Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु दी, नई जिंदगी देने पहुंचे बाबा:बोले- मेरी जड़ी-बूटी ठीक कर देगी; गाजियाबाद में पिता ने लौटाया

    12 hours ago

    1

    0

    मैं राजस्थान से आया हूं। मेरी बनाई देसी दवा की पुड़िया से आपके बेटे को नई जिंदगी मिल सकती है। आप चाहें तो इसे एम्स के डॉक्टर से दिलवा दें। एक बाबा का ये दावा सुन गाजियाबाद के रहने वाले अशोक राणा भावुक हो गए। बोले- शब्दों में बयां नहीं कर सकता 13 साल से बेटे को जिंदा लाश की तरह देखना कितना दर्दनाक रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ नहीं। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है। दैनिक भास्कर की टीम गाजियाबाद की राज एंपायर सोसाइटी पहुंची, जहां 13वीं मंजिल पर अशोक राणा रह रहे हैं। हमने सोसाइटी के लोगों से बात की। पिता से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन वह अब इस मसले पर ज्यादा बोलना नहीं चाहते। बाबा कौन थे ये भी जाना। पढ़िए रिपोर्ट… आधे घंटे तक बाबा और अशोक राणा की बातचीत हरीश राणा को नई जिंदगी देने के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा के 62 साल के अखंडानंद बाबा गाजियाबाद पहुंचे। लेकिन राज एंपायर सोसाइटी के अंदर उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया। पास में रहने वाले दुकानदार धर्मेंद्र के जरिए बाबा ने बताया कि ‘मैं राजस्थान से कुछ देसी दवाइयां लाया हूं। ये जड़ी बूटियों से बनी हैं। इनसे हरीश को नई जिंदगी मिल सकती है।’ अखंडानंद के इस मैसेज के करीब 6 घंटे बाद हरीश राणा के पिता अशोक राणा सोसाइटी में नीचे आए। यहां पर समिति के कुछ पदाधिकारी भी साथ में खड़े थे। करीब 30 मिनट तक बाबा और अशोक राणा की बातचीत हुई। बाबा बोले- हो सकता है कि बेटे के अंग काम करने लगे बाबा ने कहा- हम देसी जड़ी बूटियां देते हैं। जैसे आपके बेटे के बारे में मुझे मीडिया से पता चला है कि वह 13 साल से कोमा की स्थिति में है। इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। हम चाहते हैं कि मेडिकल बोर्ड आगे की कार्रवाई करे, लेकिन हम जो जड़ी-बूटी लाए हैं, उनसे आपके बेटे को नई जिंदगी मिल सकती है। यह केस बहुत लंबे समय से बहुत ही नाजुक स्थिति में है, लेकिन फिर भी उम्मीद है कि चाहे आप ये दवाएं नलकी से दें या एम्स के डॉक्टर से दिलवा दें। हो सकता है बेटे की जो नस है और जो दूसरे अंग हैं, वह काम करना शुरू कर दें। पिता बोले- मैं अपना दर्द शब्दों में नहीं बता सकता इस पर अशोक राणा ने कहा- हमें 13 साल हो गए। सब प्रयास कर लिए। सब जगह इलाज करा लिया। 13 साल से मैंने बेटे को कैसे जिंदा लाश की तरह देखा है, शब्दों में नहीं बयां कर सकता। मेरा दिल्ली का तीन मंजिला मकान भी बेचना पड़ा। आर्थिक स्थिति के लिए मैंने बहुत झेला है। मेरे परिवार की स्थिति मैं शब्दों में बता नहीं सकता। अब जब माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है, तो हम इसमें कुछ नहीं कह सकते। उम्मीद है कि जो हमने मांग की थी सुप्रीम कोर्ट से उसी के अनुसार दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम इसमें आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके बाद अशोक राणा ने इन बाबा को कुछ फल भी दान में दिए। हालांकि बाबा ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। सिर्फ इतना कहा कि मैं मीडिया में फोटो-वीडियो या बयान देना उचित नहीं समझता। सोसाइटी में रहने वाले