाद पैदल करना होगा विहार जैन साध्वी बनने के बाद इन सभी का जीवन आम गृहस्थ जीवन से बिल्कुल अलग होगा। उन्हें धन-संपत्ति, वाहन और दूसरी सुख-सुविधाओं का त्याग करना होगा। कहीं आने-जाने के लिए गाड़ी का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी, बल्कि पैदल ही विहार करना होगा। खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा के कार्यों तक जैन साध्वी परंपरा के कड़े नियमों का पालन करना होगा। उनका जीवन पांच महाव्रतों पर आधारित होगा। इनमें अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह शामिल हैं। यानी किसी जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना, सत्य बोलना, चोरी नहीं करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना और किसी भी तरह के संग्रह या मोह से दूर रहना होगा। जैन समाज अध्यक्ष बोले- सात बहनों ने दिया त्याग और तपस्या का संदेश जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा- सातों बहनों का अच्छे करियर और सुख-सुविधाओं को छोड़कर संयम का रास्ता चुनना पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। पढ़ाई और नौकरी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के बाद साधना का जीवन अपनाने का उनका फैसला नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। परिजनों के लिए भावुक रहा आयोजन बिनौली यात्रा में दीक्षार्थियों के परिवारों के सदस्य और जैन समाज के लोग शामिल हुए। परिजनों के लिए यह मौका भावुक करने वाला था। बेटियों को पढ़ाकर और उनके भविष्य के सपने संजोकर बड़ा करने वाले परिवार अब उन्हें एक नए रास्ते पर विदा करने की तैयारी कर रहे हैं। एक तरफ बिछड़ने का भाव था तो दूसरी तरफ बेटियों के फैसले पर गर्व भी दिखाई दिया।
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