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    ‘सलीम वास्तिक एक्स मुस्लिम है, सनातनी नहीं’:गाजियाबाद में यति नरसिंहानंद बोले- उसे कभी मां और महादेव के दर्शन नहीं करने दिए गए

    4 hours ago

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    अपहरण-हत्या के मामले में एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान अब तिहाड़ जेल में बंद है। 26 साल तक दिल्ली पुलिस को चकमा दे रहा था। पुलिस के अनुसार, सलीम ने अपना नाम नहीं बदला, बल्कि ‘खान’ हटाकर ‘वास्तिक’ जोड़ लिया था। वह खुद को एक्स-मुस्लिम बताकर करीब 6 साल पहले गाजियाबाद के डासना मंदिर के प्रमुख और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद से भी मिला था। पूछताछ में सामने आया है कि फरारी के दौरान सलीम ने अलग-अलग जगहों पर अपनी पहचान छिपाकर काम किया। कभी उसने गाजियाबाद में महिलाओं के कपड़े बेचे, तो कभी मेरठ और मुजफ्फरनगर में मस्जिदों में छिपकर रहा। इसके अलावा हरियाणा के अंबाला और करनाल में वह कारपेंटर बनकर घरों में अलमारी और लकड़ी का काम करता रहा। मोबाइल से दूरी, यूट्यूब चैनल भी चलाया पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान सलीम ने करीब 8 साल तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। बताया जा रहा है कि उसने एक यूट्यूब चैनल भी चलाया था, जिससे वह अपनी पहचान को सामान्य बनाए रख सके। साल 2024 में यति नरसिंहानंद के विवादित बयान के बाद मुस्लिम समुदाय की बड़ी भीड़ ने डासना मंदिर को घेरने की कोशिश की थी। उस घटना के बाद स्थिति बिगड़ गई थी और पुलिस ने यति नरसिंहानंद को करीब 20 दिनों तक अज्ञात स्थान पर सुरक्षा में रखा था। यति नरसिंहानंद बोले- सलीम एक्स मुस्लिम था, सनातनी नहीं 27 फरवरी 2026 को गाजियाबाद के लोनी स्थित घर में बने ऑफिस पर जिहाद के खिलाफ बोलने को लेकर सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला हुआ था। आरोप है कि दो हमलावरों ने उसका गला रेत दिया और उस पर 14 चाकू से वार किए गए। गंभीर हालत में सलीम को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह करीब एक महीने तक इलाजरत रहा। इस घटना के बाद मामला और गरमा गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों जीशान और गुलफाम को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। हिंदूवादी नेताओं का मिला था समर्थन घटना के बाद सलीम को कई हिंदूवादी नेताओं का समर्थन मिला था। इनमें लोनी से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर, हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी और महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद शामिल हैं। इन नेताओं ने सलीम से मुलाकात कर उसे सुरक्षा का भरोसा भी दिया था। यति नरसिंहानंद ने कहा कि सलीम वास्तिक सनातनी नहीं था, बल्कि वह केवल एक्स मुस्लिम के तौर पर अपनी बात रखता था। उन्होंने कहा कि “वह जिहाद के खिलाफ बोलता था, लेकिन उसकी पूरी सच्चाई को समझना जरूरी है। इस मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों को पूरी सच्चाई सामने लानी चाहिए। सलीम कभी मंदिर के गर्भगृह में नहीं गया महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि उन्होंने सलीम के दो कार्यक्रम भी कराए थे। सलीम मंदिर परिसर में आता था, लेकिन केवल उनसे कमरे में मुलाकात करता था और पैर छूकर प्रणाम करता था। उन्होंने यह भी कहा कि डासना मंदिर में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है और वहां केवल सनातन धर्म मानने वालों को ही अनुमति है। सलीम कभी मंदिर के गर्भगृह में नहीं गया और न ही उसे देवी-देवताओं के दर्शन करने दिए गए। अब पढ़िए सलीम वास्तिक कैसे बचता रहा ? पहले मुजफ्फरनगर, फिर मेरठ में छिपा संदीप बंसल हत्याकांड के करीब 2 साल बाद 1997 में दिल्ली कोर्ट से सलीम को उम्रकैद की सजा हुई। इसके 3 साल बाद साल- 2000 में सलीम अग्रिम जमानत पर आया और फिर फरार हो गया। सलीम से पूछताछ में दिल्ली पुलिस को पता चला कि भागने के बाद वह मुजफ्फरनगर के खालापार इलाके में एक मस्जिद में रहा, जिससे पुलिस उसे तलाश नहीं कर सके। इसके बाद अपनी रिश्तेदार के जरिए कुछ दिन मेरठ के लिसाड़ीगेट में रुका। 2001 में सलीम यूपी से भागकर हरियाणा पहुंचा। वहां उसने अंबाला और करनाल में कारपेंटर का काम किया। 2010 में वह गाजियाबाद के लोनी में बस गया। इस बीच साल- 2015 तक सलीम ने मोबाइल फोन तक नहीं चलाया। पहले सिर्फ अपनी पत्नी और साले के फोन से ही वह रिश्तेदारों को कॉल करता था। उसके बाद उसने यू-ट्यूब चैनल चलाया। दिल्ली पुलिस ने एक महीने तक रेकी कर पकड़ा 27 फरवरी, 2026 को सलीम पर 2 सगे भाइयों ने जानलेवा हमला किया था। सलीम दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती हुआ, उसके बाद उसे मैक्स भेज दिया गया। यहां से उसके फिंगर प्रिंट लिए गए। इसी दौरान दिल्ली पुलिस को पता चला कि सलीम खान हमारे यहां से 26 साल पहले फरार हुआ मुजरिम है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गोपनीय ढंग से जांच शुरू की। लोनी स्थित जिस घर में बने ऑफिस में सलीम पर हमला हुआ था, वहां भी पुलिस जांच करती रही। इसी बीच दिल्ली पुलिस को पता चला कि पहले हुई में पिटाई में सलीम का एक पैर टूट गया था। सलीम कभी-कभी खुद भी यह कहता था कि मैंने बहुत बदमाश देखे हैं। इससे सलीम पर पुलिस का शक और भी बढ़ने लगा। सलीम ठीक हुआ, तो पुलिस ने पूरी तरह से निगरानी शुरू कर दी।
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