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    सिद्धौर मदरसे पर PFI कनेक्शन का आरोप:बाराबंकी में मजार की जमीन विवाद में 'देश विरोधी' फंडिंग की जांच

    6 hours ago

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    बाराबंकी जनपद के सिद्धौर कस्बे में एक निजी मदरसे की गतिविधियों और उसकी जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। "सबीरुल इरशाद" नामक मदरसे पर स्थानीय स्तर से मजार की जमीन हड़पने के आरोप लगे हैं। इसके साथ ही, प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से इसके तार जुड़े होने के दावे ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी कार्यालय पहुंचे शिकायतकर्ताओं ने मदरसे की फंडिंग को देश विरोधी गतिविधियों से जोड़ते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता मोहम्मद नफीस ने मदरसे के अस्तित्व पर सवाल उठाए हैं। किला पीर बाबा मजार कमेटी के संरक्षक नफीस का आरोप है कि मदरसा कमेटी मजहबी आड़ में मजार की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि मदरसे का पिछला गेट मजार की ओर खोलकर जमीन कब्जाने की कोशिश की गई है। नफीस ने PFI का नाम लेते हुए कहा कि संस्था को संदिग्ध स्रोतों से पैसा मिल रहा है, जिसकी जड़ें देश विरोधी ताकतों से जुड़ी हो सकती हैं। मदरसा कमेटी के सदस्य मोहम्मद फैसल ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि PFI जैसे संगठन का नाम लेकर उन्हें केवल डराने और बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। फैसल के अनुसार, उनके इलाके में किसी को PFI के बारे में जानकारी नहीं है। वहीं, मदरसे के अध्यक्ष निजामुद्दीन ने कागजी सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि मदरसा किसी खैरात या सरकारी जमीन पर नहीं, बल्कि खरीदी गई अपनी निजी भूमि पर बना है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मदरसा लखनऊ से रजिस्टर्ड है और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनके पास हर इंच जमीन का हिसाब और वैध दस्तावेज मौजूद हैं। जिलाधिकारी ने इस मामले में जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंप दी है। यदि PFI फंडिंग के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं।
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