Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सनातन धर्म-कर्म सिद्धांत पर विशिष्ट व्याख्यान:लखनऊ में अखिल भारतीय संस्कृत परिषद ने किया आयोजन

    1 hour ago

    1

    0

    अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् ने राजधानी में 'सनातनधर्माभिमत कर्ममीमांसा' विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने सनातन धर्म में कर्म सिद्धांत की महत्ता और उसके दार्शनिक आधार पर विस्तार से जानकारी दी। मुख्य वक्ता के रूप में वी.एस.एस.डी महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्रो. अनीता सोनकर ने कहा कि सनातन धर्म और कर्म सिद्धांत भारतीय संस्कृति की रीढ़ हैं। उन्होंने जोर दिया कि इनके बिना भारतीयता की कल्पना अधूरी है। प्रो. सोनकर ने यह भी बताया कि भारतीय दर्शन की लगभग सभी धाराओं ने अपने-अपने मतों के साथ कर्ममीमांसा को स्वीकार किया है। अच्छे-बुरे कर्म का फल स्वयं भोगना पड़ता है प्रो. सोनकर ने स्पष्ट किया कि मनुष्य को अपने हर अच्छे-बुरे कर्म का फल स्वयं भोगना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार व्यक्ति वर्तमान जीवन में कुछ विशेष न करने के बावजूद सुख या दुख का अनुभव करता है, जो पूर्व जन्मों के कर्मों का परिणाम होता है। उन्होंने विभिन्न धर्मों और दर्शनों में वर्णित कर्म के रहस्यों का उल्लेख करते हुए सनातन धर्म में इसकी विशिष्टता को रेखांकित किया। कर्म का सिद्धांत जीवन की एक सच्चाई है कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, कानपुर नगर के सेवानिवृत्त अधीक्षक जिला कारागार ने कर्म के दार्शनिक और धार्मिक सिद्धांतों की व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कर्म का सिद्धांत केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक सच्चाई है।परिषद् के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने वाचिक स्वागत करते हुए विषय का प्रवर्तन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. रवि किशोर त्रिवेदी ने कर्ममीमांसा को सनातन धर्म का मूल तत्व बताया। ये लोग शामिल हुए इस अवसर पर डॉ. रेखा शुक्ला, डॉ. अभिमन्यु सिंह, डॉ. अशोक कुमार शतपथी, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. ऋतु सिंह और डॉ. नीलम पाण्डेय सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।कार्यक्रम का कुशल संयोजन संयोजिका डॉ. पत्रिका जैन ने किया, जबकि संचालन डॉ. अनिल पोरवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिमन्यु सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का समापन वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण, स्वागत गीत और शांति पाठ के साथ हुआ।
    Click here to Read more
    Prev Article
    आगरा में ट्रैक्टर बाइक की टक्कर में मामा-भांजे की मौत:पहिए के नीचे दबने से आंते बाहर आईं, दूसरे ने अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
    Next Article
    बागपत में होली को लेकर खाद्य विभाग की टीम अलर्ट:11 से ज्यादा नमूने जांच को भेजे, लोगों से सावधान रहने की अपील की

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment