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    संत समिति ने कोर्ट के फैसले का समर्थन किया:जितेंद्रानंद सरस्वती बोले- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण में अब दूध का दूध और पानी का पानी होगा

    5 hours ago

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    प्रयागराज की स्पेशल पाक्सो कोर्ट के निर्देश पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ है। प्रयागराज के झूसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज कर ली गई है। इसके बाद संतों का इसपर रिएक्शन आना शुरू हो गया है। वाराणसी में मौजूद अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जगद्गुरु स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस कार्रवाई और कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोग यह न सोचे कि यह राज्य सरकार से चल रहे अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद की वजह से है। यह पीड़ित के बयान पर केस है। अब इस केस में दूध का दूध और पानी का पानी होगा। यह पीड़ित के न्याय का मामला अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा - प्रयागराज कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। इस प्रकरण को बहुत सारे लोग राज्य सरकार और शकराचार्य के बीच में चल रहे विवाद को लेकर देख रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अखिल भारतीय संत समिति का भी यही मानना है कि यह राज्य सरकार का नहीं बल्कि पीड़ित को मिला न्याय है। FIR दो तरीके से होती है स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा - हमारा मानना है FIR दो तरह से होती है। एक पीड़ित अपनी गुहार लेकर थाने जाता है और वहां अधिकारी उसकी बात सुनका प्राथमिकी दर्ज कर लेता है। दूसरा जब पीड़ित को यह लगता है कि पीड़ा देने वाला ताकतवर है। वह मीडिया और कोर्ट को भी अपने पक्ष में कर सकता है, तो वह कोर्ट का रुख करता है और वहां से उसे न्याय मिलता है और FIR दर्ज होती है। यह भी सेम वही प्रकरण है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर फैसला दिया है स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा- इस केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता की मदद ली अपनी सुनवाई में । ये वही अधिवक्ता हैं । जो इनकी तरफ से श्रीराम भूमि केस में इनकी तरफ से बहस कर रहे थे। ऐसी परस्थितियों में कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना है और सुनने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों पक्षों को ही नहीं जिनका शोषण हुआ ऐसे बच्चों का कलमबंद बयान भी दर्ज हुआ इसके बाद यह कार्रवाई हुई है। अब होगा दूध का दूध और पानी का पानी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया- हम और पूरी अखिल भारतीय संत समिति कोर्ट के फैसले का स्वागत करती है। आगे दूध का दूध और पानी का पानी होगा है। हम चाहते हैं कि इस प्रकरण में न्याय हो और लोगों के बीच में एक उदाहरण पेश हो अब जानिए क्या है प्रकरण… 8 फरवरी को कोर्ट में की थी शिकायत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं। कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। तब शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा था कि हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था। 13 फरवरी: आशुतोष महाराज कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले 13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा था कि 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है। शंकराचार्य के वकील ने इसका विरोध किया था। कहा था कि ये सिर्फ आरोप हैं। हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए। इस पर आशुतोष महाराज ने जज से कहा था- मेरी कार को बम से उड़ाकर मुझे मारने की धमकी दी जा रही। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिए। जज ने कोर्ट रूम खाली कराया, बच्चों के बयान सुने इसके बाद जज ने कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया था। कमरे में सिर्फ दोनों पक्षों के वकील ही बचे थे। इसके बाद बच्चों को कोर्ट रूम में लाया गया। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की कहानी सुनाई थी। ये सारे बयान बंद कोर्ट रूम के अंदर हुए थे। इन बयानों को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया गया था। जज ने पूछा था- आप बच्चों के कौन हैं? स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष महाराज से कुछ सवाल भी पूछे थे। कहा था कि आप इन पीड़ितों के क्या हैं? अभिभावक किन आधार पर बने? तब आशुतोष महाराज ने कहा था कि गुरु परंपरा के मुताबिक मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तो इन बच्चों ने मुझसे संपर्क किया।इसके बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस होगा, इसके लिए 21 फरवरी यानी आज की तारीख तय की थी। शंकराचार्य और रामभद्राचार्य माघ मेले में हुए विवाद के बाद आए आमने-सामने चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे।
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