क्या बोले… दैनिक भास्कर ने सोसाइटी में रहने वाले कुछ लोगों से भी बात की। तेजस ने बताया कि अशोक राणा का परिवार पिछले 6 साल से यहां रह रहा है। हरीश राणा के माध्यम से यह पता चला है कि एम्स में डॉक्टर और प्रशासन की एक बैठक हो चुकी है। एम्स की टीम आएगी और अशोक राणा के बेटे हरीश राणा को एंबुलेंस से ले जाया जाएगा। तेजस का कहना है कि एक पिता ने अपने बेटे के जीवन के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया है। वह पिछले कई सालों से यहां किराए के फ्लैट में रह रहे हैं। खाने-पीने की सामग्री को अलग-अलग स्टेडियम में सेल करते थे, जिससे परिवार का गुजारा हो रहा है। अशोक के चेहरे पर उनका दुख झलकता है राज एंपायर सोसाइटी के फेडरेशन के सचिव अभिनव त्यागी ने बताया कि सोसाइटी में जब भी अशोक राणा आते-जाते थे, तो उनका दुख और दर्द चेहरे से हम लोग समझ जाते थे। वह बेटे को लेकर कई बार बताते थे कि जिंदगी बच जाए और वह सही हो जाए, इसके लिए उन्होंने 13 साल में बहुत प्रयास किए। आज पूरी सोसाइटी हरीश राणा के परिवार के साथ है। एंबुलेंस के माध्यम से हरीश राणा को दिल्ली एम्स ले जाया जाएगा। वहां डॉक्टरों की देखरेख में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दी है। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए… दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। तब से न वह बोल पा रहे हैं और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे हैं। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज पूरी तरह फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं होती। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… 'बेसुध बेटे को घर की हर बात बताती थी':हरीश राणा की मां बोली- उम्मीद थी कि पलक झपकाकर बता देगा कि सुन लिया गाजियाबाद के राज एंपायर सोसाइटी की 13वीं मंजिल। साधारण से फ्लैट के कमरे में मेडिकल बेड पर हरीश (31) बेसुध लेटा है। पेट में पैग सेट पाइप और नाक में ऑक्सीजन पाइप लगा है। घर में परिजन, जानने वाले, अनजान, सरकारी अधिकारी व मीडियावालों का तांता लगा है। पिता अशोक राणा भरे गले से बता रहे हैं कि हमारी साढ़े बारह साल की सेवाओं का हिसाब-किताब अब पूरा हो रहा है, इसलिए यह फैसला आ गया। पढ़ें पूरी खबर बेटे के लिए इच्छामृत्यु मांगने वाले पिता का दर्द:बोले- बेटे को तड़पते हुए नहीं देख सकता था, पड़ोसी बोले- 13 साल से मुश्किल में परिवार 'मैं बेटे के दर्द को बता नहीं सकता। उसकी पीड़ा और तड़प को देख नहीं सकता था। मैंने बेटे के लिए 13 साल में क्या-क्या कष्ट सहे, मैं बता नहीं सकता। मेरा पूरा परिवार तबाह हो गया। बेटा ठीक हो जाए, इसके लिए मैंने अपना घर तक बेच दिया। सब कह रहे हैं कि मैंने बेटे के लिए इच्छामृत्यु मांगी और मुझे यह मिली। लेकिन लोग यह नहीं जानते कि मेरा बेटा मेरा सबकुछ है। मेरी दुनिया, मेरा भविष्य। मैं कितनी पीड़ा में हूं, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता।' पढ़ें पूरी खबर
    Click here to Read more
    Prev Article
    HP अफसरों का हत्यारोपी बोला- नौकरी से निकलवाया:बेइज्जती करते थे, इसलिए मार डाला; बदायूं में 4 मिनट में की पूरी वारदात
    Next Article
    फैशन डिजाइनर के सुसाइड के बाद पिता की तबीयत बिगड़ी:पिता बोले- FIR लिख जाती तो बेटी जिंदा होती; आगरा में कांस्टेबल के साथ लिव-इन में थी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment