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    सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की दहशत के बीच ठग एक्टिव:लिस्ट से नाम कटवाने का व्यापारियों को दे रहे लालच, कंपनी से बता रहे सेटिंग

    11 hours ago

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    मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्किट में ध्वस्त करण की दहशत के बीच कुछ ठग एक्टिव हो गए हैं। यह ठग व्यापारियों से संपर्क कर उन्हें ध्वस्त करण से बचाने का दावा कर रहे हैं। मंगलवार को इन ठगों की चर्चा सेट्रल मार्किट बाजार से आवास एवं विकास परिषद कार्यालय तक रही। अफसरों का साफ कहना है कि व्यापारी ऐसे किसी भी व्यक्ति के झांसे में बिल्कुल ना आएं। दो तस्वीरें देखें… पहले जानिए सेंट्रल मार्किट को शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्किट में भूखंड संख्या 661/6 आवासीय भूखंड था। यह भूखंड वर्ष 1986 में काजीपुर निवासी वीर सिंह को आवंटित किया गया था।। 30 अगस्त, 1986 को उन्हें भूखंड का कब्जा दे दिया गया। 6 अक्टूबर, 1988 को फ्री होल्ड डीड जारी की गई, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि यह भूखंड आवासीय है। इसके कुछ समय बाद विनोद अरोड़ा नाम के व्यक्ति ने पावर ऑफ अटर्नी के माध्यम से इन संपत्तियों का नियंत्रण प्राप्त किया और वहां 22 दुकानों का निर्माण करा डाला। इसके बाद पूरा इलाका कमर्शियल एक्टिविटी से पटता चला गया। 30 साल से ज्यादा चली लड़ाई सेंट्रल मार्किट के आवासीय प्लॉटों पर हुई व्यावसायिक गतिविधियों को शुरु से ही रुकवाने का प्रयास हुआ लेकिन आवास एवं विकास परिषद रुकवा पाने में नाकाम रहा। लगभग 30 साल बाद 17 दिसंबर, 2024 को लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने 661/6 भूखंड व उसकी तर्ज पर बने निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए। तनाव बढ़ता चला गया और 25 अक्टूबर, 2025 को आवास एवं विकास परिषद ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर 22 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। फिर डाली गई अवमानना याचिका 661/6 पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद आवास एवं विकास परिषद के बुलडोजर की गर्जन शांत हो गई। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने फिर अवमानना याचिका दायर की। 27 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। विभाग को किरकिरी झेलनी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि कोर्ट के आदेश पर अगले ही दिन उन निर्माणों की लिस्ट जारी कर दी गई, जहां दूसरे चरण में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जानी है। पिछले 15 दिन से मामला गर्माया हुआ है। एक बार फिर ध्वस्तीकरण की तलवार सेंट्रल मार्किट पर लटकी है। दहशत के बीच ठग हो गए एक्टिव पुलिस प्रशासन हो या फिर आवास एवं विकास परिषद, दोनों ही फिलहाल दुकानदारों के पक्ष में दिखाई पड़ रहे हैं। यही वजह है कि इन दुकानदारों को स्वत: ही अवैध निर्माण तोड़ने व नियम विरूद्ध गतिविधियों को बंद करने का समय दिया जा रहा है। इस बीच तरह तरह की उड़ रही अफवाहों के बीच बाजार में ठगों की एंट्री हुई है। यह ठग व्यापारियों से संपर्क करते घूम रहे हैं। उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि जो लिस्ट आवास एवं विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण की तैयार की है, उससे वह उनके निर्माण का नाम हटवा सकते हैं। स्पष्ट रूप से डिमांड तक की जा रही है। बाजार में दिखने लगी पीले पंजे की दहशत 661/6 पर कार्रवाई से व्यापारी दहशत में हैं। छन छन कर आ रही सूचनाओं ने उन्हें और ज्यादा डरा दिया है। व्यापारी खुद ही अवैध निर्माण गिरा रहे हैं। कुछ ने कमर्शियल गतिविधियों को बंद करने का ऐलान भी कर दिया है। आलम यह है कि दुकानों पर लगे बोर्ड हट गए हैं और आवास नंबर दर्शाने वाले बैनर चस्पा होते जा रहे हैं। इस बीच आवास एवं विकास परिषद की टीमें भी एक्टिव हो गई हैं जो घर घर जाकर सर्वे रिपोर्ट तैयार करेंगी। 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे रिपोर्ट आवास एवं विकास परिषद हो या फिर प्रशासन, इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं कि अगर न्यायालय के आदेशों की अह्वेलना हुई तो खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में वह जरा भी राहत देने के मूड में नहीं हैं। अप्रत्यक्ष रूप से मदद केवल इतनी है कि व्यापारी इन अवैध निर्माणों को स्वत: ध्वस्त कर लें ताकि पीले पंजे की नौबत ना आए। राहत की बात यह है कि पहले आवास एवं विकास परिषद के अफसरों को 13 मार्च में कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ जवाब दाखिल करना था लेकिन अब 27 तारीख इसके लिए निर्धारित हुई है। XEN बोले- बहकावे में ना आएं व्यापारी आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अभिषेक राज का कहना है कि उनके पास भी इस तरह की शिकायत आई थी कि कुछ लोग ध्वस्तीकरण से बचाने का व्यापारियों को भरोसा दिलाते ढूंढ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है जो टल नहीं सकता। ऐसे लोगों पर कतई विश्वास ना करें बल्कि पुलिस से शिकायत करें। जहां तक ध्वस्तीकरण की बात है तो व्यापारी स्वत: ध्वस्त करें। विभागीय टीम घर घर जाकर सर्वे रिपोर्ट तैयार करेगी और अब साक्ष्यों के साथ 27 मार्च में कोर्ट में दाखिल करेगी।
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